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होली पर खून से नहाया था सकेतड़ी: हैवानियत की सारी हदें कर दी थी पार, अब सात साल...100 सुनवाई बाद मिला न्याय

Fri, 13 Dec 2024 01:13 PM IST
निवेदिता वर्मा दीपक शाही, अमर उजाला, पंचकूला
दीपक शाही, अमर उजाला, पंचकूला Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 13 Dec 2024 01:13 PM IST
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Seven Sentenced To Life Imprisonment In Murder Case in Panchkula
बविंद्र और उनकी मां दविंदर काैर - फोटो : फाइल
सात साल पहले होली पर पंचकूला के गांव सकेतड़ी में हुई युवक वरिंद्र की निर्मम हत्या मामले में जिला अदालत ने एक पूर्व पार्षद के बेटे सहित सात दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही सभी दोषियों पर हत्या की धारा के तहत 25-25 हजार रुपये जुर्माना लगाया है।
Seven Sentenced To Life Imprisonment In Murder Case in Panchkula
हिरासत में आरोपी - फोटो : संवाद
100 सुनवाई के बाद मिली सजा
सकेतड़ी हत्या कांड में 28 लोगों की गवाही के बाद सात साल बाद बुजुर्ग मां को न्याय मिल गया। 100 सुनवाइयों के बाद सात आखिर सात आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। मामले में मोबाइल फोन, गंडासे, लोहे की रॉड, हॉकी, चाकू सहित करीब 36 सबूत एकत्रित किए गए। शिकायतकर्ता के वकील ने बताया कि इस मामले में सौ से ज्यादा सुनवाइयां हुई। वरिंद्र की मां दविंदर कौर का कहना है कि उम्रकैद नहीं फांसी की सजा जरूरी थी, ताकि फिर कोई मां इस तरह अपना बेटा न खोए...। उन्होंने सात साल तक अपने इकलौते बेटे के हत्यारों को सजा दिलाने के लिए संघर्ष किया। उन्होंने तय कर लिया था कि चाहे कुछ भी हो जाए कदम पीछे नहीं हटाएंगी। अपने बेटे वरिंद्र के कातिलों को सजा दिलवाएंगी।
Seven Sentenced To Life Imprisonment In Murder Case in Panchkula
सकेतड़ी हत्याकांड - फोटो : संवाद/फाइल
तीसरे वकील के आने से बदला केस का रुख
दविंदर कौर का कहना है कि उनके भाई जय सिंह समेत परिचित उनके साथ ढाल बनकर खड़े रहे। इस केस में दो वकील बदले। डेढ़ साल बाद 2019 में तीसरे वकील जसवंत सिंह ने एक बुजुर्ग मां की पुकार सुनी और पूरे केस का रुख ही बदल दिया। इसके बाद बुजुर्ग दविंदर कौर की जिद के आगे कातिलों के हर प्रयास नाकाम होते गए। 
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Seven Sentenced To Life Imprisonment In Murder Case in Panchkula
सकेतड़ी हत्याकांड - फोटो : संवाद/फाइल
कोर्ट ने एक मिनट में सुनाई सजा
वीरवार को जिला अदालत ने सात दोषियों को उम्रकैद की सजा महज एक मिनट में सुना दी। दरअसल फरवरी 2024 में लगातार तीन से चार दिन तक 30 आदमियों की गवाही के बाद बहस हुई। इंसाफ की राह देख रही दविंदर कौर के कलेजे को ठंडक मिली है। वह अपने भाई जय सिंह को पकड़ कर रोने लगीं, लेकिन यह आंसू गम के नहीं खुशी के थे। उन्होंने कहा कि जिस तरह मेरे बेटे की बिना गलती बेरहमी से हत्या की गई। उस तरह ऐसा किसी दूसरी मां के बेटे के साथ न हो, किसी मां का संसार न उजड़े।
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Seven Sentenced To Life Imprisonment In Murder Case in Panchkula
दविंदर काैर - फोटो : संवाद
आज भी कानों में गूंजती है..कुल्हाड़ी और तलवारों की आवाज
आज भी 13 मार्च 2017 की रात दविंदर कौर भूल नहीं पाई हैं। कोई ऐसा दिन नहीं है, जब बेटे वरिंद्र की याद में उसकी मां के आंखों से आंसू न गिरे हों। वह आज भी अपने आप को कोसती है, कि होली की रात 8.15 बजे कुल्हाड़ी और तलवारों से उनका दरवाजा पीटते युवकों का शोर सुनकर अपने बेटे को घर से बाहर जाने से रोक लेती तो उनके बुढ़ापे की बैसाखी आज भी उनके साथ होती। उनके सपने पूरे होते। दविंदर कौर एक आशा वर्कर हैं। उनका सपना था कि नया घर बनवाने के बाद अपने बेटे की शादी करेंगी। उनके पति उनके साथ नहीं थे। एक सिंगल मदर के रूप में उन्होंने अपने बेटे की परवरिश की थी। उनका बेटा वरिंद्र ने स्नातक की पढ़ाई पूरी कर नौकरी भी करने लगा था, लेकिन उनकी सारी ख्वाहिश अधूरी रह गई। जब उनके बेटे को मौत के घाट उतार दिया गया।
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