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एमपी: माई के लाल हो तो काजी कैंप आकर मिसाइल लॉन्च करो, सिर नहीं झुकाऊंगा, रामेश्वर शर्मा पर ओवैसी का पलटवार

Tue, 15 Sep 2026 07:28 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Tue, 15 Sep 2026 07:28 PM IST
सार

मध्य प्रदेश के यूसीसी कानून को लेकर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भोपाल में मुस्लिम समाज के साथ चर्चा की। इस दौरान उन्होंने भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा के काजी कैंप वाले बयान पर पलटवार करते हुए यूसीसी और भाजपा पर भी निशाना साधा।

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MP: Owaisi says imposing the laws of one religion on another under the UCC is wrong; calls upon BJP allies to
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी - फोटो : ANI
मध्य प्रदेश के यूसीसी कानून को मुस्लिमों के साथ मंथन करने भोपाल आए एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी जमकर गरजे। उन्होंने भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा के काजी कैंप को लेकर दिए मिसाइल वाले बयान पर भी पलटवार किया। ओवैसी ने चुनौती देते हुए कहा कि अगर हिम्मत है तो काजी कैंप आकर मिसाइल लॉन्च करके दिखाओ। उन्होंने कहा कि वह अकेले काजी कैंप में खड़े होने और शहीद होने के लिए तैयार हैं, लेकिन रामेश्वर शर्मा जैसे लोगों के सामने सिर नहीं झुकाएंगे। सेंट्रल लाइब्रेरी के ग्राउंड में आयोजित सभा में ओवैसी ने कहा कि यहां बड़ी संख्या में लोगों का एकत्र होना यह संदेश है कि वे यूसीसी के कानून को मुसलमानों और बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के संविधान के खिलाफ मानते हैं। संपत्ति के अधिकारों का जिक्र करते हुए ओवैसी ने कहा कि इस्लाम में बेटे और बेटियों दोनों को विरासत में हिस्सा मिलता है। उन्होंने कहा कि बेटे का हिस्सा अधिक होने के पीछे उसकी पारिवारिक जिम्मेदारियां बताई गई हैं। उनके मुताबिक मुस्लिम महिला को भी परिवार के अलग-अलग रिश्तों के जरिए संपत्ति में अधिकार मिल सकता है।


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काजी कैंप का इतिहास बताया
ओवैसी ने भोपाल के काजी कैंप के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि यहां आजादी की लड़ाई में योगदान देने वाले लोग रहे हैं। उन्होंने काजी सैयद आबेद अली, वाजिद अली हुसैनी, खान शाहिद अली खान, वाजिल मोहम्मद खान, अब्दुल खान, शेख रमजान, सादाद खान और रिसालदार वली शाह समेत कई नाम गिनाए। ओवैसी ने आरोप लगाया कि यूसीसी के जरिए आरएसएस का एजेंडा आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे संविधान के अनुच्छेद 26 और 29 प्रभावित होते हैं। ओवैसी ने कहा कि अगर हिंदुओं को उनके धार्मिक रीति-रिवाज और परंपराओं की छूट मिलती है तो मुसलमानों को भी यह अधिकार मिलना चाहिए।
 
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MP: Owaisi says imposing the laws of one religion on another under the UCC is wrong; calls upon BJP allies to
सेंट्रल लाइब्रेरी ग्राउंड में ओवैसी की सभा में पहुंचे लोग - फोटो : अमर उजाला
आरएसएस पर भी निशाना साधा
ओवैसी ने इस दौरान आरएसएस पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सोवियत यूनियन ने मदरसों को बंद किया था, लेकिन इसके बावजूद मुसलमानों ने अपने घरों में बच्चों को पढ़ाया। उनका कहना था कि जब सोवियत यूनियन इस्लाम को खत्म नहीं कर पाया तो आरएसएस क्या है।

ट्रंप के फोन का भी किया जिक्र
पाकिस्तान के साथ युद्ध के दौरान अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फोन का जिक्र करते हुए ओवैसी ने कहा कि फोन आया और सब रुक गया। ब्रह्मोस मिसाइल के संदर्भ में उन्होंने रामेश्वर शर्मा पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि एक मिसाइल लॉन्च कर सकते हो, लेकिन दूसरी लॉन्च करने की क्षमता नहीं है।

हम जिएंगे तो मुसलमान बनकर 
ओवैसी ने मदरसों को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की कोशिश मदरसों को खत्म करने की है। उन्होंने कहा कि हम जिएंगे तो भारत में मुसलमान बनकर जिएंगे। भाजपा कोशिश कर रही है कि हमें खत्म कर दिया जाए। 

भाजपा के सहयोगी दल यूसीसी का विरोध करें
सेंट्रल लाइब्रेरी परिसर में आयोजित सभा से पहले ओवैसी ने मीडिया से बातचीत की। उन्होंने भाजपा के सहयोगी दलों से भी कहा कि यदि उनके भाजपा से वैचारिक मतभेद हैं तो उन्हें यूसीसी का विरोध करना चाहिए। ओवैसी ने कहा कि यदि टीडीएफ, जेडी(यू), कुमारस्वामी, चिराग पासवान और जयंत चौधरी पूरी तरह भाजपा की विचारधारा के साथ खड़े हैं, तो यह अलग बात है, लेकिन अगर इन दलों के भाजपा से अभी भी कुछ मतभेद हैं, तो उन्हें समान नागरिक संहिता का विरोध करना चाहिए। 

मप्र के कानून को राष्ट्रपति की मंजूरी बाकी
बता दें, मध्य प्रदेश विधानसभा से 21 जुलाई को पारित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक को राज्यपाल की मंजूरी मिल चुकी है। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद ही इसके प्रावधान प्रदेश में प्रभावी हो सकेंगे। यूसीसी में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों के लिए समान कानूनी व्यवस्था का प्रावधान है। इसमें एक से अधिक विवाह पर रोक, विवाह का अनिवार्य पंजीयन और लिव-इन संबंधों के पंजीयन की व्यवस्था की गई है। महिला और पुरुष को उत्तराधिकार में समान अधिकार देने का भी प्रावधान है। हालांकि, अनुसूचित जनजातियों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है।
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