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चौथे स्टेज के स्तन कैंसर में भी इलाज संभव: बीमारी की पहचान से तय होगा इलाज, एम्स में नई दवाओं से बढ़ी उम्मीद
Sun, 06 Sep 2026 01:53 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Sun, 06 Sep 2026 01:53 PM IST
सार
हेर-टू पॉजिटिव स्तन कैंसर के शरीर में फैल जाने यानी चौथी स्टेज में पहुंचने पर भी अब इलाज के विकल्प पहले से कहीं ज्यादा हैं। ट्रास्टुजुमैब डेरक्सटेकैन, पर्टुजुमैब और टुकाटिनिब जैसी लक्षित दवाओं से बीमारी को नियंत्रित करने की संभावनाएं बढ़ी हैं। एम्स भोपाल में ट्रास्टुजुमैब आधारित लक्षित उपचार आयुष्मान भारत योजना के तहत निःशुल्क उपलब्ध है।
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एम्स भोपाल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
स्तन कैंसर की चौथी स्टेज सुनते ही मरीज और परिवार अक्सर उम्मीद छोड़ने लगते हैं, लेकिन हेर-टू पॉजिटिव स्तन कैंसर के मामले में इलाज की तस्वीर अब बदल रही है। आधुनिक लक्षित दवाओं ने उन मरीजों के लिए भी उपचार के नए रास्ते खोले हैं, जिनका कैंसर शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैल चुका है। एम्स भोपाल की चिकित्सा कैंसर विज्ञान एवं रक्त रोग विभाग की संकाय सदस्य डॉ. आकांक्षा चौधरी ने भोपाल ऑन्कोलॉजी अपडेट्स 2026 में हेर-टू पॉजिटिव मेटास्टेटिक स्तन कैंसर के एक मामले पर विशेषज्ञ चर्चा में हिस्सा लिया। उन्होंने नई लक्षित दवाओं और मरीज की बीमारी के अनुसार उपचार चुनने की आधुनिक पद्धति की जानकारी साझा की।
बीमारी की पहचान से तय होगा इलाज
डॉ. चौधरी के अनुसार अब कैंसर का उपचार केवल यह देखकर तय नहीं किया जाता कि बीमारी किस अंग में है या किस चरण में पहुंची है। कैंसर कोशिकाओं की विशेषताओं की जांच कर यह पता लगाया जाता है कि मरीज के लिए कौन-सा उपचार अधिक प्रभावी हो सकता है। हेर-टू एक प्रोटीन है, जो कुछ स्तन कैंसर कोशिकाओं की सतह पर सामान्य से अधिक मात्रा में पाया जाता है। ऐसे कैंसर को हेर-टू पॉजिटिव स्तन कैंसर कहा जाता है। जब यह स्तन से निकलकर शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैल जाता है तो इसे मेटास्टेटिक यानी चौथी स्टेज का कैंसर माना जाता है।
नई दवाओं से बढ़े उपचार के विकल्प
विशेषज्ञ चर्चा में ट्रास्टुजुमैब डेरक्सटेकैन, पर्टुजुमैब और टुकाटिनिब जैसी नई लक्षित दवाओं पर चर्चा हुई। इन उपचारों ने चौथी स्टेज के हेर-टू पॉजिटिव स्तन कैंसर में बीमारी को नियंत्रित करने की संभावनाएं बढ़ाई हैं। इनके साथ मरीजों के लंबे समय तक बेहतर जीवन जीने की उम्मीद भी पहले की तुलना में बढ़ी है। डॉ. चौधरी ने बताया कि कुछ वर्ष पहले हेर-टू पॉजिटिव स्तन कैंसर के उपचार के विकल्प काफी सीमित थे। लगातार हो रही चिकित्सा प्रगति के कारण अब मरीज की बीमारी की विशेषताओं के आधार पर कई उपचार विकल्प उपलब्ध हैं।
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मरीजों के लिए सबसे बड़ी
राहत: आयुष्मान से लक्षित इलाज
एम्स भोपाल में हेर-टू पॉजिटिव स्तन कैंसर के मरीजों के लिए आधुनिक लक्षित उपचार उपलब्ध हैं। ट्रास्टुजुमैब आधारित लक्षित उपचार आयुष्मान भारत योजना के तहत निःशुल्क उपलब्ध है।
इसके अलावा एम्स भोपाल के चिकित्सा कैंसर विज्ञान विभाग में स्तन कैंसर समेत उन्नत कैंसर के मरीजों के लिए लक्षित दवाओं, इम्यूनोथेरेपी और मरीज की बीमारी के अनुसार व्यक्तिगत उपचार की सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।
यह भी पढ़ें-जहरीली शराब से मौतों पर कांग्रेस का हमला: सिंघार-पटवारी ने सरकार को घेरा, पूछा- शराब माफिया किसके संरक्षण में?
