उत्तराखंड के चमोली जिले के रैणी में एक दिन पहले ग्लेशियर टूटने से हुई तबाही के दौरान लोगों को चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने बहादुरगढ़ के गांव खरहर निवासी व समाजसेवी डॉ. प्रदीप भारद्वाज अपनी टीम के साथ वहां पहुंच गए हैं। वे रात को करीब नौ बजे यहां पहुंचे थे।
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chamoli disaster
- फोटो : ANI
डॉ. प्रदीप ने बताया कि एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी की टीमें राहत एवं बचाव में जुटीं हैं। बड़े-बड़े पत्थरों के टुकड़े, कीचड़ और दिख रहे पानी ने केदारनाथ आपदा की याद ताजा कर दी। अमर उजाला से बातचीत में बताया कि मैंने यहां पर 11 ऐसे शव देखें, जो कीचड़ में धंसे थे। ज्यादातर शवों पर कपड़े गायब थे। अनुमान है कि पानी के दबाव में कपड़े बह गए होंगे।
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शवों को पहचानना मुश्किल हो रहा है। मजदूरों के पास कोई आई कार्ड नहीं था। पहचान के लिए शायद डीएनए की जरूरत पड़े। उन्होंने बताया कि आपदा के कारण कई लोगों के बीमार पड़ जाने के बाद उनकी टीम ऐसे गांवों में कैंप लगाकर मरीजों का इलाज कर रही है। सोमवार से आसपास के गांवों में कैंप लगाए हैं।
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लोगों से बातचीत करते टीम के सदस्य।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
लगभग 17 गांवों के लोगों ने ये भयानक मंजर देखा। लोग दहशत में हैं। उस दृश्य के गवाह बने कुछ लोग भी ट्रॉमा में हैं और उन्हें भी चिकित्सकीय मदद की जरूरत पड़ेगी। उन्होंने मरीजों के बारे में बताया कि एक ऐसी महिला को ग्रामीण उनके पास लेकर आए, जो अब बोल भी नहीं पा रही है।
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उत्तराखंड आपदा।
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हालांकि ग्रामीण बताते हैं कि इस घटना को देखने से पहले वह अच्छी तरह बोलती थी। महिला का ब्लड प्रेशर भी बढ़ा हुआ है, जबकि खाना-पीना सामान्य है। ऐसे सभी मरीजों की काउंसिलिंग की जा रही है। इसके अलावा गांव के कई बुजुर्ग लगातार ऐसे स्थानों पर बैठे हैं, जहां से पूरे नदी क्षेत्र पर निगाह रखी जा सके।