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रागों-बंदिशों की खुशबू से महक उठा अस्सी घाट, राजन-साजन ने विश्व संगीत यात्रा का किया शुभारंभ
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Sun, 19 Nov 2017 03:35 PM IST
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पद्मभूषण पं. राजन मिश्र- पं. साजन मिश्र
- फोटो : अमर उजाला
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पद्मभूषण पं. राजन मिश्र- पं. साजन मिश्र ने अस्सी घाट से ख्याल गायन की बंदिशों के साथ ‘भैरव से भैरवी तक’ अपनी विश्व संगीत यात्रा का श्रीगणेश किया। देश भर से जुटे संगीत प्रेमियों के बीच उन्होंने दोपहर बाद गाए जाने वाले राग हंस किंकिणी से शुरुआत की।
रागों-बंदिशों की खुशबू से गंगा का तट महक उठा। इस यात्रा के दौरान राग भैरव से लेकर भोर में गाए जाने वाले भैरवी तक के राग अलग-अलग देशों में प्रस्तुत किए जाएंगे। अस्सी घाट पर फूलों से सजे भव्य मंच पर पं. राजन-साजन ने शुरुआत की राग हंस किंकिणी से।
बंदिश के बोल थे-पंद लागौं बिंद, मदन मोहन...। इस बंदिश पर अलापचारी के बाद उन्होंने स्वरों के समन्वय के साथ गमक और मुर्कियों का अनूठा प्रयोग किया। इसके बाद उन्होंने राग मारवा की अवतारणा की। इस राग में तीन ताल में बंदिश पर लोग झूमने लगे।
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इसके बाद जयजयवंती में उन्होंने दूसरी बंदिश पेश की। राग देस में उन्होंने भगवान शिव की स्तुति की तो स्वरों के समन्वय पर संगीत के गुणीजन झूमने लगे। बंदिश के बोल थे-काशी के बसैया...। उन्होंने राग दुर्गा भी गाया और राग दरबारी में भी ख्याल की बंदिश से झुमाया।
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रागों-बंदिशों की खुशबू से गंगा का तट महक उठा। इस यात्रा के दौरान राग भैरव से लेकर भोर में गाए जाने वाले भैरवी तक के राग अलग-अलग देशों में प्रस्तुत किए जाएंगे। अस्सी घाट पर फूलों से सजे भव्य मंच पर पं. राजन-साजन ने शुरुआत की राग हंस किंकिणी से।
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बंदिश के बोल थे-पंद लागौं बिंद, मदन मोहन...। इस बंदिश पर अलापचारी के बाद उन्होंने स्वरों के समन्वय के साथ गमक और मुर्कियों का अनूठा प्रयोग किया। इसके बाद उन्होंने राग मारवा की अवतारणा की। इस राग में तीन ताल में बंदिश पर लोग झूमने लगे।
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इसके बाद जयजयवंती में उन्होंने दूसरी बंदिश पेश की। राग देस में उन्होंने भगवान शिव की स्तुति की तो स्वरों के समन्वय पर संगीत के गुणीजन झूमने लगे। बंदिश के बोल थे-काशी के बसैया...। उन्होंने राग दुर्गा भी गाया और राग दरबारी में भी ख्याल की बंदिश से झुमाया।
संगीत यात्रा दुनिया के लिए सुखद
भैरव से भैरवी तक कार्यक्रम में उमड़ी भीड़
- फोटो : अमर उजाला
अंत में राग भैरवी में बंदिश -चला परदेसिया... की प्रस्तुति कर विराम लिया। तबले पर पं. कुमार बोस, हारमेनियम पर पं. धर्मनाथ मिश्र, तानपूरे पर शिवानी मिश्र और गरुण मिश्र ने संगत की।
आईसीसीआर की जीडी रीमा दास गांगुली, जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र, एसएसपी रामकृष्ण भारद्वाज, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के निदेशक डॉ. विजय शंकर शुक्ल के अलावा कला प्रकाश के अध्यक्ष अशोक कपूर, आईसीसीआर के क्षेत्रीय समन्वयक अनुराग सिंह समेत तमाम लोग उपस्थित थे।
संचालन प्रतिमा सिन्हा ने किया। बनारस घराने के जाने माने ख्याल गायक पं. राजन मिश्र, पं. साजन मिश्र ने अस्सी घाट से शुरू हुई विश्व संगीत यात्रा को दुनिया के लिए सुखद बताया।
उन्होंने कहा कि इस संगीत यात्रा के जरिए वह दक्षिण एशिया से लेकर यूरोप तक के संगीत प्रेमियों को भारतीय शास्त्रीय ख्याल गायन के रागों और बंदिशों से परिचित कराएंगे। इसमें भैरव से भैरवी के बीच के सभी रागों की प्रस्तुतियां की जाएंगी।
आईसीसीआर की जीडी रीमा दास गांगुली, जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र, एसएसपी रामकृष्ण भारद्वाज, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के निदेशक डॉ. विजय शंकर शुक्ल के अलावा कला प्रकाश के अध्यक्ष अशोक कपूर, आईसीसीआर के क्षेत्रीय समन्वयक अनुराग सिंह समेत तमाम लोग उपस्थित थे।
संचालन प्रतिमा सिन्हा ने किया। बनारस घराने के जाने माने ख्याल गायक पं. राजन मिश्र, पं. साजन मिश्र ने अस्सी घाट से शुरू हुई विश्व संगीत यात्रा को दुनिया के लिए सुखद बताया।
उन्होंने कहा कि इस संगीत यात्रा के जरिए वह दक्षिण एशिया से लेकर यूरोप तक के संगीत प्रेमियों को भारतीय शास्त्रीय ख्याल गायन के रागों और बंदिशों से परिचित कराएंगे। इसमें भैरव से भैरवी के बीच के सभी रागों की प्रस्तुतियां की जाएंगी।