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मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता विधेयक को राज्यपाल की मिली मंजूरी, हलाला और बहु-विवाह पर रोक

Wed, 26 Aug 2026 07:54 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Wed, 26 Aug 2026 07:54 PM IST
सार

मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने विधानसभा से पारित यूसीसी विधेयक को मंजूरी दे दी है, अब इसे राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए केंद्र सरकार भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद ही प्रदेश में यूसीसी के प्रावधान प्रभावी होंगे। इसमें विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों के लिए समान कानूनी व्यवस्था का प्रावधान है।

 

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Uniform Civil Code Bill in Madhya Pradesh receives Governor's assent; ban on *Halala* and polygamy.
यूसीसी - फोटो : एआई

विस्तार

मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम बढ़ाया है। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने विधानसभा से पारित समान नागरिक संहिता विधेयक को अपनी मंजूरी दे दी । इसके साथ ही, प्रदेश में बहुविवाह और निकाह हलाला जैसी प्रथाओं पर प्रभावी रोक लगाने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। अब राज्य का विधि एवं विधायी विभाग विधेयक को मुख्य सचिव के माध्यम से राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए केंद्र सरकार को भेजेगा।
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राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद होगा लागू
मध्य प्रदेश विधानसभा ने 21 जुलाई को समान नागरिक संहिता विधेयक पारित किया था। विधेयक को मंजूरी के लिए राजभवन भेजा गया था। राज्यपाल ने इस पर लोकभवन की विधि और विधायी शाखा से विधिक अभिमत मांगा था। कानूनी राय मिलने तथा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की राज्यपाल से मुलाकात के बाद विधेयक को राज्य सरकार को वापस भेजा गया। चूंकि यूसीसी विधेयक में कई प्रावधानों का सीधा संबंध केंद्रीय कानूनों से है, इसलिए इसे राष्ट्रपति की स्वीकृति अनिवार्य है। केंद्रीय गृह विभाग भी इसके सांविधानिक और विधिक पहलुओं की समीक्षा करेगा। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही विधि एवं विधायी विभाग इसे राजपत्र में अधिसूचित करेगा और इसके प्रावधान प्रदेश में प्रभावी हो जाएंगे। 
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कुप्रथाओं पर रोक और लिव-इन का नियमन
प्रस्तावित समान नागरिक संहिता के अंतर्गत राज्य में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों को लेकर एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करने का प्रावधान है। विधेयक प्रभावी होते ही बहुविवाह और निकाह हलाला पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी। साथ ही, तलाक के मामलों में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन अनिवार्य होगा। विधेयक में लिव-इन संबंधों को भी नियमों के दायरे में लाया गया है, जिसके तहत ऐसे संबंधों का पंजीयन कराना आवश्यक होगा। लिव-इन संबंधों से जन्म लेने वाली संतान को कानूनी अधिकार देने के साथ-साथ संपत्ति से जुड़े अधिकार भी प्रदान किए गए हैं। 

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उत्तराखंड देश का पहला राज्य
उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जहां समान नागरिक संहिता लागू हो चुकी है। गुजरात विधानसभा भी अपना यूसीसी विधेयक पारित करके केंद्र की अनुमति के लिए भेज चुकी है और असम सहित कई अन्य राज्य भी इस दिशा में निरंतर कदम बढ़ा रहे हैं। मध्य प्रदेश के सामान्य प्रशासन विभाग ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से इस विधेयक को लेकर सुझाव देने वाले करीब 9.5 लाख लोगों के रिकॉर्ड को पूरी तरह सुरक्षित रखवा दिया है।
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