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गंगा में नहर परियोजना लापरवाही की भेंट चढ़ी: करार बंधी खंड से, भुगतान की जिम्मेदारी मैकेनिकल शाखा को, जांच में चौंकाने वाले तथ्य

Wed, 22 Sep 2021 10:19 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Wed, 22 Sep 2021 10:19 AM IST
सार

वाराणसी में गंगा पार रेती में 11.95 करोड़ रुपये की लागत से 5.3 किमी लंबी और 45 मीटर चौड़ी नहर बनाई गई थी। बाढ़ के दौरान नहर के गंगा में समा जाने के बाद पूरे मामले की पड़ताल कराई गई तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं।

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sand canal project built in Ganges varanasi negligence MOU with bandhi khand but responsibility of payment to mechanical branch
रेती की तरफ 45 मीटर चौड़ी नहर निर्माण की योजना - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वाराणसी में जीवनदायिनी गंगा के प्रवाह से घाटों के क्षरण को बचाने के लिए बनाई जा रही नहर परियोजना में बड़ी लापरवाही सामने आई है। यूपीपीसीएल को सौंपी गई इस परियोजना का एमओयू बंधी खंड से किया गया था, मगर भुगतान की जिम्मेदारी मैकेनिकल शाखा को दे दी गई। ऐसे में बंधी खंड की जानकारी के बिना ही परियोजना का 60 फीसदी भुगतान कर दिया गया।

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इतना ही नहीं, यूपीपीसीएल की वाराणसी शाखा होने के बाद भी बलिया शाखा को कार्यदायी संस्था बनाया जाना भी सवालों के घेरे में है। अब जिला प्रशासन ने कार्यदायी संस्था के साथ इससे जुड़े सभी विभाग व शाखाओं से परियोजना की रिपोर्ट तलब की है।
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दरअसल, काशी में घाटों की ओर से बढ़ रहे गंगा के दबाव को कम करने के लिए रेती की तरफ 45 मीटर चौड़ी नहर निर्माण की योजना सिंचाई विभाग ने बनाई थी। 11.95 करोड़ रुपये की इस परियोजना की जिम्मेदारी यूपीपीसीएल की बलिया इकाई को दी गई और इसका एमओयू (समझौता पत्र) सिंचाई विभाग की बंधी खंड से किया गया।
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बंधी खंड को इस एमओयू की प्रति तक नहीं दी गई और उसे इस परियोजना में शामिल ही नहीं किया गया।
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मुख्य अभियंता ने एक बार भी निरीक्षण नहीं किया

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गंगा में नहर परियोजना - फोटो : अमर उजाला

अब नहर के गंगा में समा जाने के बाद पूरे मामले की पड़ताल कराई गई तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। इस परियोजना की मॉनिटरिंग और गुणवत्ता जांच की जिम्मेदारी प्रयागराज के मुख्य अभियंता को सौंपी गई थी, मगर वे एक बार भी प्रोजेक्ट का मौके पर निरीक्षण करने नहीं पहुंचे। जांच में पाया गया कि जुलाई महीने में वे सेवानिवृत्त भी हो गए हैं।

यहां बता दें कि गंगा पार रेती की ओर रामनगर से राजघाट के बीच 5.3 किलोमीटर लंबी और 45 मीटर चौड़ी बाईपास नहर बनाई जा रही है। जुलाई महीने में आई बाढ़ में नहर की मिट्टी गंगा में समा कर पूरी परियोजना गंगा की धारा में बह गई।
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जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने कहा कि गंगा में नहर परियोजना के लिए जिम्मेदार सभी विभागों से समन्वय किया गया है। यूपीपीसीएल नहर को रिस्टोर करेगी और इसके बाद ही उसे भुगतान किया जाएगा। जांच में सामने आई गड़बड़ियों की रिपोर्ट शासन को भी भेजी गई है। 

परियोजना हैंडओवर होने के बाद ही होगा भुगतान

नहर के गंगा में समा जाने के बाद मचे बवाल के बाद अब परियोजना की समीक्षा शुरू कराई गई है। इसमें यूपीपीसीएल को परियोजना पूरी करने का आदेश जारी किया गया है। एमओयू के आधार पर ही नहर को मूल स्वरूप देना होगा। उधर, सिंचाई विभाग को वाराणसी के नदी वैज्ञानियों की ओर से उठाए गए सवालों के अध्ययन और समाधान के लिए भी कहा गया है। परियोजना के पूरी होने और हैंडओवर के बाद ही यूपीपीसीएल को बकाया भुगतान किया जाएगा।

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