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आज से 29 अक्टूबर तक मनाएं दिवाली के पांच पर्व, जानिए शुभ मुहूर्त और पूजन की विधि

Sat, 26 Oct 2019 10:49 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Sat, 26 Oct 2019 10:49 AM IST
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Celebrate Diwali Festivals, Bhaiya Dooj, Dhan Teras
फाइल फोटो
आज से 29 अक्टूबर तक दिवाली के त्योहार रहेंगे, जो भारतीय समाज में बड़े धूमधाम से मनाए जाते हैं। हम आपको बता रहे हैं, इस त्योहारों के शुभ मुहूर्त और पूजन की विधि...
Celebrate Diwali Festivals, Bhaiya Dooj, Dhan Teras
फाइल फोटो
दीपों का त्योहार दिवाली 27 अक्तूबर को है। इस दिन दीपदान, गणेश पूजन, लक्ष्मी, कुबेर आदि संपूर्ण पूजन शीघ्र से शीघ्र प्रारंभ कर लेना चाहिए। यह कहना है सेक्टर 30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र का। उन्होंने कहा कि प्रदोष काल शाम छह बजकर 37 मिनट से रात आठ बजकर 32 मिनट तक वृष (स्थिर) लग्न विशेष शुभ रहेगा। इस समय अमृत की चौघड़िया रहने से इस योग में संपूर्ण दिवाली पूजन शीघ्र से शीघ्र प्रारंभ कर लेना चाहिए। यह प्रयास करना चाहिए कि रात्रि आठ बजकर 56 मिनट तक अर्थात नौ बजे से पहले मुख्य पूजन समाप्त हो जाए।
Celebrate Diwali Festivals, Bhaiya Dooj, Dhan Teras
धनतेरस पर खरीदारी करते लोग - फोटो : अमर उजाला
धनतेरस आज खरीदारी का शुभ मुहूर्त
धनतेरस आज शनिवार को है। भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख और कर्मकांडी बीरेंद्र नारायण मिश्र ने बताया कि इस दिन बर्तन खरीदने का शुभ मुहूर्त शाम 5.06 बजे से शाम 6.36 बजे के बीच लाभ की चौघड़िया में रहेगा। इसके अलावा दोपहर 12.06 बजे से 3.36 बजे तक भी समय शुभ है। इसके बाद मध्यम है।
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फाइल फोटो
नरक चतुर्दशी भी आज
सेक्टर-30 के श्री शिव शक्ति मंदिर के पुजारी पंडित श्याम सुंदर शास्त्री का कहना है कि दिवाली के एक रोज पहले नरक चतुर्दशी का पर्व मनाया जाता है। इस बार 26 अक्तूबर दिन शनिवार को नरक चतुदर्शी भी है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी, यम चतुर्दशी या फिर रूप चतुर्दशी कहते हैं। उन्होंने कहा कि इस दिन यमराज की पूजा करने और उनके लिए व्रत करने का विधान है। उन्होंने कहा कि हनुमान जी का जन्म भी इसी दिन हुआ था। इस दिन हनुमानजी की विशेष पूजा होती है।
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फाइल फोटो
निशीथकाल
27 अक्तूबर को निशीथकाल रात आठ बजकर 16 मिनट से रात 10 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। निशीथकाल में चर की चौघड़िया 8 बजकर 56 मिनट से रात 10 बजकर 34 मिनट रहेगा। इस समय में मिथुन लग्न और चर की चौघड़िया में पूजा करने का मुहूर्त मध्यम है, इसलिए प्रयास करना चाहिए कि प्रदोष काल में आरंभ पूजा रात 10 बजकर 34 मिनट पर समाप्त हो जाए अन्यथा रात 10 बजकर 34 मिनट से रात 12 बजकर 12 मिनट तक रोक की चौघड़िया रहेगी। इस समय में पूजा समाप्त कर मंत्र तंत्र आदि की साधना करनी चाहिए।
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