छह साल बाद मिर्चपुर में फिर से टकराव हुआ तो लोगों का गुस्सा जमकर फूटा। कांग्रेस नेता अशोक तंवर मिलने पहुंचे तो उनपर लोगों ने जमकर भड़ास निकाली।
मिर्चपुर में टकराव के बाद भड़के लोग, तंवर बोले- जानता हूं चोट का दर्द
मिर्चपुर विवाद में घायलों से मिलने नागरिक अस्पताल पहुंचे कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर ने कहा कि चोट का दर्द क्या होता है उन्हें पता है। वह खुद भुगतभोगी हैं। उन्होंने जिला प्रशासन से घायलों का प्राथमिकता से इलाज करने की मांग करते हुए यह बात कही। तंवर ने घायलों की चोट देखने के बाद कहा कि दिल्ली में किसान रैली के दौरान उन्हें सिर में चोट आई थी। इस दौरान उनके साथ क्या बीता ये उन्हें ही पता है। आज भी वे चार चार गोलियां खा रहे हैं। उपायुक्त और प्रिंसिपल मेडिकल अफसर से बात करते हुए तंवर ने सिर में चोट लगे घायलों का सीटी स्कैन करवाने और उनका अच्छे से इलाज करवाने को कहा। फोन पर डीसी निखिल गजराज से बात कर कह कि घायलों का इलाज तक ठीक नहीं हो रहा।
अशोक तंवर को सुनाई खरी-खोटी
मिर्चपुर विवाद को राजनीति रंग देने के लिए एक बार फिर नेताओं का आना शुरू हो गया है। वहीं लोग भी इस बार राजनेताओं को मुंहतोड़ जवाब दे रहे हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर बुधवार को मिर्चपुर की वाल्मीकि बस्ती में पहुंचे। उनके बस्ती की सुरक्षा और रोजगार की मांग पर पीड़ितों ने उन्हें खरी-खोटी सुना दी। लोगों ने कहा कि जब आपकी सरकार थी तो तब भी उन्हें झूठे वादों के अलावा कुछ हासिल नहीं हुआ। तंवर ने बचाव करते हुए कहा कि मैं यहां सरकार के नाते नहीं आया बल्कि भाईचारे के नाते आपके दुख में शामिल होने के लिए पहुंचा हूं।
मिर्चपुर में दो पक्षों के बीच हुए विवाद के बाद बुधवार को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के सदस्य एवं पूर्व राज्यसभा सांसद ईश्वर सिंह गांव पहुंचे। उन्होंने अफसरों को फटकार लगाते हुए कहा कि हमला करने वाले युवकों को चार दिन में गिरफ्तार करें और घायलों को एक-एक लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। मामले की जांच के लिए डीसी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई है, जो 10 दिन में अपनी रिपोर्ट देगी।
दलित बोले, साहब इस गांव में नहीं रहना
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के सदस्य ईश्वर सिंह ने उपायुक्त निखिल गजराज और पुलिस अधीक्षक राजेंद्र मीणा से मुलाकात कर स्थिति की जानकारी ली। पुलिस चौकी में आयोग सदस्य से मिलने पहुंचीं वाल्मीकि बस्ती की छोटी, नत्थी और कैलो ने कहा कि साहब अब इस गांव में नहीं रहना चाहते। उन्हें इस गांव से दूर कहीं ओर बसाया जाए और उनके बच्चों को रोजगार भी उपलब्ध करवाया जाए। सात साल से डर के माहौल में जी रहे हैं। अब और नहीं सहा जाएगा।