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MP: छात्रवृत्ति घोटाले में खुद को बचाने में जुटे अधिकारी, भोपाल से शुरू होकर अन्य जिलों तक फैले होने की आशंका

Fri, 04 Jul 2025 05:55 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आनंद पवार Updated Fri, 04 Jul 2025 05:55 PM IST
सार

मध्यप्रदेश के पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में छात्रवृत्ति घोटाले ने शासन-प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया है। केंद्र सरकार की सतर्कता से उजागर हुए इस मामले में विभागीय अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगे हैं कि वे खुद को बचाने के लिए घोटाले को 'जालसाजी' बताकर क्राइम ब्रांच में मामला दर्ज करा रहे हैं। भोपाल में सामने आए इस घोटाले की परतें खुलते ही यह आशंका गहराने लगी है कि राज्य के अन्य जिलों में भी ऐसे ही फर्जीवाड़े हो सकते हैं

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MP: Officials busy saving themselves in scholarship scam, suspected to have started from Bhopal and spread to
घोटाला। सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

मध्यप्रदेश के पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में सामने आया छात्रवृत्ति घोटाला अब गंभीर सवालों के घेरे में है। यह घोटाला केंद्र सरकार की ओर से उजागर हुआ है, जिसने विभाग को मामले की जांच कर कार्रवाई करने को कहा था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि विभागीय अधिकारियों ने इस पूरे घोटाले को जालसाजी का मामला बताकर भोपाल क्राइम ब्रांच में FIR दर्ज कराई है, जिससे संदेह गहराता जा रहा है कि कहीं यह कदम खुद को बचाने की कोशिश तो नहीं? केंद्र सरकार ने 11वीं और 12वीं के छात्रों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति योजना में अनियमितता पाई थी। रिपोर्ट के मुताबिक कई ऐसे मदरसों और स्कूलों को छात्रवृत्ति दी गई, जिनकी मान्यता केवल 10वीं कक्षा तक थी। बावजूद इसके इन संस्थानों में 11वीं और 12वीं के नाम पर 1100 से ज्यादा छात्रों को छात्रवृत्ति जारी की गई। कुल राशि करीब 57 लाख 78 हजार रुपये है।
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भोपाल में ही उजागर हुए इतने गड़बड़ी, बाकी जिलों पर भी संदेह
भोपाल जिले में ही केंद्र सरकार ने 1000 से ज्यादा अपात्र छात्रों की सूची जारी की है, जबकि विभाग ने क्राइम ब्रांच को 972 छात्रों की जानकारी दी। इसी तरह, केंद्र की रिपोर्ट में 83 संस्थान, जबकि विभाग की सूची में केवल 44 संस्थानों को संदिग्ध बताया गया। इससे यह आशंका और गहराती है कि विभागीय अधिकारी कुछ संस्थानों और कर्मचारियों को बचा रहे हैं।
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जांच में संदेह के घेरे में विभागीय अधिकारी
क्राइम ब्रांच की शुरुआती जांच में कुछ विभागीय अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। जानकारों का मानना है कि यह केवल जालसाजी नहीं, बल्कि सरकारी राशि का दुरुपयोग है, यानी यह स्पष्ट रूप से घोटाला है। सामान्यत: इस तरह के आर्थिक अपराधों की जांच ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो) से कराई जाती है, लेकिन विभाग ने मामला पुलिस को सौंप दिया। यह कदम भी संदेह को बढ़ाता है।
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इन शिक्षण संस्थानों की भूमिका संदिग्ध
इस मामले में जिन मदरसों और निजी स्कूलों की भूमिका पर संदेह जताया गया है, उनमें शामिल हैं: एमएस आसिफ सईद उर्दू, हनीफ सर मैथ्यू अर्नाल्ड (करोंद), न्यू म.ज. कन्वेंट स्कूल (बैरसिया), सेंट देसूजा कॉन्वेंट (कमला पार्क), सिटी मोंटेसरी स्कूल (जहांगीराबाद), न्यू एससीबी कॉन्वेंट (अशोका गार्डन), एम. अरबिया अमीरुल इस्लाम, एम. दीनियत अयशुल उलुम, मदरसा अहद तालीमुल कुरान (बाग दिलकुशा), मदरसा ऐमन दीनी (भोईपुरा), मदरसा बुशरा दीनी (ईटखेड़ी) और अन्य।


क्या है योजना का स्वरूप?
भारत सरकार की छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत 11वीं और 12वीं कक्षा के छात्रों को सालाना 5700 की राशि दी जाती है। यह योजना पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के तहत आती है। इस योजना के तहत छात्रों की पात्रता और संस्थानों की मान्यता को लेकर अनदेखी कर अपात्र छात्रों को लाभ दिया गया। 
 
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