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MP News: MPWLC का फर्जीवाड़ा, करोड़ों का टेंडर चहेते को देने बदल दिए नियम, जानें अधिकारी कैसे कर रहे घपला
Sat, 20 Sep 2025 12:49 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Sat, 20 Sep 2025 12:49 PM IST
सार
मध्य प्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक कॉर्पोरेशन (MPWLC) में सड़क, साइनज के टेंडर को लेकर गंभीर गड़बड़ियों के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखकर अपने चहेती फर्मों को फायदा पहुंचाने के लिए पात्रता की मूल शर्तें पूरी न करने के बावजूद क्वालिफाई कर दिया। शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होने से टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
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फोटो में ऊपर- MPWCL के चीफ इंजीनियर जीपी मेहरा और नीचे एमडी अनुराग वर्मा
- फोटो : अमर उजाला
मध्य प्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक कॉर्पोरेशन के जिम्मेदारों ने अपने चेहते को काम देने के लिए टेंडर के अपने अलग ही नियम गढ़ लिए। हद तो यह है कि इसकी शिकायत कर्ताधर्ताओं को करने के बावजूद कुछ नहीं हुआ। ऐसे में साफ है कि करीब 10 करोड़ रुपये के काम के टेंडर में सब कुछ मिलीभगत से किया गया।
MPWCL के 23 जुलाई को निकाले टेंडर में स्पष्ट लिखा है कि PWD रजिस्ट्रर ठेकेदार ही पात्र
- फोटो : अमर उजाला
इन नियमों का भी खुला उल्लंघन
यही नहीं इन फर्मों के पास ओईएम (Original Equipment Manufacturer) का इनकॉरपोरेशन सर्टिफिकेट भी नहीं था। बावजूद इसके इन्हें प्रजेंटेशन के लिए बुलाया गया और बाद में उनसे दस्तावेज लेकर खानापूर्ति कर दी गई। वहीं, एक क्वालिफाई निविदाकार अबुल फैज ने टेंडर जारी होने के तारीख के बाद पीडब्ल्यूडी में रजिस्ट्रेशन के लिए अप्लाई किया, जो कि निविदा में शामिल होने के लिए हिस्टोरिकल डॉक्यूमेंट माना जाता है। पीडब्ल्यूडी के नियमों के अनुसार भी यह टेंडर जारी होने के पहले का जरूरी हैं।
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थ्री एम इंडिया के वेंडरों को बाहर करने पर सवाल
एक हालिया टेंडर में छह वेंडरों ने भाग लिया, जिनमें तीन वेंडर थ्री एम इंडिया के और तीन वेंडर ओराफिल के थे। कॉरपोरेशन के अधिकारियों ने एक पेपर के आधार पर थ्री एम इंडिया के सभी वेंडरों को टेंडर से बाहर कर दिया, जबकि उनके पास PWD का रजिस्ट्रेशन और अन्य सभी आवश्यक शर्तें पूरी थीं। जानकारों का कहना है कि सरकार का पैसा बचाने और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए कभी-कभी हिस्टोरिकल डॉक्यूमेंट मांगे जा सकते हैं। इससे कई फर्में भाग लेती हैं और प्रतिस्पर्धा बढ़ती है। वहीं, अब सवाल उठ रहे हैं कि यह निविदा सामान्य परिस्थितियों में 20 से 25 प्रतिशत कम दरों पर मंजूर की जानी चाहिए थी, लेकिन कथित सांठगांठ के चलते इसे केवल ढाई प्रतिशत कम दर पर जल्दबाजी में खोल भी दिया गया है और आगे अनुबंध की प्रक्रिया जारी है।
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इसलिए भी उठ रहे सवाल
टेंडर में फर्मों की टेक्निकल बिड खोली गई और मात्र एक घंटे के अंतराल के बाद फाइनेंशियल बिड भी खोल दी गई। जबकि नियम के अनुसार इसमें 24 घंटे का समय दिया जाना चाहिए, ताकि किसी भी वेंडर को आपत्ति दर्ज कराने का अवसर मिल सके। जानकारों का कहना है कि इस मामले में शिकायत भी दर्ज की गई थी, लेकिन अब तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इससे पारदर्शिता और नियमों के पालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
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अधीक्षण यंत्री से बात कर लीजिए : चीफ इंजीनियर
वहीं, इस मामले में मध्य प्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक कॉर्पोरेशन के चीफ इंजीनियर जीपी मेहरा ने कहा कि हमने पीडब्ल्यूडी के एनआईटी के अनुसार फर्मों को क्वालिफाई किया है। आप ज्यादा जानकारी के लिए अधीक्षण यंत्री से बात कर लीजिए।
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तय मानकों के अनुसार कार्रवाई : अधीक्षण यंत्री
