साइफाइंडर लाइसेंस खरीद घोटाला, नाइपर में CBI का छापा
सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने के मामले में सीबीआई ने नाइपर मोहाली के ऑफिस में छापेमारी की। देखिए तस्वीरें।
साइफाइंडर लाइसेंस खरीद घोटाला, नाइपर में CBI का छापा
मामले में सीबीआई ने नाइपर के कार्यकारी डायरेक्टर केके भूटानी नौ लोगों पर केस दर्ज किया है। इनमें रजिस्ट्रार व सीवीओ विंग कमांडर पीजेपी सिंह बड़ैच, कार्यवाहक रजिस्ट्रार, सेक्शन अफसर, डिप्टी रजिस्ट्रार और प्रोफेशर समेत पुणे की एक प्राइवेट कंपनी शामिल है। आरोपियों पर धारा-120-बी आरडब्ल्यू-420, 420, 409, 467, 471 आईपीसी व भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है।
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सीबीआई के अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच चल रही है। हालांकि, अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। जानकारी के मुताबिक, सीबीआई की छह टीमें शुक्रवार सुबह पौने नौ बजे नाइपर पहुंचीं। टीमों ने पहले उच्च अधिकारियों के घरों और दफ्तरों में दबिश दी। साथ ही नाइपर का सचिवालय भी नहीं खुलने दिया। रेड में अधिकारियों के घर की बारीकी से जांच की गई।
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सीबीआई की टीमों ने अधिकारियों के पर्स तक खंगाले। यह अभियान करीब आठ घंटे तक चला। इस दौरान नाइपर के सभी अधिकारियों को राउंडअप करके रखा गया। इस दौरान किसी को भी नाइपर कैंपस में नहीं जाने दिया गया। हालांकि, रेजिडेंशियल एरिया में सब कुछ सामान्य रहा। इस दौरान छात्रों के एक गुट ने सीबीआई रेड होने पर खुशी जताई। साथ ही उम्मीद जताई कि उन्हें इंसाफ मिलेगा।
साइफाइंडर लाइसेंस खरीद घोटाला, नाइपर में CBI का छापा
बता दें कि यह घोटाला पुणे की एक निजी कंपनी के साथ मिलकर अधिकारियों ने वर्ष 2006 से लेकर 2012 तक किया। जानकारी के मुताबिक, यह पूरा घोटाला 2.25 करोड़ का है। सीबीआई को रेड में नाइपर के डायरेक्टर के घर से 13 लाख की एफडी, बैंक में करीब 25 लाख, प्रॉपर्टी से संबंधित 50 लाख के दस्तावेज मिले हैं। इसके अलावा नाइपर के रजिस्ट्रार व सीवीओ के घर से करीब 1.5 करोड़ की पांच संपत्तियों के दस्तावेज मिले हैं।