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Jabalpur: पूर्व बिशप पीसी सिंह पर एक और प्रकरण दर्ज, धोखे से शैक्षणिक संस्था की लीज की जमीन खुद के नाम करवाई
Sun, 10 Sep 2023 11:16 AM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Sun, 10 Sep 2023 11:16 AM IST
सार
जबलपुर में एक साल पहले मिशनरी स्कूल की जमीन की धोखाधड़ी करने के मामले में आरोपी पूर्व बिशप पीसी सिंह के खिलाफ भोपाल ईओडब्ल्यू ने एक और प्रकरण दर्ज किया है। शैक्षणिक संस्था के नाम पर मिली लीज की जमीन धोखाधड़ी कर अपने नाम पर दर्ज करवा ली थी।
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पूर्व बिशप पीसी सिंह
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
पूर्व बिशप पीसी सिंह के खिलाफ भोपाल ईओडब्ल्यू ने एक और प्रकरण दर्ज किया है। शैक्षणिक संस्था के नाम पर मिली लीज की जमीन धोखाधड़ी कर अपने नाम पर दर्ज करवा ली थी। जमीन का बाजार मूल्य लगभग 8 करोड रुपये है।
ईओडब्ल्यू सूत्रों के अनुसार जबलपुर के स्वामी दयानंद सरस्वती वार्ड स्थित 6.554 एकड़ भूमि क्रिश्चियन मिशनरी सोयायटी ऑफ ओहियो यूएसए मार्फत सेनरेंड वेन्हन अलेक्जेंडर ऑफ जबलपुर के नाम पर साल 1919-20 को लीज पर दी गई थी। समय-समय पर उक्त जमीन का लीज नवीनीकरण करवाया गया था। लीज का अंतिम नवीनीकरण साल 1999 तक था। इसके बावजूद भी यूनाइटेड चर्च ऑफ नार्दन इंडिया ट्रस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष रहते हुए बिशप पीसी सिंह ने उक्त जमीन से 4000 वर्गफुट जमीन की लीज अपने नाम पर करवा ली। भूमि का पंजीयन प्रेम मसीह मैनेजिंग डायरेक्ट यूनाईटेड चर्च ऑफ नार्दन इंडिया ट्रस्ट एसोसिएशन द्वारा बिशप पीसी सिंह के नाम पर किया गया था।
पंजीयन के समय पेश किए गए दस्तावेज में लीज 2029 तक होने के फर्जी दस्तावेज भी पेश किए गए थे। जमीन का वर्तमान बाजार मूल्य लगभग 8 करोड़ रुपये है। ईओडब्ल्यू भोपाल ने आरोपी पीसी सिंह तथा प्रेम मसीह के खिलाफ धारा 406, 420,467,468,471 तथा 120 बी के तहत मामला दर्ज कर प्रकरण को विवेचना में लिया है।
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गौरतलब है कि पूर्व में ईओडब्ल्यू की टीम ने तत्कालीन बिशप पीसी सिंह के नेपियर टाउन स्थित निवास पर 8 सितंबर 2022 को दबिश दी थी। दबिश के दौरान 12 लाख का सोना, 1 करोड़ 65 लाख रुपए नगद, 48 बैंक खाते, 18352 यूएस डॉलर, 118 पांउड, 9 लग्जरी गाड़ियां, 17 संपत्तियों के दस्तावेज मिले थे। ईओडब्ल्यू ने फर्जी तरीके से संस्था का रिजर्वेशन करवाकर मिशनरी स्कूलों कर कब्जा करने, स्कूल की राशि का दुरुपयोग करने, मिशनरी स्कूल की जमीन अपने ट्रस्ट के नाम पर दर्ज करवाने सहित अन्य मामले में बिशप पीसी सिंह, उनके खास राजदार सुरेश जैकब, बेटा पीयूष तथा बीके सोलंकी के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया था।
इसके अलावा ईडी ने भी पूर्व बिशप पीसी सिंह के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया था। दोनों मामले में न्यायिक अभिरक्षा में रहने के बाद उन्हें जमानत का लाभ मिल गया था। ईडी द्वारा दर्ज प्रकरण में हाल में ही उन्हें जमानत का लाभ मिला है।
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ईओडब्ल्यू सूत्रों के अनुसार जबलपुर के स्वामी दयानंद सरस्वती वार्ड स्थित 6.554 एकड़ भूमि क्रिश्चियन मिशनरी सोयायटी ऑफ ओहियो यूएसए मार्फत सेनरेंड वेन्हन अलेक्जेंडर ऑफ जबलपुर के नाम पर साल 1919-20 को लीज पर दी गई थी। समय-समय पर उक्त जमीन का लीज नवीनीकरण करवाया गया था। लीज का अंतिम नवीनीकरण साल 1999 तक था। इसके बावजूद भी यूनाइटेड चर्च ऑफ नार्दन इंडिया ट्रस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष रहते हुए बिशप पीसी सिंह ने उक्त जमीन से 4000 वर्गफुट जमीन की लीज अपने नाम पर करवा ली। भूमि का पंजीयन प्रेम मसीह मैनेजिंग डायरेक्ट यूनाईटेड चर्च ऑफ नार्दन इंडिया ट्रस्ट एसोसिएशन द्वारा बिशप पीसी सिंह के नाम पर किया गया था।
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पंजीयन के समय पेश किए गए दस्तावेज में लीज 2029 तक होने के फर्जी दस्तावेज भी पेश किए गए थे। जमीन का वर्तमान बाजार मूल्य लगभग 8 करोड़ रुपये है। ईओडब्ल्यू भोपाल ने आरोपी पीसी सिंह तथा प्रेम मसीह के खिलाफ धारा 406, 420,467,468,471 तथा 120 बी के तहत मामला दर्ज कर प्रकरण को विवेचना में लिया है।
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गौरतलब है कि पूर्व में ईओडब्ल्यू की टीम ने तत्कालीन बिशप पीसी सिंह के नेपियर टाउन स्थित निवास पर 8 सितंबर 2022 को दबिश दी थी। दबिश के दौरान 12 लाख का सोना, 1 करोड़ 65 लाख रुपए नगद, 48 बैंक खाते, 18352 यूएस डॉलर, 118 पांउड, 9 लग्जरी गाड़ियां, 17 संपत्तियों के दस्तावेज मिले थे। ईओडब्ल्यू ने फर्जी तरीके से संस्था का रिजर्वेशन करवाकर मिशनरी स्कूलों कर कब्जा करने, स्कूल की राशि का दुरुपयोग करने, मिशनरी स्कूल की जमीन अपने ट्रस्ट के नाम पर दर्ज करवाने सहित अन्य मामले में बिशप पीसी सिंह, उनके खास राजदार सुरेश जैकब, बेटा पीयूष तथा बीके सोलंकी के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया था।
इसके अलावा ईडी ने भी पूर्व बिशप पीसी सिंह के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया था। दोनों मामले में न्यायिक अभिरक्षा में रहने के बाद उन्हें जमानत का लाभ मिल गया था। ईडी द्वारा दर्ज प्रकरण में हाल में ही उन्हें जमानत का लाभ मिला है।
