J&K: हजारों की तादाद में बसे रोहिंग्या लोगों के आतंकी कनेक्शन की तलाश
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रियासत में बसे रोहिंग्याओं के आतंकी कनेक्शन की तलाश तेज हो गई है। पाक पोषित आतंकी संगठनों से इनके संबंधों की पड़ताल की जा रही है। तेजी से बढ़ रही इनकी तादाद से सुरक्षा खतरे से चिंतिंत विभिन्न सुरक्षा एजेंसियां इनकी जानकारियां खंगालने में जुटी हैं। सुरक्षा एजेंसियां इनकी गतिविधियों पर पैनी नजर रख रही हैं।
इनके यहां आकर बसने के मकसद की भी पड़ताल की जा रही है। राज्य के गृह विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इनके बारे में पूरी सूचना एकत्र करने की हिदायत दी गई है। इसमें इनके यहां रहने से लेकर गतिविधियों तक का ब्योरा शामिल है। जल्द ही इसकी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी जाएगी।
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इंडियन मुजाहिदीन तथा लश्कर ए तैयबा की ओर से इनके प्रति सहानुभूति जताए जाने की सूचना मिली है। लश्कर ने अपने आउटफिट में रोहिंग्या मुस्लिमों को भर्ती किए जाने की घोषणा की है। यह आतंकवाद पीडि़त रियासत की सुरक्षा के लिए गंभीर संकेत है। पाक समर्थित आतंकी तंजीमों से सांठगांठ की आशंका ने सुरक्षा एजेंसियों को चौकन्ना कर दिया है।
आतंकियों का म्यांमार कनेक्शन आया था सामने
दक्षिणी कश्मीर में पिछले साल एक मुठभेड़ में मारे गए दो विदेशी आतंकियों में एक के म्यांमार के होने की बात भी सामने आई थी। इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई। एजेंसियों को आशंका है कि आतंकी तंजीमों के लिए ये ओवर ग्राउंड वर्कर की भूमिका निभा रहे हैं। आतंकियों को मदद पहुंचाने के साथ ही जाली नोटों के कारोबार में भी इनका हाथ हो सकता है।
यहां जाली नोट मामले में हिजबुल के ओजीडब्ल्यू के रूप में बांग्लादेशी पकड़े जा चुके हैं। इनके तार सीमा पार के तस्करों से भी जुड़े हो सकते हैं। यह भी कहा जा रहा है कि इस समुदाय के कुछ लोग ड्रग तस्करी में कैरियर की भूमिका निभा रहे हैं। पूर्व आईजी एसएस बिजराल का कहना है कि रोहिंग्या मुस्लिमों के बारे में सरकार को विस्तृत छानबीन करने की जरूरत है। ताकि सुरक्षा में कोई चूक न रह जाए।
पाकिस्तान तथा चीन से सीमा लगने के कारण रोहिंग्या सुरक्षा के लिए खतरा न बन जाएं, इसको ध्यान में रखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने वर्कआउट शुरू कर दिया है। इन्हें जम्मू इतना रास क्यों आ रहा है। जबकि म्यांमार से राज्य की सीमा भी नहीं लगती है। इनका मकसद क्या है। किसी साजिश के तहत तो इन्हें यहां नहीं बसाया जा रहा। इन सबका विस्तृत ब्योरा इकट्ठा किया जा रहा है।
नहीं है कोई भी रिकार्ड, जांच जारी
यूनाइटेड नेशंस हाई कमिश्नर फार रिफ्यूजीस (यूएनएचसीआर) की ओर से रोहिंग्या शरणार्थियों को जारी सर्टिफिकेट की भी सुरक्षा एजेंसियों की ओर से जांच कराई जा रही है। यह देखा जाएगा कि सर्टिफिकेट वैध हैं या फर्जी।
जम्मू के डीसी सिमरनदीप सिंह का कहना है कि जिला प्रशासन के पास इनके बारे में कोई रिकार्ड नहीं है। यहां रहने वालों की संख्या भर है। अब इनका विस्तृत ब्योरा जुटाया जा रहा है। ज्ञात हो कि जम्मू में 22 स्थानों पर रोहिंग्या शरणार्थी रह रहे हैं। पिछले दिनों नरवाल में लगी आग में 80 झुग्गियों के जलने के बाद प्रशासन जागा। इसके बाद इनके बारे में विस्तृत जानकारी जुटाई जाने लगी।