देखिए, एसिड अटैक पीड़िताओं में गजब की जिंदादिली
चंडीगढ़ में बुधवार को प्रेस क्लब में एसिड अटैक पीड़िता रूपा, लक्ष्मी और रितू पहुंची थी। उन्होंने अपने साथ घटी खौफनाक पलों को साझा किया। रुपा ने बताया कि एसिड अटैक के तीन साल तक तो मैंने शीशा भी नहीं देखा था। बच्चे मुझसे डरते थे। मैं खुद अपने आप को देखकर डर जाती थी।'
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रुपा पर 2008 में एसिड अटैक तब हुआ जब वे सो रही थीं। रुपा ने बताया, पहले तो ऐसा लगा मेरे ऊपर बारिश हो गई। अस्पताल में जाकर पता चला कि अब इस दर्द के साथ जिंदगी काटनी पड़ेगी। रुपा पर तेजाब उनकी सौतेली मां ने ही फेंकवाया था। अब रूपा दिल्ली की स्टॉप एसिड अटैक्स एनजीओ से जुड़ी हैं।
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रितू पर मई, 2012 को उनके बुआ के बेटे ने प्रॉपर्टी विवाद के चलते तेजाब फेंका था। रितू ने बताया कि जिस दिन ये हादसा हुआ उस दिन उन्होंने लाल रंग के कपड़े पहने थे। घटना के बाद उन्होंने लाल रंग पहनना ही छोड़ दिया। रितू ने बताया कि उनके दोस्त साथ छोड़ गए थे, सिर्फ परिवार ने ही उनका साथ दिया।
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एसिड अटैक सरवाइवर और एंकर लक्ष्मी ने बताया कि उन पर उनकी उम्र से 17 साल बड़े व्यक्ति ने तेजाब फेंका था। जो लक्ष्मी से शादी करना चाहता था। मना करने पर उसने तेजाब फेंक दिया। लक्ष्मी ने बताया कि हादसे के बाद वे पूरी तरह टूट गई थीं।
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लक्ष्मी ने बताया कि शीशा देखती थी तो मरने का दिल करता था। सब लोगों ने साथ छोड़ दिया। लोग मुझसे बात भी नहीं करते थे। यहां तक की इस हादसे के लिए मेरा कसूर निकालते थे। अब लोगों का नजरिया बदल गया है। अब तो लोग कहते हैं कि कभी हमारे घर भी आया करो।