6 नौकरियां छोड़कर आईपीएस बनी, दो बार एक ही मंत्री से भिड़ी और दोनों बार तबादला झेला। अब लेडी एसपी एक नई मुश्किल में फंस गई हैं, जानिए क्या चाहते हैं वो।
हम बात कर रहे हैं महिला एसपी संगीता कालिया की, जो बीजेपी मंत्री अनिल विज के गुस्से का शिकार हुई, वो भी दो-दो बार। मंत्री विज से भिड़ने के बाद संगीता कालिया रेवाड़ी से ट्रांसफर होकर पानीपत आईं और अब पानीपत में फिर से उनका सामना मंत्री अनिल विज से हो गया। यहां भी मंत्री विज ने एसपी साहिबा की शिकायत सीएम खट्टर से कर दी। नतीजा, एसपी कालिया का सवा दो महीने के अंदर दोबारा से ट्रांसफर कर दिया गया है।
अब उनको गुरुग्राम के भोंडसी में आइआरबी का कमांडेंट बनाया गया है। एसपी संगीता का तबादला पानीपत में एसपी पद पर इसी साल 24 अप्रैल को किया गया था और उन्होंने 27 अप्रैल को कार्यभार संभाला था। ट्रांसफर की वजह बताई गई, एसपी का जिला कष्ट निवारण समिति की बैठकों में न आना। अनिल विज पानीपत जिले के प्रभारी मंत्री हैं और इस नाते वह इस बैठक की अध्यक्षता करते हैं। महिला एसपी संगीता पिछले शुक्रवार को आयोजित जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में नहीं आई थीं। वह इससे पहले भी दो बैठकों में नहीं पहुंची थी।
इस पर मंत्री अनिल विज गुस्सा हो गए और उन्होंने इस बारे में मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर से शिकायत की। कार्रवाई करते हुए उनका तबादला कर दिया गया, लेकिन मंत्री विज एसपी संगीता कालिया के तबादले से खुश नहीं हैं। तबादले को वह रूटीन प्रक्रिया मानते हैं। उनकी नजर में आईपीएस अधिकारी की बार-बार अनुशासनहीनता के लिए यह कोई कड़ी कार्रवाई नहीं है। विज चाहते हैं कि कालिया को चार्जशीट किया जाना चाहिए था। सरकार तबादला करने के बजाए सिविल सर्विसेज रूल्स के तहत उनसे स्पष्टीकरण मांगती और कड़ी कार्रवाई करती।
बुधवार को जारी एसपी संगीता कालिया के आदेशों पर विज ने नाखुशी जताई है। उन्होंने कहा कि तबादला कोई कार्रवाई नहीं है। एक मंत्री की बैठकों से लगातार गैरहाजिर रहना बड़ी अनुशासनहीनता है, कार्रवाई भी उसी हिसाब से होनी चाहिए थी। चूंकि, तबादला तो उनका फतेहाबाद एसपी के पद से भी किया गया था, लेकिन आईपीएस अधिकारी के आचरण में कोई परिवर्तन नहीं आया। इसे देखते हुए उन पर इस बार सख्त एक्शन होना चाहिए था।