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Jabalpur News: प्रथम और सफ़िन जबलपुर की गलियों से पहुंचे एमपीएल के स्टेडियम तक, चुनौतियों से भरा रहा संघर्ष
Tue, 10 Jun 2025 07:30 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Tue, 10 Jun 2025 07:30 PM IST
सार
MPL 2025 का आयोजन 12 जून से 24 जून तक ग्वालियर के श्रीमंत माधवराव सिंधिया क्रिकेट स्टेडियम, शंकरपुर में होने जा रहा है। कुल 28 मुकाबले खेले जाएंगे, जिनमें से 24 पुरुष टीमों और 4 महिला टीमों के बीच होंगे। जबलपुर की टीम में दो ऐसे गेंदबाजों का चयन हुआ है, जो विषम परिस्थिति से उभरकर सामने आए हैं।
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जबलपुर की टीम के लिए खेलेंगे प्रथम और सफिन
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
मध्यप्रदेश के दिल जबलपुर के विपरीत परिस्थितियों के दो युवाओं ने जुनून और मेहनत से अपनी तकदीर लिख दी है। दो तेजतर्रार गेंदबाज़ सफ़िन अली और प्रथम उइके जबलपुर रॉयल लायंस की टैलेंट हंट प्रतियोगिता में जीत हासिल कर टीम का हिस्सा बन गए हैं। अब ये दोनों खिलाड़ी मध्यप्रदेश लीग टी-20 सिंधिया कप 2025 में जलवा बिखेरेंगे, जिसकी शुरुआत 12 जून से हो रही है।
बता दें कि एमपीएल में जबलपुर टीम 13 जून को अपना पहला मैच खेलेगी। छोटा सा गैराज चलाने वाले अश्फाक अली के बेटे सफ़िन का बचपन 12 लोगों के संयुक्त परिवार में बीता। 12वीं के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी, और क्रिकेट ही उनका एकमात्र सहारा बन गया। ना सही जूते थे, ना कोई कोचिंग, फिर भी सफ़िन अली हर दिन तीन किलोमीटर साइकिल चलाकर मैदान पहुंचते, उधार की गेंदों और सिले हुए पुराने जूतों के साथ अभ्यास करते थे। सफ़िन कहते हैं, "इतनी मेहनत के बाद ये बहुत बड़ा पल है कि मैं जबलपुर टीम का हिस्सा बन रहा हूं।" मोहम्मद सिराज की जिद और विराट कोहली की आक्रामकता से प्रेरित होकर उन्होंने अपनी रफ्तार को अपना सबसे बड़ा हथियार बना लिया।
ये भी पढ़ें- एमपीएल का रोमांच 12 जून से, इस बार एंट्री फ्री नहीं, जानें कितने रुपए मिलेगा टिकट?
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जबलपुर के बाहरी इलाके के एक छोटे से गांव शाहपुरा से आने वाले प्रथम के पिता रामगोपाल उइके एक ट्रैक्टर एजेंसी में काम करते हैं। प्रथम का क्रिकेट का सफर टेनिस बॉल क्रिकेट से शुरू हुआ था, लेकिन जल्द ही उनका हुनर जेपी एकेडमी, रानीताल के कोचों की नजर में आ गया, जो उनके गांव से लगभग 30 किलोमीटर दूर था। हर सुबह सूरज निकलने से पहले उठना, घंटों का सफर तय करना और फिर भी नेट्स में पूरी रफ्तार से गेंदबाजी करना उनकी दिनचर्या बन गई थी। प्रथम को डेल स्टेन के तूफानी अंदाज और विराट कोहली की भूख ने प्रेरित किया। जब उनका नाम टीम में घोषित हुआ, तो वो पल उनके पूरे परिवार के लिए सपनों के सच होने जैसा था।
ये भी पढ़ें- माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली मेघा परमार पहुंचीं कोर्ट, एकलपीठ ने सरकार से मांगा जवाब, जानें
जबलपुर रॉयल लायंस के प्रतिनिधि लव मलिक ने कहा कि ये लड़के न किसी बड़ी एकेडमी से आए, न इनके पास कोई टर्फ विकेट्स या ब्रांडेड गियर थे। ये ऐसे घरों से आए हैं, जहां हर रुपया तौलकर खर्च होता है और हर शाम अनिश्चित होती है। फिर भी, इनके पास सिर्फ एक चीज थी -विश्वास। और उसी विश्वास के सहारे इन्होंने दिल से गेंदबाजी की। आज ये लायंस की जर्सी पहनकर हमारे लिए गर्व का कारण बने हैं।
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बता दें कि एमपीएल में जबलपुर टीम 13 जून को अपना पहला मैच खेलेगी। छोटा सा गैराज चलाने वाले अश्फाक अली के बेटे सफ़िन का बचपन 12 लोगों के संयुक्त परिवार में बीता। 12वीं के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी, और क्रिकेट ही उनका एकमात्र सहारा बन गया। ना सही जूते थे, ना कोई कोचिंग, फिर भी सफ़िन अली हर दिन तीन किलोमीटर साइकिल चलाकर मैदान पहुंचते, उधार की गेंदों और सिले हुए पुराने जूतों के साथ अभ्यास करते थे। सफ़िन कहते हैं, "इतनी मेहनत के बाद ये बहुत बड़ा पल है कि मैं जबलपुर टीम का हिस्सा बन रहा हूं।" मोहम्मद सिराज की जिद और विराट कोहली की आक्रामकता से प्रेरित होकर उन्होंने अपनी रफ्तार को अपना सबसे बड़ा हथियार बना लिया।
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जबलपुर के बाहरी इलाके के एक छोटे से गांव शाहपुरा से आने वाले प्रथम के पिता रामगोपाल उइके एक ट्रैक्टर एजेंसी में काम करते हैं। प्रथम का क्रिकेट का सफर टेनिस बॉल क्रिकेट से शुरू हुआ था, लेकिन जल्द ही उनका हुनर जेपी एकेडमी, रानीताल के कोचों की नजर में आ गया, जो उनके गांव से लगभग 30 किलोमीटर दूर था। हर सुबह सूरज निकलने से पहले उठना, घंटों का सफर तय करना और फिर भी नेट्स में पूरी रफ्तार से गेंदबाजी करना उनकी दिनचर्या बन गई थी। प्रथम को डेल स्टेन के तूफानी अंदाज और विराट कोहली की भूख ने प्रेरित किया। जब उनका नाम टीम में घोषित हुआ, तो वो पल उनके पूरे परिवार के लिए सपनों के सच होने जैसा था।
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जबलपुर रॉयल लायंस के प्रतिनिधि लव मलिक ने कहा कि ये लड़के न किसी बड़ी एकेडमी से आए, न इनके पास कोई टर्फ विकेट्स या ब्रांडेड गियर थे। ये ऐसे घरों से आए हैं, जहां हर रुपया तौलकर खर्च होता है और हर शाम अनिश्चित होती है। फिर भी, इनके पास सिर्फ एक चीज थी -विश्वास। और उसी विश्वास के सहारे इन्होंने दिल से गेंदबाजी की। आज ये लायंस की जर्सी पहनकर हमारे लिए गर्व का कारण बने हैं।
