{"_id":"57b3ffe44f1c1be1706eaff7","slug":"ajab-gajab-ajab-gajab-places-ajab-gajab-village-ajab-gajab-eleven-villages-unique-village","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"देखिए 11 ऐसे गांव, जहां के लोगों ने कभी नहीं लांघी थाने की दहलीज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
देखिए 11 ऐसे गांव, जहां के लोगों ने कभी नहीं लांघी थाने की दहलीज
ब्यूरो/अमर उजाला, भिवानी(हरियाणा)
Updated Thu, 18 Aug 2016 10:26 AM IST
विज्ञापन
हरियाणा के अनोखे 11 गांव
देश के 11 ऐसे गांवों के बारे में आपको बता रहे हैं, जहां रहने वाले लोगों ने कभी थाने की दहलीज के अंदर कदम नहीं रखा। ये रही पूरी जानकारी।
हरियाणा के अनोखे 11 गांव
- फोटो : अमर उजाला
ये गांव हैं, हरियाणा के भिवानी जिले। ये गांव प्रदेश भर के लिए अमन-चैन और भाईचारे का उदाहरण बने हैं। इन गांवों में विगत तीन से लेकर 14 साल के दौरान कभी ऐसी नौबत नहीं आई कि ग्रामीणों को पुलिस थाने जाना पड़ा हो। छोटे-मोटे मामलों को ग्रामीण मिल-बैठकर सुलझा लेते हैं। लोहारू थाना अंतर्गत गांव झांझड़ा हसनपुर के लोग पिछले 14 साल के दौरान कभी थाने नहीं गए।
हरियाणा के अनोखे 11 गांव
- फोटो : अमर उजाला
ग्रामीणों का मानना है कि थाने में जाने के बाद न केवल भाईचारा बिगड़ेगा बल्कि कोर्ट-कचहरी के चक्कर में आर्थिक नुकसान भी होगा। खास बात यह है कि गांव के विवाद पंचायती स्तर पर ही निपटा लिए जाते है और वर्षों से कोई मामला थाने नहीं पहुंचा है।
माईखुर्द : करीब 16 सौ की आबादी वाले इस गांव में पिछले 15-16 साल से कोई भी विवाद थाने तक नहीं पहुंचा है। एक व्यक्ति की मौत मामले में परिजनों ने हत्या के आरोप लगाए थे मगर वह जांच में ह्दयघात निकला।
माईखुर्द : करीब 16 सौ की आबादी वाले इस गांव में पिछले 15-16 साल से कोई भी विवाद थाने तक नहीं पहुंचा है। एक व्यक्ति की मौत मामले में परिजनों ने हत्या के आरोप लगाए थे मगर वह जांच में ह्दयघात निकला।
विज्ञापन
विज्ञापन
हरियाणा के अनोखे 11 गांव
- फोटो : अमर उजाला
झांझड़ा हसनपुर : लोहारू थाना क्षेत्र के तहत आने वाले इस गांव में पिछले 13-14 साल से कोई भी ग्रामीण थाने नहीं पहुंचा। न तो यहां कोई बड़ा विवाद हुआ और छोटे-मोटे झगड़े ग्रामीणों ने आपसी भाईचारे में निपटा लिए।
ढाणी कुशाल: करीब साढ़े चार साल पहले गांव के कुछ युवा हत्या के मामले में नामजद हुए। मगर बाद में बरी हो गए। इसके अलावा पिछले साढ़े चार के दौरान गांव में कोई आपराधिक घटना नहीं हुई। ग्रामीण पंचायती फैसलों पर यकीन करते है और सभी विवाद पंचायती स्तर पर ही निपटा लिए जाते हैं।
ढाणी कुशाल: करीब साढ़े चार साल पहले गांव के कुछ युवा हत्या के मामले में नामजद हुए। मगर बाद में बरी हो गए। इसके अलावा पिछले साढ़े चार के दौरान गांव में कोई आपराधिक घटना नहीं हुई। ग्रामीण पंचायती फैसलों पर यकीन करते है और सभी विवाद पंचायती स्तर पर ही निपटा लिए जाते हैं।
विज्ञापन
हरियाणा के अनोखे 11 गांव
- फोटो : अमर उजाला
लालावास : करीब 825 वोटों वाले इस गांव में पिछले आठ साल से कोई झगड़ा या अन्य विवाद का मामला थाने नहीं पहुंचा। ग्रामीण भी आपसी भाईचारे और पंचायती फैसलों में विश्वास करते है और विवादों को थाने-चौकी या कोर्ट-कचहरी में ले जाने की बजाए अपने स्तर पर निपटाते हैं।
सुखपुरा : इस गांव के ग्रामीणों को याद नहीं कि वे अंतिम दफा थाने कब गए थे। ग्रामीणों की माने तो पिछले 10-12 साल तक तो पक्का गांव का कोई विवाद थाने नहीं पहुंचा है। सारे विवाद आपसी सहमति से बैठक या पंचायत कर निपटा लिए जाते है।
सुखपुरा : इस गांव के ग्रामीणों को याद नहीं कि वे अंतिम दफा थाने कब गए थे। ग्रामीणों की माने तो पिछले 10-12 साल तक तो पक्का गांव का कोई विवाद थाने नहीं पहुंचा है। सारे विवाद आपसी सहमति से बैठक या पंचायत कर निपटा लिए जाते है।