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पति के अवशेषों पर उतारा सुहाग का चूड़ा, फिर चली शवयात्रा, देखकर मां खो बैठी होश

Mon, 09 Apr 2018 06:09 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जालंधर(पंजाब)
ब्यूरो/अमर उजाला, जालंधर(पंजाब) Updated Mon, 09 Apr 2018 06:09 PM IST
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39 Indians Killed in Iraq, Surjit Menaka Funeral in Jalandhar
सुरजीत मेनका का अंतिम संस्कार
इराक से आए पति के अवशेषों पर सुहाग का चूड़ा उतारा, फिर शवयात्रा चली। वहीं यह सब देखकर मृतक की मां होश खो बैठी, देखिए तस्वीरें।
39 Indians Killed in Iraq, Surjit Menaka Funeral in Jalandhar
सुरजीत मेनका का अंतिम संस्कार
जालंधर स्थित आदमपुर के पास गांव चूहड़वाली के सुरजीत माणके की मां हरबंस कौर और पत्नी ऊषा का तो बुरा हाल था। एक ही आवाज निकल रही थी कि हमारा तो सब कुछ लुट गया। हम तो चेहरा भी देख नहीं सके। वह रोते हुए कहने लगीं कि किन्नी वार दिल्ली गए पर सुरजीत नहीं मिलेया। सानूं धोखे च रखेया... कहदें सी सब ठीक  है, हमें क्या पता था कि हमारे साथ धोखा किया जा रहा है।
39 Indians Killed in Iraq, Surjit Menaka Funeral in Jalandhar
सुरजीत मेनका का अंतिम संस्कार
सुरजीत के अवशेष जब पहुंचे तो उसकी पत्नी ऊषा लाल चूड़ा पहने उनका इंतजार कर रही थी, लेकिन उसे क्या पता था कि पति की हालत ऐसी होगी कि वे देख भी नहीं पाएंगी। सुरजीत के अवशेष देख मां हरबंस कौर बोलीं- ये मेरा बेटा नहीं हो सकता, जब गया था तो ऐसा नहीं था। सुरजीत मेनका के अवशेष मंगलवार सुबह 9 बजे गांव पहुंचे तो हरबंस कौर का विलाप सुन वहां मौजूद सभी की आंखें भीग गईं।
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39 Indians Killed in Iraq, Surjit Menaka Funeral in Jalandhar
सुरजीत मेनका का अंतिम संस्कार
पत्नी उषा रानी बिलखते हुए बोलीं- पत्नी बोली 4 की जगह मैं 10 साल इंतजार कर लेती, लेकिन आप ऐसे तो न आते। सुबह 10 बजे के करीब सुरजीत का अंतिम संस्कार हुआ। 7 साल के बेटे ने मुखाग्नि दी। हमें 20 बार दिल्ली बुलाया गया, रात की ट्रेन पकड़ते और सीधा रकाबगंज गुरुद्वारा साहिब पहुंच जाते, वहां से सुबह बस में हमें विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के पास ले जाया जाता। हर बार वह दिलासा देतीं कि आपके लोग जिंदा है, चिंता न करो।
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सुरजीत मेनका का अंतिम संस्कार
हम दिल्ली गए, इस आशा में कि सुरजीत की शायद खोज खबर मिल गई होगी। हम जब भी कहते कि हमें एक बार उनसे बात करवा दो या उनका लाइव वीडियो दिखा दो तो विदेश मंत्री गुस्से में आ जातीं और कहतीं कि जाओ जो समझना है.. फिर समझते रहो। हमारे पास कोई रास्ता नहीं था, हम उनकी बात पर भरोसा कर चार साल अपने घर का दरवाजा देखते रहे।
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