कॉमेडियन अली असगर 'दादी' बनना नहीं चाहते थे। इसके लिए उन्होंने कपिल शर्मा को मना कर दिया था, लेकिन फिर भी वे बन गए। एक इंटरव्यू में खुद बताया, आखिर यह कैसे हुआ।
टैगोर थियेटर चंडीगढ़ में आयोजित दो दिवसीय जसपाल भट्टी ह्यूमर फेस्टिवल में शिरकत करने के लिए अली असगर पहुंचे। यहां उन्होंने दर्शकों को हंसा-हंसाकर लोट पोट कर दिया। वहीं पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने दिल के कई राज खोले। कॉमेडियन ने बताया कि जब कपिल शर्मा शो की बात चली तो पहले उन्होंने रोल के लिए मना कर दिया था। उसके बाद कहा गया कि दो एपीसोड कर लीजिए, फिर देखा जाएगा, लेकिन दो एपीसोड के बाद स्थिति एकदम चेंज हो गई।
अली असगर ने बताया कि दर्शकों को दादी की भूमिका इतनी पसंद आई कि सभी ने उनकी तारीफ करनी शुरू कर दी। उस वक्त मुझे समझ आया कि दर्शक ही किसी कलाकार को हिट या सुपरहिट करते हैं। फिर भी कलाकार को अपने शो के लिए एक दायरा तो तय करना पड़ता ही है। हर रोज दिन के अंत में उनको यह समझ में आना चाहिए कि उन्होंने आज कुछ अलग हटकर काम किया। दर्शकों से ही टीवी की दुनिया चलती है, और दर्शकों से ही एक कलाकार की पहचान होती है।
अली असगर ने कहा कि मैं तो अपने आपको आज भी एक न्यूकमर मानता हूं। जो भी काम करता हूं, उसमें उतनी ही ऊर्जा होती है, जो 20 साल पहले होती थी। मैंने कई माध्यमों के जरिए अपनी परफार्मेंस दी है। मसलन, टीवी, फिल्म, शो और स्टेज, लेकिन न तो खुद को किसी काम करने के लिए बाध्य किया, न ही कहीं रोक कर रखा। वह जब शो करते हैं तो उसे भी दिल से करते हैं। हर किरदार में खुद को पूरी तरह ढाल कर करते हैं, ताकि अपना सौ प्रतिशत दे सकें।
अली असगर ने बताया कि जब वह ‘कपिल शर्मा शो’ की शूटिंग कर रहे थे तो उस समय उनका एक और शो भी चल रहा था। इसलिए उनके पास इतना समय तक नहीं होता था कि घर जाएं। एक शूट खत्म होता था और दूसरा शुरू हो जाता था। ऐसे में वह सप्ताह में सिर्फ दो दिन ही घर जा पाते थे। अली असगर ने कहा कि अवार्ड किसी भी कलाकार के अचीवमेंट को बताते हैं। अवार्ड मिलना बड़ी बात होती है। इससे यह समझ में आता है कि कोई उनके काम का आकलन कर रहा है।