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कैशलेस क्यों हुए बैंक, क्यों न छटीं भीड़, नोटबंदी नहीं ये 6 कारण आए सामने

Thu, 22 Dec 2016 09:52 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 22 Dec 2016 09:52 AM IST
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after note ban in india, huge crowd and cashless banks, many reasons behind this
एटीएम के बाहर पैसा निकालने के लिए लगी कतार।
नोटबंदी के 35वें दिन भी न बैंकों से भीड़ छटीं और न ही एटीएम के बाहर से लाइनें गायब हुई। इसके पीछे नोटबंदी नहीं, बल्कि 6 अन्य कारण हैं। देखिए, बैंक के दावे।
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एटीएम के बाहर पैसा निकालने के लिए लगी कतार।
बैंकों ने कैश न होने के पीछे 6 बड़े कारण गिनाए हैं। पहला तो ये कि 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट बंद होने के बाद नई करेंसी पूरी तरह अभी बाजार में नहीं आई है। सीमित करेंसी के चलते बैंकों और एटीएम में पैसा निकलवाने वालों की भीड़ जुट रही है।
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एटीएम के सामने उपभोक्ताओं की लगी कतार।
दूसरा ये कि नोट जमा करने की लोगों की आदत कैशलेस व्यवस्था पर भारी पड़ रही है। बैंकों से जितना पैसा इन दिनों निकाला जा रहा है, उस तर्ज पर वापस बैंकों में जमा नहीं हो रहा। लोग घरों में पैसे का स्टॉक रखने में जुटे हैं। पहली दिसंबर को कर्मचारियों को मासिक वेतन मिला है। महीने के लिए खर्च के लिए कर्मचारियों ने बैंकों से पैसा निकालकर पेमेंट की है। बार-बार बैंक जाने से बचने को पैसा घरों में भी रखा है।
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atm
लोगों की कैश रखने की मानसिकता ने बैंकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बैंक पैसा देने में असमर्थता दिखा रहे हैं। पब्लिक परेशान है। बैंकों में पैसा जमा होता है और निकाला जाता है। इस तरह नोट सरकुलेशन में रहते हैं, लेकिन नोटबंदी के घबराए लोग अब बैंक से पैसा निकाल तो रहे हैं, लेकिन जमा नहीं कर रहे।
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एटीएम के बाहर लाइन - फोटो : अमर उजाला
तीसरा कारण,अहम बात ये है कि नोटबंदी के बाद से कारोबारी भी रोजाना कैश बैंकों में जमा करवाने से कतरा रहे हैं। उनका कहना है उन्हें रोजाना पेमेंट करनी पड़ती है। नकद ही पेमेंट की प्रथा अभी भी पहले की तरह चल रही है। कैशलेस व्यवस्था अपनाने में अभी वक्त लगेगा। एक होल सेलर का कहना है कि इन दिनों बैंकों में जाना समय की बर्बादी है। नोटबंदी से पहले आमतौर पर हर घर में महीने भर के खर्च के लिए लोग पैसा जमा करते आए हैं।
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