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यहां कीजिए ऐतिहासिक करतारपुर साहिब के दर्शन, अंदर की तस्वीरें पहली बार आई सामने, देखिए

Sun, 10 Nov 2019 10:23 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, डेरा बाबा नानक(बटाला)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, डेरा बाबा नानक(बटाला) Published by: खुशबू गोयल Updated Sun, 10 Nov 2019 10:23 AM IST
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550th Prakash Parv, Kartarpur Corridor, Kartarpur Sahib Inside Photos
करतारपुर साहिब के अंदर का नजारा - फोटो : अमर उजाला
पाकिस्तान स्थित ऐतिहासिक करतारपुर साहिब के दर्शन करना चाहते हैं तो ये तस्वीरें देखिए, आप निहाल हो जाएंगे। गुरुद्वारे के अंदर का नजारा पहली बार देखने को मिला है।
550th Prakash Parv, Kartarpur Corridor, Kartarpur Sahib Inside Photos
करतारपुर साहिब के अंदर का नजारा - फोटो : अमर उजाला
9 नवंबर 2019 को वो ऐतिहासिक लम्हा आ ही गया, जब सिख संगत ने पाकिस्तान जाकर श्री करतारपुर साहिब के दर्शन किए। 72 साल से देश भर के लाखों सिख श्रद्धालु जिस गुरुघर के दर्शन दूरबीन से किया करते थे, आज वह उसकी ड्योढ़ी पर थे। माथा टेक रहे थे। करतारपुर की पवित्र माटी को चूम रहे थे। अरदास कर रहे थे। खुशी के आंसुओं से आंखें भरी हुई थीं। लबों पर सतनाम वाहे गुरु के जयघोष थे। अब बाबे नानक का दर इतना करीब हो गया है कि कोई भी सिख श्रद्धालु वहां जाकर दर्शन दीदार कर सकता है। अरदास कर सकता है। वह भी बिना वीजा के।
550th Prakash Parv, Kartarpur Corridor, Kartarpur Sahib Inside Photos
करतारपुर साहिब के अंदर का नजारा - फोटो : अमर उजाला
इसके लिए भारत और पाकिस्तान ने एक समझौते के तहत करतारपुर कॉरिडोर का निर्माण किया। इस कॉरिडोर के जरिए पाकिस्तान के कस्बे करतारपुर को पंजाब के गुरुदासपुर जिले में स्थित डेरा बाबा नानक के साथ जोड़ा गया है। भारत से लगी सीमा से करीब चार किलोमीटर दूर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में रावी नदी के किनारे स्थित श्री करतारपुर साहिब गुरुद्वारा सिखों का पवित्र तीर्थ स्थल है। यह लाहौर से 120 किमी दूर स्थित है। गुरु नानक जी के माता-पिता का देहांत भी यहीं पर हुआ था। यहां बाबा नानक ने अपनी जिंदगी का अंतिम समय बिताया था। यहां उन्होंने 17 वर्ष 5 माह 9 दिन अपने हाथों से खेती तक की।
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550th Prakash Parv, Kartarpur Corridor, Kartarpur Sahib Inside Photos
करतारपुर साहिब के अंदर का नजारा - फोटो : अमर उजाला
दूसरी ओर, भारत में रावी नदी के किनारे श्री गुरु नानक देव जी का याद में बनाया गया डेरा बाबा नानक स्थित है। यह भारत-पाकिस्तान बॉर्डर से लगभग एक किलोमीटर दूर है। यह पंजाब के गुरदासपुर जिले में आता है। माना जाता है कि बाबा नानक यहां 12 साल तक रहे। मक्का जाने पर उनको दिए गए कपड़े यहां संरक्षित हैं। माघी के अवसर पर जनवरी के दूसरे सप्ताह में यहां भारी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। गुरु नानक देव जी ने 1506 में अपनी पहली उदासी के बाद इस जगह को ध्यान लगाने के लिए चुना था। जहां वह ध्यान लगाने बैठे थे, वहां एक कुआं था जिसे अजीता रंधावा दा खू (कुआं) के नाम से जाना जाता था।
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550th Prakash Parv, Kartarpur Corridor, Kartarpur Sahib Inside Photos
करतारपुर साहिब के अंदर का नजारा - फोटो : अमर उजाला
श्री गुरु नानक देव जी ने ही करतारपुर साहिब की स्थापना की थी और अपनी सभी उदासियों के बाद गुरु नानक देव जी करतारपुर में ही रहने लगे थे, जहां आज गुरुद्वारा करतारपुर साहिब मौजूद है। आस्था और इतिहास, दोनों के लिहाज से करतारपुर बहुत अहमियत रखता है। जब भारत का बंटवारा हुआ, तो पाकिस्तान की तरफ रहने वाले लाखों सिख भारत आ गए। उसके बाद श्री करतारपुर साहिब का स्थल बंटवारे के बाद कई सालों तक उजाड़ रहा, मगर उस दौर में भी बाबा नानक के कुछ मुसलमान भक्त वक्त-वक्त पर यहां दर्शन के लिए आते रहे। करतारपुर गुरुद्वारा में बाबा नानक की समाधि और कब्र आज भी मौजूद है।
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