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ओंकारेश्वर में बनेगा अनूठा पञ्चायतन मंदिर: 121 कलश और 100 नक्काशीदार स्तंभ होंगे आकर्षण का केंद्र, जानें सबकुछ
Wed, 26 Aug 2026 04:29 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Wed, 26 Aug 2026 04:29 PM IST
सार
मुख्यमंत्री मोहन यादव गुरुवार को ओंकारेश्वर के अनूठे पञ्चायतन मंदिर का शिलान्यास करेंगे। मंदिर के 121 कलश और 100 नक्काशीदार स्तंभ खास होंगे। यहां मंदिर के बीच में भगवान शिव का मंदिर और उसके चारों कोनों में भगवान विष्णु, सूर्य, गणेश और भगवती शक्ति के मंदिर बनाए जाएंगे।
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पञ्चायतन मंदिर की प्रतिकृति
- फोटो : अमर उजाला
ओंकारेश्वर के मान्धाता पर्वत पर विकसित हो रहे एकात्म धाम में गुरुवार को भव्य पञ्चायतन मंदिर के निर्माण की शुरुआत होगी। मुख्यमंत्री मोहन यादव और संतों की मौजूदगी में सुबह 6 बजे वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मंदिर का शिलान्यास किया जाएगा। इस मौके पर 45 पवित्र शिलाओं का पूजन होगा। यह मंदिर इसलिए खास है, क्योंकि यहां एक ही परिसर में पांच प्रमुख देव परंपराओं का समन्वय देखने को मिलेगा। मंदिर के बीच में भगवान शिव का मुख्य मंदिर होगा, जबकि चारों कोनों में भगवान विष्णु, सूर्य, गणेश और भगवती शक्ति के मंदिर बनाए जाएंगे। पञ्चायतन पूजा का यही मूल विचार है कि अलग-अलग रूपों में पूजे जाने वाले देव एक ही परम सत्ता के स्वरूप हैं।
पञ्चायतन मंदिर की प्रतिकृति
- फोटो : अमर उजाला
16 फीट ऊंचे आधार पर बनेगा मंदिर
पञ्चायतन मंदिर को पारंपरिक नागर शैली में तैयार किया जा रहा है। पूरा मंदिर 16 फीट ऊंचे आधार यानी ‘जगति’ पर खड़ा होगा। मुख्य मंदिर का गर्भगृह चारों दिशाओं से खुला होगा, जिससे श्रद्धालु चारों दिशाओं से प्रवेश कर सकेंगे। मंदिर का मुख्य शिखर ‘सोमतिलक’ शैली में बनाया जाएगा। मुख्य मंडप में 26 फीट व्यास का विशाल कलात्मक गुंबद होगा। मंदिर वर्ष 2028 तक बनकर तैयार होगा। इसकी लागत अदैत्य लोक के लिए स्वीकृत राशि में ही शामिल हैं।
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पञ्चायतन मंदिर को पारंपरिक नागर शैली में तैयार किया जा रहा है। पूरा मंदिर 16 फीट ऊंचे आधार यानी ‘जगति’ पर खड़ा होगा। मुख्य मंदिर का गर्भगृह चारों दिशाओं से खुला होगा, जिससे श्रद्धालु चारों दिशाओं से प्रवेश कर सकेंगे। मंदिर का मुख्य शिखर ‘सोमतिलक’ शैली में बनाया जाएगा। मुख्य मंडप में 26 फीट व्यास का विशाल कलात्मक गुंबद होगा। मंदिर वर्ष 2028 तक बनकर तैयार होगा। इसकी लागत अदैत्य लोक के लिए स्वीकृत राशि में ही शामिल हैं।
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पञ्चायतन मंदिर की प्रतिकृति
- फोटो : अमर उजाला
100 नक्काशीदार स्तंभ और 121 कलश
मंदिर की सबसे आकर्षक विशेषताओं में इसकी शिल्पकला होगी। परिसर में 100 नक्काशीदार स्तंभ लगाए जाएंगे। इसके अलावा मंदिर 121 कलशों से सुशोभित होगा। निर्माण में करीब 80 हजार घन फीट नक्काशीदार गुलाबी बलुआ पत्थर इस्तेमाल किया जा रहा है। मंदिर में आठ लघु संवर्णा और भव्य तोरण द्वार भी बनाए जाएंगे। बाहरी दीवारों पर भारतीय मंदिर स्थापत्य के पारंपरिक तत्वों की नक्काशी होगी।
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क्यों खास है पंचायतन मंदिर?
