1965 के भारत-पाक युद्ध का एक ये सच जानते हैं क्या?
सन् 1965 का भारत-पाक युद्ध सितंबर तक ही नहीं चला था, बल्कि उसके बाद भी जारी रहा। यह खुलासा किया गढ़वाल राइफल्स के रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जसबीर सिंह ने। रिपोर्टः आशीष वर्मा, चंडीगढ़
1965 के भारत-पाक युद्ध का एक ये सच जानते हैं क्या?
जसबीर कहते हैं कि सितंबर के बाद भी कई महीनों तक पाक की ओर से सीजफायर का उल्लंघन होता रहा। जिसका भारतीय जवानों ने मुंह तोड़ जवाब दिया था। वे गढ़वाल राइफल्स को लीड कर रहे थे।
1965 के भारत-पाक युद्ध का एक ये सच जानते हैं क्या?
जसबीर ने बताया कि राजस्थान के बाड़मेर से करीब 75 किलोमीटर दूर इंडो-पाक बार्डर पर स्थित गादरा सिटी से लगातार पाकिस्तान की ओर से सीज फायर का उल्लंघन किया जा रहा था। पाकिस्तान की रणनीति थी कि सीजफायर का उल्लंघन कर धीरे-धीरे भारत की ओर घुसा जाए। भारत को इस चाल का पता चल गया था।
1965 के भारत-पाक युद्ध का एक ये सच जानते हैं क्या?
जसबीर ने बताया कि पाक की चाल से वाकिफ होने के बाद उन्होंने दुश्मनों के ठिकानों की रेकी भी की। रेकी के दौरान उनको पाकिस्तानी सेना की क्षमता और संख्या के बारे में अंदाजा हो गया था। जसबीर सिंह ने रेकी की रिपोर्ट अफसरों को सौंपी। हाईकमान ने तुरंत इलाके को कैप्चर करके 17 नवबंर तक दुश्मनों को नेस्तनाबूत करने के आदेश दे दिए।
1965 के भारत-पाक युद्ध का एक ये सच जानते हैं क्या?
जसबीर ने बताया कि हमने प्लानिंग बनाई कि दुश्मन पर सामने और पीछे से वार किया जाएगा। दूसरी रेजीमेंट के साथ टाईअप भी हो गया। पास ही सत्तो नाम का एक गांव था। उसमें सभी सैनिक इकट्ठा हुए और सभी तैयारियां पूरी कीं। कंपनी चुपचाप गादरा की ओर आगे बढ़ी। 16 किलोमीटर लंबे रास्ते को चुपचाप कंपनी ने पार किया। पूरी रात कंपनी चलती रही।