पंजाब पुलिस की भर्ती से ठीक पहले मोहाली पुलिस ने फर्जी सर्टिफिकेट व डिग्रियां तैयार करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। जो भर्ती परीक्षा में अपीयर होने वाले अभ्यर्थियों को फर्जी योग्यता सर्टिफिकेट तैयार करके देते थे। इस एवज में उनसे मोटी रकम वसूलते थे। आरोपियों की पहचान राज कुमार निवासी डबवाली जिला फाजिल्का, संजय कुमार उर्फ सोनू आस्था होम बलटाना व चंद्र कुमार निवासी मुक्ति एनक्लेव खरड़ के रूप में हुई है। यह दावा एसएसपी गुरप्रीत सिंह भुल्लर ने पीसीए स्टेडियम में शनिवार को प्रेस कांफ्रेंस के दौरान किया।
सरकारी जॉब के लिए फर्जी डिग्री का खेल, गिरोह का पर्दाफाश, 3 काबू
उन्होंने कहा कि आरोपियों के पास से करीब दो हजार से अधिक विभिन्न बोर्ड व यूनिवर्सिटी के सर्टिफिकेट, एक कंप्यूटर, चार लैपटॉप, एक प्रिंटर-स्कैनर, तीन मोबाइल फोन, रजिस्टर, जाली मोहरें और 90 हजार रुपये कैश बरामद किया गया है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही इस केस से जुड़े कई अन्य आरोपी भी काबू किए जाएंगे। पुलिस के मुताबिक पंजाब पुलिस की परीक्षा में अपीयर होने वाले चार सौ के करीब अभ्यर्थी आरोपियों के संपर्क में थे। वहीं, आरोपियों ने स्वीकार किया है कि वह रेलवे, एफसीआई और पुलिस में भर्ती के नाम पर ठगी कर चुके हैं। यह गोरखधंधा वर्ष 2009 से चला रहे थे, लेकिन अब तक किसी को इसकी भनक नहीं लगी।
एसएसपी ने बताया कि थाना मटौर के एसएचओ महेश सैनी को गुप्त सूचना मिली थी कि आरोपी फेज-7 में एक किराए के घर में फर्जी सर्टिफिकेट व डिग्रियां बनाने का नेटवर्क चला रहे हैं। 12वीं फेल बच्चों को चंगुल में फंसाकर उनसे मोटी रकम वसूल रहे हैं। इसी बीच पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर आरोपियों के ठिकाने पर दबिश दी। इसके बाद इन्हें काबू कर लिया गया।
इन संस्थानों के दस्तावेज मिले पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़, मानव भारती यूनिवर्सिटी, हिमाचल प्रदेश, मोनद यूनिवर्सिटी दिल्ली-हापुड़ रोड, उत्तर प्रदेश, बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी, झांसी, उत्तर प्रदेश, काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल, सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन, नई दिल्ली, सीबीएसई दिल्ली, बोर्ड ऑफ हायर सेकेंडरी एजुकेशन, दिल्ली, द काउंसिल ऑफ बेसिक एंड टेक्निकल एजुकेशन, दिल्ली, पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड, मोहाली, काउंसिल ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन, मोहाली, बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन, ग्वालियर, मध्य प्रदेश
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वह जाली सर्टिफिकेट खुद ही अपने कंप्यूटर व लैपटॉप से तैयार करते थे। इतना ही नहीं उन्होंने एक स्पेशल सॉफ्टवेयर तैयार किया था। उन्होंने पैसे के लालच में यह काम शुरू किया था। वह ज्यादातर अपने इलाके के युवकों को ही शिकार बनाते थे।
पहले खुद का तैयार किया, फिर बना शातिर पूछताछ में पता चला है कि 2009 में फाजिल्का में बाबा खुशदिल इंस्टीट्यूट से आरोपी राज कुमार ने अपना फर्जी योग्यता सर्टिफिकेट तैयार करवाया था। फिर इंस्टीट्यूट वालों ने उसे लालच देकर अन्य छात्र लाने को कहा था। आरोपियों ने इंस्टीट्यूट में 16-17 बच्चों को सर्टिफिकेट दिए थे। वह 12,000 रुपये प्रति सर्टिफिकेट तैयार करवाकर देते थे। इसके बाद उसने 2009 में कुबेर कॉलेज फाजिल्का से पेपर दिलवाकर इलम यूनिवर्सिटी से बीए का सर्टिफिकेट तैयार करवाने का काम शुरू किया था।
पुलिस के मुताबिक इसके बाद राज कुमार डबवाली से मोहाली आ गया। यहां पर सुखविंदर नाम का व्यक्ति, जो पीजी चलाता था। उसने उसकी मुलाकात संजय कुमार से करवा दी। वहीं, आरोपी संजय कुमार पहले से ही जाली सर्टिफिकेट तैयार करने का काम करता था। उसका जीरकपुर में स्वास्तिका व आस्था नाम से दफ्तर हैं। इसके बाद दोनों ने मिलकर जाली सर्टिफिकेट तैयार कर युवाओं से ठगी करने लगे थे।
2012 की भर्ती में दो हजार के बनाए सर्टिफिकेट आरोपियों ने स्वीकार किया है कि 2012 में जब पंजाब पुलिस में भर्ती हुई थी। उस दौरान उन्होंने करीब दो हजार लोगों के विभिन्न यूनिवर्सिटी के फर्जी सर्टिफिकेट तैयार करवाए थे। जो नौकरी हासिल करने में कामयाब रहे।