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सरकारी फरमानः महिलाओं के लिए हेलमेट अनिवार्य, यूटी प्रशासन ने जारी की अधिसूचना

Sat, 07 Jul 2018 09:33 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 07 Jul 2018 09:33 AM IST
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 Helmet mandatory for women, notification issued by UT Administration
सांकेतिक तस्वीर
दोपहिया वाहन चालक व पिछली सीट पर बैठकर सफर करने वाली महिलाओं (सिखों को छोड़कर) के लिए हेलमेट पहनना तत्काल प्रभाव से अनिवार्य कर दिया गया है। प्रशासन ने शुक्रवार को इसकी अधिसचूना जारी कर दी है। अधिसूचना के अनुसार सिर्फ सिखों को हेलमेट न पहनने की छूट दी गई है, जिसमें पुरुष के साथ-साथ महिलाएं भी शामिल हैं, लेकिन इसके लिए पगड़ी पहनना जरूरी है।


ट्रैफिक पुलिस की ओर से बिना हेलमेट का 300 रुपये का चालान काटा जाता है। बता दें कि अमर उजाला ने 4 जुलाई के अंक में बता दिया था कि प्रशासक की मंजूरी मिलने के बाद शुक्रवार तक अधिसूचना जारी हो सकती है।

इसके बाद ट्रैफिक पुलिस ने 10 दिनों तक बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया है। अब बिना हेलमेट पहने दोपहिया वाहन चलाने वाली महिला का चालान काटने की कार्रवाई पुलिस जल्द शुरू करेगी। इसके साथ ही पिछली सीट पर बिना हेलमेट पहने बैठी महिला का भी चालान किया जाएगा। डीजीपी संजय बेनीवाल का कहना है कि अधिसूचना के बाद तत्काल प्रभाव से नियम लागू हो गया है। इसमें भेदभाव नहीं किया जाएगा। बता दें कि पंजाब के राज्यपाल और यूटी के प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने मंगलवार को अंतिम मंजूरी दे दी थी, जिसके बाद प्रशासन ने अधिसूचना जारी की है। 


एक लाख महिलाएं बिना हेलमेट के चलाती हैं वाहन
प्रशासन की ओर से अधिसूचना जारी होने के बाद हेलमेट के बाजार का कारोबार भी बढ़ेगा। शनिवार से हेलमेट की सेल बढ़ जाएगी। करीब एक लाख महिलाएं ऐसी हैं, जो कि इस समय बिना हेलमेट के दोपहिया वाहन चला रही हैं, जिनमें वाहन के पीछे बैठकर सफर करने वाली महिलाएं भी शामिल हैं। इनमें सरकारी और निजी कर्मचारियों के अलावा कॉलेज और विश्वविद्यालय में पढ़ने वाली छात्राएं शामिल हैं।

 
 Helmet mandatory for women, notification issued by UT Administration
फाइल फोटो
सिर्फ 15 आपत्तियां आई थीं
प्रशासन ने इस पर दो माह पहले ड्राफ्ट अधिसूचना तैयार कर लोगों की आपत्तियां भी मांगी थीं। प्रशासन के अनुसार हेलमेट जरूरी होने से महिलाओं के साथ होने वाले सड़क हादसों में भी कमी आएगी। प्रशासन को इस नोटिफिकेशन पर करीब 15 आपत्तियां मिली थीं। चंडीगढ़ में शिरोमणि अकाली दल सहित कई अन्य दलों ने सभी सिख महिलाओं को हेलमेट पहनने से छूट देने की मांग की थी। इसके अलावा अधिकतर लोगों और एसोसिएशनों ने नोटिफिकेशन का समर्थन किया है।

मालूम हो कि पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बिना हेलमेट पहने महिलाओं की दुर्घटना में हुई मौतों पर खुद संज्ञान लेते हुए चंडीगढ़ प्रशासन को नोटिस जारी किया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि मौत लिंग नहीं देखती, महिलाओं को हेलमेट से छूट क्यों दी गई है। इसके तहत प्रशासन ने ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी कर लोगों की राय जानी है। हाईकोर्ट ने यह सवाल भी उठाया था कि चंडीगढ़ प्रशासन सभी महिलाओं के हेलमेट से छूट कैसे दे सकता है, क्या पुरुषों और महिलाओं के सिर में कोई फर्क है।

 
 Helmet mandatory for women, notification issued by UT Administration
फाइल फोटो
साल 2014 में हुई थी 26 महिलाओं की मौत
2013 में 18, 2014 में 26, 2015 में 18, 2016 में 22 और 2017 में 18 महिलाओं की मौत दुर्घटनाओं में हुई है। प्रशासन के एक सीनियर अधिकारी के अनुसार प्रशासक ने इस पर अपनी मंजूरी दे दी है। मालूम हो कि साल 2000 में भी पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने दोपहिया वाहन चालकों को हेलमेट पहनने का आदेश दिया था। उसके पश्चात चंडीगढ़ पुलिस ने बिना हेलमेट के दो-पहिया वाहन चलाने वालों का चालान शुरू कर दिया था।

तब चंडीगढ़ प्रशासन ने ही महिलाओं के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य कर दिया था। लेकिन, सिख संगठनों ने इसका विरोध शुरू किया और कहा कि यह सिख मर्यादा के विरुद्ध है। इसके बाद चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला पुलिस सुस्त पड़ गई थी।

10 दिनों तक महिलाओं को जागरूक करने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया जाएगा। महिलाओं को हेलमेट पहनने के लाभ बताए जाएंगे। इसके लिए पुलिस की अलग से टीमें लगाई जाएंगी, जो महिलाओं को प्रेरित करेंगी। -शशांक आनंद, एसएसपी ट्रैफिक
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