{"_id":"58860fa04f1c1b403fcf3e37","slug":"a-man-who-become-poor-from-millionaire","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"एक शख्स.. जो लंगर लगाकर करोड़पति से बना कंगाल, फिर भी जिदां है जज्बा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एक शख्स.. जो लंगर लगाकर करोड़पति से बना कंगाल, फिर भी जिदां है जज्बा
Tue, 24 Jan 2017 05:21 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 24 Jan 2017 05:21 PM IST
विज्ञापन
1 of 6
जगदीश लाल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
Link Copied
तस्वीरों में आप जिस इंसान को देख रहे हैं, ये किसी समय करोड़पति थे। 15 साल से लंगर लगा-लगाकर आज यह कंगाली के दौर से गुजर रहा है, लेकिन जज्बा बरकरार है।
2 of 6
जगदीश लाल
इस इंसान का नाम है जगदीश लाल आहुजा। इन्हें लोग बाबा और इनकी पत्नी को जय माता दी के नाम से जानते हैं। 80 साल का ये बुजुर्ग पत्नी के साथ मिलकर रोज एक हजार लोगों का पेट भरता है। 15 साल से ये इंसान पीजीआई के बाहर दाल, रोटी, चावल और हलवा बांट रहा है, वो भी बिना किसी छुट्टी के। जो लोग उन्हें जानते हैं, वह कहते हैं कि आहुजा ने एक से डेढ़ हजार लोगों को गोद ले रखा है।
3 of 6
जगदीश लाल
जगदीश लाला आहुजा भूखों का पेट भरने के लिए एक-एक कर करोड़ों की आधा दर्जन प्रॉपर्टी बेच चुके हैं। कई मुश्किलें आईं। लेकिन आहुजा के सेवा भाव में कमी नहीं आई। लंगर के लिए आज तक उन्होंने किसी से पैसे नहीं मांगे। कभी वे पीजीआई के अलावा 9 जगहों पर जरूरी सामान बांटते थे, लेकिन रुपयों की कमी के कारण उन जगहों पर जाना बंद हो गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
4 of 6
जगदीश लाल
आहुजा कहते हैं कि उन्हें जब कोई भूखा नजर आता है तो लगता है कि यह मेरे बच्चे जैसा है और मैं अपने बच्चे को कैसे भूखा रख सकता हूं। पैसों की कमी के चलते आहुजा अब सिर्फ पीजीआई और जीएमसीएच-32 के बाहर लंगर लगाते हैं और कहते हैं कि जब तक जमा पूंजी है, तब तक लंगर चलता रहेगा। दो साल पहले तक वे सारा कामकाज खुद देखते थे, लेकिन अब तबियत खराब रहने से वह सिर्फ दो घंटे के लिए पीजीआई जाते हैं। साथ में उनकी पत्नी भी होती हैं।
विज्ञापन
5 of 6
जगदीश लाल
जगदीश लाल आहुजा बताते हैं कि अब उनके लिए लंगर चलाना मुश्किल हो गया है। उनके पास रुपये भी नहीं हैं और न ही उसे संभालने का दमखम। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति या सोसाइटी उनके लंगर को संभालना चाहता है तो वे इस लंगर को उसे सौंप सकते हैं। अगर कोई आगे नहीं आया तो वे जब तक जिंदा हैं, तब तक पीजीआई के बाहर लंगर चलते रहेंगे।
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे| Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।