महिलाओं के लिए जरूरी संदेश
हेर-टू पॉजिटिव स्तन कैंसर की रिपोर्ट आने का मतलब यह नहीं है कि उपचार के विकल्प खत्म हो गए। खासकर बीमारी के शरीर में फैल जाने के बाद भी आधुनिक उपचार से बीमारी को नियंत्रित करने की संभावनाएं मौजूद हैं। इसलिए स्तन में गांठ, आकार में बदलाव, त्वचा या निप्पल में असामान्य परिवर्तन जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच, कैंसर की सही पहचान और विशेषज्ञ चिकित्सक से उपचार शुरू करना सबसे महत्वपूर्ण है।
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बीमारी की पहचान से तय होगा इलाज
डॉ. चौधरी के अनुसार अब कैंसर का उपचार केवल यह देखकर तय नहीं किया जाता कि बीमारी किस अंग में है या किस चरण में पहुंची है। कैंसर कोशिकाओं की विशेषताओं की जांच कर यह पता लगाया जाता है कि मरीज के लिए कौन-सा उपचार अधिक प्रभावी हो सकता है। हेर-टू एक प्रोटीन है, जो कुछ स्तन कैंसर कोशिकाओं की सतह पर सामान्य से अधिक मात्रा में पाया जाता है। ऐसे कैंसर को हेर-टू पॉजिटिव स्तन कैंसर कहा जाता है। जब यह स्तन से निकलकर शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैल जाता है तो इसे मेटास्टेटिक यानी चौथी स्टेज का कैंसर माना जाता है।
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नई दवाओं से बढ़े उपचार के विकल्प
विशेषज्ञ चर्चा में ट्रास्टुजुमैब डेरक्सटेकैन, पर्टुजुमैब और टुकाटिनिब जैसी नई लक्षित दवाओं पर चर्चा हुई। इन उपचारों ने चौथी स्टेज के हेर-टू पॉजिटिव स्तन कैंसर में बीमारी को नियंत्रित करने की संभावनाएं बढ़ाई हैं। इनके साथ मरीजों के लंबे समय तक बेहतर जीवन जीने की उम्मीद भी पहले की तुलना में बढ़ी है। डॉ. चौधरी ने बताया कि कुछ वर्ष पहले हेर-टू पॉजिटिव स्तन कैंसर के उपचार के विकल्प काफी सीमित थे। लगातार हो रही चिकित्सा प्रगति के कारण अब मरीज की बीमारी की विशेषताओं के आधार पर कई उपचार विकल्प उपलब्ध हैं।
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राहत: आयुष्मान से लक्षित इलाज
एम्स भोपाल में हेर-टू पॉजिटिव स्तन कैंसर के मरीजों के लिए आधुनिक लक्षित उपचार उपलब्ध हैं। ट्रास्टुजुमैब आधारित लक्षित उपचार आयुष्मान भारत योजना के तहत निःशुल्क उपलब्ध है।
इसके अलावा एम्स भोपाल के चिकित्सा कैंसर विज्ञान विभाग में स्तन कैंसर समेत उन्नत कैंसर के मरीजों के लिए लक्षित दवाओं, इम्यूनोथेरेपी और मरीज की बीमारी के अनुसार व्यक्तिगत उपचार की सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।
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महिलाओं के लिए जरूरी संदेश
हेर-टू पॉजिटिव स्तन कैंसर की रिपोर्ट आने का मतलब यह नहीं है कि उपचार के विकल्प खत्म हो गए। खासकर बीमारी के शरीर में फैल जाने के बाद भी आधुनिक उपचार से बीमारी को नियंत्रित करने की संभावनाएं मौजूद हैं। इसलिए स्तन में गांठ, आकार में बदलाव, त्वचा या निप्पल में असामान्य परिवर्तन जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच, कैंसर की सही पहचान और विशेषज्ञ चिकित्सक से उपचार शुरू करना सबसे महत्वपूर्ण है।
