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छलका IAS नेहा मारव्या का दर्द: एक साल में चौथा ट्रांसफर, बोलीं-‘अधीनस्थों की बगावत के बाद मुझे ही हटा दिया’
Sun, 06 Sep 2026 12:41 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Sun, 06 Sep 2026 12:41 PM IST
सार
MP IAS नेहा मारव्या के लगातार तबादलों को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने IAS अधिकारियों के ग्रुप में पोस्ट कर कहा कि शिकायत करने के बावजूद कार्रवाई कर्मचारियों पर नहीं, बल्कि उनका ही तबादला कर दिया गया।
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नेहा मारव्या
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्यप्रदेश की IAS अधिकारी नेहा मारव्या के लगातार तबादलों का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। 5 सितंबर 2026 की तबादला सूची में नाम आने के बाद नेहा मारव्या ने IAS अधिकारियों के सोशल मीडिया ग्रुप में अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की। उन्होंने कहा कि एक साल में यह उनका चौथा तबादला है और इस बार महज 50 दिन में जिम्मेदारी बदल दी गई। नेहा ने अपनी पोस्ट में सवाल उठाया कि जब उन्होंने अधीनस्थ कर्मचारियों की कथित अनुशासनहीनता, फाइलें रोकने और उनके साथ दुर्व्यवहार की शिकायत उचित माध्यम से की, तो कार्रवाई कर्मचारियों पर होने के बजाय उनका ही तबादला क्यों कर दिया गया?
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‘क्या अधीनस्थ बगावत कर अफसर का ट्रांसफर करा सकते हैं?’
नेहा मारव्या ने लिखा कि वह समझती हैं कि IAS अधिकारी होने के नाते सरकार उन्हें जहां चाहे वहां पदस्थ कर सकती है और उन्होंने हमेशा सरकारी आदेशों का सम्मान किया है। लेकिन इस बार का तबादला उन्हें बेहद हतोत्साहित करने वाला लगा। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके अधीनस्थ कर्मचारियों ने उनके खिलाफ विरोध खड़ा किया और उन्हें तबादला करवाने की धमकी तक दी। नेहा के मुताबिक, उन्होंने इस कथित अनुशासनहीनता, फाइलें रोके जाने और दुर्व्यवहार की शिकायत की थी। उनका सवाल था कि जब शिकायत उन्होंने की तो कार्रवाई का सामना उन्हें ही क्यों करना पड़ा? उन्होंने लिखा कि यदि अधीनस्थ कर्मचारी किसी अधिकारी के खिलाफ संगठित होकर उसका तबादला करवा सकते हैं, तो इससे पूरी प्रशासनिक व्यवस्था में क्या संदेश जाएगा?
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‘एक महीने में कोई अधिकारी काम कैसे समझेगा?’
नेहा ने अपने छोटे कार्यकाल को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि किसी अधिकारी को नई जिम्मेदारी संभालने के बाद विभाग की कार्यप्रणाली और कामकाज समझने में ही समय लगता है, लेकिन उनका कार्यकाल लगातार छोटा होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक वह अपना काम और जिम्मेदारी समझ पाती हैं, तब तक उन्हें हटा दिया जाता है। ऐसे में वह प्रभावी तरीके से काम कैसे कर पाएंगी?
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‘कई साल तक चुप रही, अब अधीनस्थ धमकाने लगे’
नेहा ने अपनी पोस्ट में कहा कि उन्होंने लंबे समय तक किनारे किए जाने और पर्याप्त काम नहीं मिलने के बावजूद धैर्य रखा। उन्हें उम्मीद थी कि परिस्थितियां बदलेंगी, लेकिन अब स्थिति और खराब हो गई है। उनका आरोप है कि अब अधीनस्थ कर्मचारी उन्हें धमकाने तक लगे हैं। पोस्ट के अंत में उन्होंने व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि हर बार षड्यंत्र करने वाले जीत जाते हैं और वह हार जाती हैं।
एक साल में चौथी बार बदली जिम्मेदारी
5 सितंबर की तबादला सूची के मुताबिक नेहा मारव्या की जिम्मेदारियों में फिर बदलाव किया गया है। इससे पहले भी अलग-अलग पदस्थापना के दौरान उनके कार्यकाल और अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ मतभेद चर्चा में रहे हैं। डिंडोरी कलेक्टर के तौर पर उनकी पोस्टिंग भी लंबे समय तक नहीं चली। उन्होंने 14 साल की नौकरी में फील्ड पोस्टिंंग नहीं होने को लेकर भी अपना दर्द सोशल मीडिया पर शेयर किया था। जिसके बाद उन्होंने डिंडोरी कलेक्टर की जिम्मेदारी मिली थी। इससे पहले शिवराज सरकार में राजस्व विभाग में उनकी पोस्टिंग होने पर उन्होंने तत्कालीन सीएमओ में पदस्थ प्रमुख सचिव पर उनको काम नहीं देने के आरोप लगाए थे।