वहीं, मध्य प्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक कॉर्पोरेशन के अधीक्षण यंत्री एसके जैन ने कहा कि हमने पीडब्ल्यूडी के स्टैंडर्ड मानकों के अनुसार कार्रवाई की है। जिसके अनुसार यदि कोई फर्म ने रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया है तो उसको भी पात्र माना जाता है। वहीं, जिन फर्मों को अपात्र किया है उसका कारण बताने और सूचना देने का कोई प्रावधान नहीं है। इस मामले में हमको शिकायत मिली थी, उसे आगे वरिष्ठ अधिकारियों को भेजा गया है।
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जानकारी नहीं, पता करती हूं : एसीएस
वहीं, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की एसीएस रश्मि अरुण शमी ने कहा कि उनको जानकारी नहीं है। मामले का पता करती हूं। वहीं, इस मामले में कॉरपोरेशन के एमडी अनुराग वर्मा से भी पक्ष जानने संपर्क किया, लेकिन उनकी तरफ से मैसेज और फोन पर कोई जवाब नहीं दिया गया।
यही नहीं इन फर्मों के पास ओईएम (Original Equipment Manufacturer) का इनकॉरपोरेशन सर्टिफिकेट भी नहीं था। बावजूद इसके इन्हें प्रजेंटेशन के लिए बुलाया गया और बाद में उनसे दस्तावेज लेकर खानापूर्ति कर दी गई। वहीं, एक क्वालिफाई निविदाकार अबुल फैज ने टेंडर जारी होने के तारीख के बाद पीडब्ल्यूडी में रजिस्ट्रेशन के लिए अप्लाई किया, जो कि निविदा में शामिल होने के लिए हिस्टोरिकल डॉक्यूमेंट माना जाता है। पीडब्ल्यूडी के नियमों के अनुसार भी यह टेंडर जारी होने के पहले का जरूरी हैं।
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थ्री एम इंडिया के वेंडरों को बाहर करने पर सवाल
एक हालिया टेंडर में छह वेंडरों ने भाग लिया, जिनमें तीन वेंडर थ्री एम इंडिया के और तीन वेंडर ओराफिल के थे। कॉरपोरेशन के अधिकारियों ने एक पेपर के आधार पर थ्री एम इंडिया के सभी वेंडरों को टेंडर से बाहर कर दिया, जबकि उनके पास PWD का रजिस्ट्रेशन और अन्य सभी आवश्यक शर्तें पूरी थीं। जानकारों का कहना है कि सरकार का पैसा बचाने और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए कभी-कभी हिस्टोरिकल डॉक्यूमेंट मांगे जा सकते हैं। इससे कई फर्में भाग लेती हैं और प्रतिस्पर्धा बढ़ती है। वहीं, अब सवाल उठ रहे हैं कि यह निविदा सामान्य परिस्थितियों में 20 से 25 प्रतिशत कम दरों पर मंजूर की जानी चाहिए थी, लेकिन कथित सांठगांठ के चलते इसे केवल ढाई प्रतिशत कम दर पर जल्दबाजी में खोल भी दिया गया है और आगे अनुबंध की प्रक्रिया जारी है।
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इसलिए भी उठ रहे सवाल
टेंडर में फर्मों की टेक्निकल बिड खोली गई और मात्र एक घंटे के अंतराल के बाद फाइनेंशियल बिड भी खोल दी गई। जबकि नियम के अनुसार इसमें 24 घंटे का समय दिया जाना चाहिए, ताकि किसी भी वेंडर को आपत्ति दर्ज कराने का अवसर मिल सके। जानकारों का कहना है कि इस मामले में शिकायत भी दर्ज की गई थी, लेकिन अब तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इससे पारदर्शिता और नियमों के पालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
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अधीक्षण यंत्री से बात कर लीजिए : चीफ इंजीनियर
वहीं, इस मामले में मध्य प्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक कॉर्पोरेशन के चीफ इंजीनियर जीपी मेहरा ने कहा कि हमने पीडब्ल्यूडी के एनआईटी के अनुसार फर्मों को क्वालिफाई किया है। आप ज्यादा जानकारी के लिए अधीक्षण यंत्री से बात कर लीजिए।
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तय मानकों के अनुसार कार्रवाई : अधीक्षण यंत्री
वहीं, मध्य प्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक कॉर्पोरेशन के अधीक्षण यंत्री एसके जैन ने कहा कि हमने पीडब्ल्यूडी के स्टैंडर्ड मानकों के अनुसार कार्रवाई की है। जिसके अनुसार यदि कोई फर्म ने रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया है तो उसको भी पात्र माना जाता है। वहीं, जिन फर्मों को अपात्र किया है उसका कारण बताने और सूचना देने का कोई प्रावधान नहीं है। इस मामले में हमको शिकायत मिली थी, उसे आगे वरिष्ठ अधिकारियों को भेजा गया है।
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जानकारी नहीं, पता करती हूं : एसीएस
वहीं, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की एसीएस रश्मि अरुण शमी ने कहा कि उनको जानकारी नहीं है। मामले का पता करती हूं। वहीं, इस मामले में कॉरपोरेशन के एमडी अनुराग वर्मा से भी पक्ष जानने संपर्क किया, लेकिन उनकी तरफ से मैसेज और फोन पर कोई जवाब नहीं दिया गया।
