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एक गांव, जहां न सांप मारा जाता है, न सांप के काटने से कोई मरता है
टीम डिजिटल/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
Updated Sun, 19 Jun 2016 10:02 AM IST
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रोहतक के गांव में सांपों से जुड़ा अनोखा रिवाज
- फोटो : अमर उजाला
आपको जानकर हैरानी होगी, लेकिन ये सच है। देश में एक गांव ऐसा है, जहां न तो सांप को मारा जाता है और न ही यहां सांप के काटने से कोई मरता है। देखिए तस्वीरें।
रोहतक के गांव में सांपों से जुड़ा अनोखा रिवाज
- फोटो : अमर उजाला
चौंक गए न आप। हम बात कर रहे हैं, हरियाणा के हरियाणा के रोहतक का गांव रोहेड़ा की। इस गांव में पिछले 300 सालों से एक परंपरा चलती आ रही है। यहां सांप मारने को बहुत बड़ा पाप समझा जाता है। वहीं, आज तक यहां सांप के काटने से किसी की मौत नहीं हुई है और अकसर सांप आकर लोगों को काटते रहते हैं, लेकिन उन्हें मारा नहीं जाता।
रोहतक के गांव में सांपों से जुड़ा अनोखा रिवाज
- फोटो : अमर उजाला
इस अनोखी बात के पीछे की कहानी बताते हुए गांव के सरपंच सतबीर कुंडू कहते हैं कि करीब तीन सौ साल पहले कुंडू गौत्र के बुजुर्ग गांव घोघड़िया से आकर यहां बसे थे। उसी समय एक महिला ने एक बच्चे को जन्म दिया, जिसका नाम लखमीर रखा गया। कहा जाता है कि उसी महिला की कोख से बच्चे के साथ एक सांप ने भी जन्म लिया। उस महिला ने सांप का पालन पोषण भी अपनी औलाद की तरह किया।
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रोहतक के गांव में सांपों से जुड़ा अनोखा रिवाज
- फोटो : अमर उजाला
भाद्र मास की चौथ के दिन वह महिला खेतों में काम करने गई थी। इस दौरान उसने अपने बेटे और सांप को एक पालने में साथ-साथ सुला दिया। इस बीच उस महिला का भाई अचानक गांव आया और अपनी बहन को घर में न पाकर वह भी उसी खेत चला गया। महिला के भाई ने देखा कि उसके भांजे के साथ पालने में एक सांप लेटा हुआ है। किसी खतरे का अंदेशा जानकर उसने सांप को मार दिया। जिसके तुरंत बाद उस बच्चे की भी मौत हो गई।
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रोहतक के गांव में सांपों से जुड़ा अनोखा रिवाज
- फोटो : अमर उजाला
यह देखकर महिला आग बबूला हो गई और उसने रोते हुए अपने भाई से कहा कि तूने सांप के साथ मेरे बेटे को भी मार डाला है जिससे महिला को बहुत गुस्सा आया। उसने अपने भाई से कहा कि तू भविष्य में इस दिन कभी भी मेरे घर मत आना, क्योंकि इस से दिन तुझे मेरे घर से अन्न, जल तक नहीं दिया जाएगा। तब से लेकर आज तक जिस दिन सांप किसी को काट लेता है तो उस दिन कुंडू गोत्र के लोग किसी मेहमान, आगंतुक अथवा भिखारी को भी खाना नहीं देते।