मिलिए, लावारिसों की मसीहा से, बनके रिश्तेदार 300 संस्कार
इस महिला को लावारिसों का मसीहा कहा जाए तो गलत नहीं होगा। कारण, अब तक ये करीब तीन सौ लावारिस शवों को अंतिम संस्कार कर चुकी हैं। मिलिए, इनसे।
मिलिए, लावारिसों की मसीहा से, बनके रिश्तेदार 300 संस्कार
ये महिला हैं 52 वर्षीय अमरजीत कौर ढिल्लों। जीवन को पूरी तरह समाजसेवा में लगाने वालीं अमरजीत कौर ढिल्लों ने शादी भी नहीं की। वह पीजीआई में आए मरीजों की हर तरह से मदद करती हैं। जिसके पास इलाज के लिए पैसे नहीं हैं, उनको पैसों से मदद।
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अमरजीत 1980 में बैंक में क्लर्क लगी। साल 2000 में उन्होंने नौकरी से ऐच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर अपना जीवन समाज सेवा में लगा दिया। समाज सेवा के नाम पर वह किसी सरकारी या गैर सरकारी फंडिंग एजेंसी से पैसे नहीं लेती। वह अपनी पेंशन की रकम भी सेवाकार्य में लगा देती हैं।
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शहर में जितने भी लावारिस शव पुलिस को मिलते हैं, उनकी जब तक शिनाख्त नहीं होती, उनके अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी खुद अमरजीत ही उठाती हैं। अमरजीत अंतिम संस्कार से पहले श्मशान घाट के रजिस्टर पर लावारिस शव को नाम देकर रिश्ते वाले कॉलम में उसे अपना रिश्तेदार दर्शाती हैं।
मिलिए, लावारिसों की मसीहा से, बनके रिश्तेदार 300 संस्कार
लावारिस शवों के संस्कार के पीछे की कहानी सुनिए। एक बार जब वह पीजीआई में थीं, तो वहां एक डेडबॉडी आई। पत्नी के पास संस्कार के पैसे नहीं थे। पुलिस ने लावारिस लाश के तौर पर उसका चार्ज लिया। इस पर अमरजीत ने शव को अपना बताया और उसका अंतिम संस्कार खुद करवाया।