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असली कागज पर छापे गए थे 2 करोड़ के नकली नोट, वो भी 2000 के
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली
Updated Tue, 06 Dec 2016 09:06 AM IST
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2000 के नकली नोट छापने वाले मोहाली के भाई-बहन
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42 लाख की करेंसी के साथ पकड़े गए भाई-बहन ने 2000 के नकली नोट असली कागज पर छापे थे। उन्हें ये पेपर कहां से मिला, देखिए अहम खुलासा।
नकली नोट छापने वाले भाई-बहन
- फोटो : अमर उजाला
दरअसल, मोहाली में नकली नोट छापने वाले गैंग का मास्टरमाइंड अभिनव ने मैसूर की उसी पेपर मिल में सेंध मारकर कागज लिया, जहां से सरकार मैसूर 2000 का नोट छपवा रही है। यह बात उस समय सामने आई, जब शनिवार को आरोपियों को कोर्ट में पेश किया। इस दौरान पुलिस ने आरोपियों का रिमांड लेने के लिए अपनी दलीलें दीं।
नकली नोट छापने वाले भाई-बहन
पुलिस का दावा है कि आरोपी कागज मिल के किसी अधिकारी या मुलाजिम के संपर्क में था। इसके अलावा पुलिस को शक है कि अभिनव का आईएसआई से भी लिंक हो सकता है। पुलिस इस एंगल पर भी जांच कर रही है। अदालत में पुलिस ने कहा कि नोट छापने के लिए सरकार चार जगह से कागज मंगवाती है। इसमें मैसूर, कोलकाता, नासिक व देवास (मध्य प्रदेश) शामिल है।
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नकली नोट छापने वाले भाई-बहन
अब तक जांच में सामने आया है कि आरोपी मैसूर कागज मिल के संपर्क में था। ऐसे में मिल में किस स्तर पर सांठगांठ थी, इस बारे में पता लगाया जाएगा। इसलिए कम से कम तीन दिन का रिमांड दिया जाए। वहीं, बचाव पक्ष की दलील थी कि अभिनव को 28 नवंबर को पकड़ा गया। जबकि एक दिन गैर कानूनी तरीके से पुलिस ने कस्टडी में रखा। फिर 29 को अदालत में पेश किया।
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42 लाख की जाली करेंसी समेत तीन गिरफ्तार
- फोटो : अमर उजाला
अब तक इस मामले में पुलिस की जांच शून्य है। पांच दिन के रिमांड के बाद भी पुलिस के हाथ कुछ नहीं लगा है। फिर भी अदालत ने आरोपियों को पांच दिसंबर तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया। जिक्रयोग है कि पुलिस ने 29 नवंबर को तीनों आरोपियों अभिनव वर्मा, उसकी कजिन विशाखा व सूरज नागपाल को जगतपुरा से पकड़ा था। नोटबंदी के बाद की यह पुलिस की सबसे बड़ी जाली करेंसी की रिकवरी थी।