नोटबंदी के 35वें दिन भी न बैंकों से भीड़ छटीं और न ही एटीएम के बाहर से लाइनें गायब हुई। इसके पीछे नोटबंदी नहीं, बल्कि 6 अन्य कारण हैं। देखिए, बैंक के दावे।
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एटीएम के बाहर पैसा निकालने के लिए लगी कतार।
बैंकों ने कैश न होने के पीछे 6 बड़े कारण गिनाए हैं। पहला तो ये कि 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट बंद होने के बाद नई करेंसी पूरी तरह अभी बाजार में नहीं आई है। सीमित करेंसी के चलते बैंकों और एटीएम में पैसा निकलवाने वालों की भीड़ जुट रही है।
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एटीएम के सामने उपभोक्ताओं की लगी कतार।
दूसरा ये कि नोट जमा करने की लोगों की आदत कैशलेस व्यवस्था पर भारी पड़ रही है। बैंकों से जितना पैसा इन दिनों निकाला जा रहा है, उस तर्ज पर वापस बैंकों में जमा नहीं हो रहा। लोग घरों में पैसे का स्टॉक रखने में जुटे हैं। पहली दिसंबर को कर्मचारियों को मासिक वेतन मिला है। महीने के लिए खर्च के लिए कर्मचारियों ने बैंकों से पैसा निकालकर पेमेंट की है। बार-बार बैंक जाने से बचने को पैसा घरों में भी रखा है।
लोगों की कैश रखने की मानसिकता ने बैंकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बैंक पैसा देने में असमर्थता दिखा रहे हैं। पब्लिक परेशान है। बैंकों में पैसा जमा होता है और निकाला जाता है। इस तरह नोट सरकुलेशन में रहते हैं, लेकिन नोटबंदी के घबराए लोग अब बैंक से पैसा निकाल तो रहे हैं, लेकिन जमा नहीं कर रहे।
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एटीएम के बाहर लाइन
- फोटो : अमर उजाला
तीसरा कारण,अहम बात ये है कि नोटबंदी के बाद से कारोबारी भी रोजाना कैश बैंकों में जमा करवाने से कतरा रहे हैं। उनका कहना है उन्हें रोजाना पेमेंट करनी पड़ती है। नकद ही पेमेंट की प्रथा अभी भी पहले की तरह चल रही है। कैशलेस व्यवस्था अपनाने में अभी वक्त लगेगा। एक होल सेलर का कहना है कि इन दिनों बैंकों में जाना समय की बर्बादी है। नोटबंदी से पहले आमतौर पर हर घर में महीने भर के खर्च के लिए लोग पैसा जमा करते आए हैं।