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तस्वीरें: 'भाषा' की जंग, चंडीगढ़ पंजाबी मंच के सदस्यों ने दी सामूहिक गिरफ्तारी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 22 Feb 2017 09:46 AM IST
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चंडीगढ़ पंजाबी मंच के सदस्यों ने दी सामूहिक गिरफ्तारी
- फोटो : अमर उजाला
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चंडीगढ़ में पंजाबी भाषा को पहली और प्रशासकीय भाषा का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर चंडीगढ़ पंजाबी मंच ने मंगलवार को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर सामूहिक गिरफ्तारी दी।
चंडीगढ़ पंजाबी मंच के सदस्यों ने दी सामूहिक गिरफ्तारी
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इससे पहले मंच की ओर से सेक्टर-20 स्थित मस्जिद ग्राउंड में रैली की गई। रैली को पंजाबी मंच के अलावा कई अन्य संगठनों के पदाधिकारियों ने संबोधित किया। इसके बाद मंच के सभी सदस्य पंजाब राजभवन क ा घेराव करने के लिए रवाना हुए। लेकिन उद्योग पथ पर पुलिस पहले से ही बैरिकेड लगाकर खड़ी थी। सदस्यों ने आगे बढ़ने की कोशिश की लेकिन नाकाम रहे। इसके बाद उन्होंने वहीं पर पुलिस को गिरफ्तारी दी। पुलिस सभी को हिरासत में लेकर मनीमाजरा थाना ले गई, जहां से बाद में उनको छोड़ दिया गया।
चंडीगढ़ पंजाबी मंच के सदस्यों ने दी सामूहिक गिरफ्तारी
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चंडीगढ़ पंजाबी मंच के महासचिव देवी दयाल शर्मा ने बताया कि पंजाब और हरियाणा के पुनर्गठन के समय तक (नवंबर 1966 तक) चंडीगढ़ की पहली प्रशासनिक भाषा पंजाबी थी। जैसे जैसे यहां बाहर से अधिकारी आए, उन्होंने साजिश के तहत पंजाबी को किनारे कर उसकी जगह अंग्रेजी को थोप दिया। उन्होंने कहा कि पिछले काफी समय से चंडीगढ़ के पंजाबी प्रेमी लगातार संघर्ष कर रहे हैं कि देश के संविधान अनुसार चंडीगढ़ में त्रिभाषा फार्मूले को सही रूप में लागू करते हुए पंजाबी भाषा को उसका बनता सही स्थान दिया जाए।
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चंडीगढ़ पंजाबी मंच के सदस्यों ने दी सामूहिक गिरफ्तारी
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देवीदयाल ने बताया कि चंडीगढ़ पंजाबी मंच की ओर से प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और शिक्षामंत्री आदि को पत्र लिखे गए हैं। पंजाब के गवर्नर और चंडीगढ़ के प्रशासक को कई बार ज्ञापन दिया गया। लेकिन चंडीगढ़ की अफसरशाही पंजाबी बोली को उसका बनता हक नहीं दे रही है।
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चंडीगढ़ पंजाबी मंच के सदस्यों ने दी सामूहिक गिरफ्तारी
इसके अलावा रैली को चंडीगढ़ पंजाबी मंच के चेयरमैन ऋषि राम अर्स, प्रधान डॉ सुखदेव सिंह सिरसा, महासचिव देवी दयाल शर्मा, सर्वजीत सिंह, अजायब सिंह, साधु सिंह, गुरदियाल सिंह, गुरनाम सिंह सिद्धू, सतबीर सिंह धनोआ, तरलोचन सिंह, सुखजीत सिंह, इंद्रजीत सिंह ग्रेवाल, मलकीयत सिंह, नाटककार डॉ आत्मजीत सिंह, वरिष्ठ साहित्यकार मोहन भंडारी आदि ने संबोधित किया।