पंचायतन परंपरा को आदि शंकराचार्य से जोड़ा जाता है। इसका उद्देश्य अलग-अलग उपासना परंपराओं के बीच समन्वय स्थापित करना था। इसमें भगवान शिव, विष्णु, सूर्य, गणेश और शक्ति की उपासना एक साथ की जाती है। यानी शैव, वैष्णव, शाक्त, सौर और गाणपत्य परंपराओं का एक ही स्थान पर संगम होगा। मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि भारतीय दर्शन और प्राचीन मंदिर स्थापत्य को समझने का भी केंद्र बनेगा।
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एकात्म धाम में पहले से स्थापित है 108 फीट की प्रतिमा
एकात्म धाम परियोजना के पहले चरण में आदि शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची ‘एकात्मता की मूर्ति’ स्थापित की जा चुकी है। दूसरे चरण में करीब 2195 करोड़ रुपये की लागत से ‘अद्वैत लोक’ संग्रहालय विकसित किया जा रहा है। यहां आचार्य शंकर के जीवन, दर्शन और भारतीय ज्ञान परंपरा को प्रदर्शित किया जाएगा। ऐसे में पंचायतन मंदिर एकात्म धाम की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को और विस्तार देगा। ओंकारेश्वर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आने वाले समय में यह परिसर आस्था के साथ भारतीय स्थापत्य और दर्शन को समझने का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
मंदिर की सबसे आकर्षक विशेषताओं में इसकी शिल्पकला होगी। परिसर में 100 नक्काशीदार स्तंभ लगाए जाएंगे। इसके अलावा मंदिर 121 कलशों से सुशोभित होगा। निर्माण में करीब 80 हजार घन फीट नक्काशीदार गुलाबी बलुआ पत्थर इस्तेमाल किया जा रहा है। मंदिर में आठ लघु संवर्णा और भव्य तोरण द्वार भी बनाए जाएंगे। बाहरी दीवारों पर भारतीय मंदिर स्थापत्य के पारंपरिक तत्वों की नक्काशी होगी।
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क्यों खास है पंचायतन मंदिर?
पंचायतन परंपरा को आदि शंकराचार्य से जोड़ा जाता है। इसका उद्देश्य अलग-अलग उपासना परंपराओं के बीच समन्वय स्थापित करना था। इसमें भगवान शिव, विष्णु, सूर्य, गणेश और शक्ति की उपासना एक साथ की जाती है। यानी शैव, वैष्णव, शाक्त, सौर और गाणपत्य परंपराओं का एक ही स्थान पर संगम होगा। मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि भारतीय दर्शन और प्राचीन मंदिर स्थापत्य को समझने का भी केंद्र बनेगा।
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एकात्म धाम में पहले से स्थापित है 108 फीट की प्रतिमा
एकात्म धाम परियोजना के पहले चरण में आदि शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची ‘एकात्मता की मूर्ति’ स्थापित की जा चुकी है। दूसरे चरण में करीब 2195 करोड़ रुपये की लागत से ‘अद्वैत लोक’ संग्रहालय विकसित किया जा रहा है। यहां आचार्य शंकर के जीवन, दर्शन और भारतीय ज्ञान परंपरा को प्रदर्शित किया जाएगा। ऐसे में पंचायतन मंदिर एकात्म धाम की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को और विस्तार देगा। ओंकारेश्वर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आने वाले समय में यह परिसर आस्था के साथ भारतीय स्थापत्य और दर्शन को समझने का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