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IAS एसोसिएशन की भूमिका पर भी सवाल
नेहा की पोस्ट में IAS अधिकारियों के संगठन को लेकर भी नाराजगी दिखाई दी। उन्होंने उम्मीद जताई कि संगठन केवल शुभकामनाओं और बधाई संदेशों तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसे मामलों में भी अधिकारियों की समस्याओं पर विचार करेगा। हालांकि, उनकी पोस्ट के बाद ग्रुप में उन्हें अपेक्षित सार्वजनिक समर्थन नहीं मिला। बताया जा रहा है कि कुछ रिटायर्ड अधिकारियों ने उन्हें तबादलों के साथ-साथ अपने कामकाज और व्यवहार का भी आत्ममंथन करने की सलाह दी।
‘आज मैं हूं, कल कोई और IAS अधिकारी निशाने पर होगा’
अपनी पोस्ट के आखिर में नेहा मारव्या ने लिखा कि यदि अधीनस्थों के विरोध के बाद किसी अधिकारी का तबादला हो जाता है तो यह केवल उनका मामला नहीं है। उन्होंने आशंका जताई कि आज वह निशाने पर हैं, कल कोई दूसरा IAS अधिकारी भी ऐसी स्थिति का सामना कर सकता है।
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नेहा मारव्या ने लिखा कि वह समझती हैं कि IAS अधिकारी होने के नाते सरकार उन्हें जहां चाहे वहां पदस्थ कर सकती है और उन्होंने हमेशा सरकारी आदेशों का सम्मान किया है। लेकिन इस बार का तबादला उन्हें बेहद हतोत्साहित करने वाला लगा। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके अधीनस्थ कर्मचारियों ने उनके खिलाफ विरोध खड़ा किया और उन्हें तबादला करवाने की धमकी तक दी। नेहा के मुताबिक, उन्होंने इस कथित अनुशासनहीनता, फाइलें रोके जाने और दुर्व्यवहार की शिकायत की थी। उनका सवाल था कि जब शिकायत उन्होंने की तो कार्रवाई का सामना उन्हें ही क्यों करना पड़ा? उन्होंने लिखा कि यदि अधीनस्थ कर्मचारी किसी अधिकारी के खिलाफ संगठित होकर उसका तबादला करवा सकते हैं, तो इससे पूरी प्रशासनिक व्यवस्था में क्या संदेश जाएगा?
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‘एक महीने में कोई अधिकारी काम कैसे समझेगा?’
नेहा ने अपने छोटे कार्यकाल को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि किसी अधिकारी को नई जिम्मेदारी संभालने के बाद विभाग की कार्यप्रणाली और कामकाज समझने में ही समय लगता है, लेकिन उनका कार्यकाल लगातार छोटा होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक वह अपना काम और जिम्मेदारी समझ पाती हैं, तब तक उन्हें हटा दिया जाता है। ऐसे में वह प्रभावी तरीके से काम कैसे कर पाएंगी?
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‘कई साल तक चुप रही, अब अधीनस्थ धमकाने लगे’
नेहा ने अपनी पोस्ट में कहा कि उन्होंने लंबे समय तक किनारे किए जाने और पर्याप्त काम नहीं मिलने के बावजूद धैर्य रखा। उन्हें उम्मीद थी कि परिस्थितियां बदलेंगी, लेकिन अब स्थिति और खराब हो गई है। उनका आरोप है कि अब अधीनस्थ कर्मचारी उन्हें धमकाने तक लगे हैं। पोस्ट के अंत में उन्होंने व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि हर बार षड्यंत्र करने वाले जीत जाते हैं और वह हार जाती हैं।
एक साल में चौथी बार बदली जिम्मेदारी
5 सितंबर की तबादला सूची के मुताबिक नेहा मारव्या की जिम्मेदारियों में फिर बदलाव किया गया है। इससे पहले भी अलग-अलग पदस्थापना के दौरान उनके कार्यकाल और अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ मतभेद चर्चा में रहे हैं। डिंडोरी कलेक्टर के तौर पर उनकी पोस्टिंग भी लंबे समय तक नहीं चली। उन्होंने 14 साल की नौकरी में फील्ड पोस्टिंंग नहीं होने को लेकर भी अपना दर्द सोशल मीडिया पर शेयर किया था। जिसके बाद उन्होंने डिंडोरी कलेक्टर की जिम्मेदारी मिली थी। इससे पहले शिवराज सरकार में राजस्व विभाग में उनकी पोस्टिंग होने पर उन्होंने तत्कालीन सीएमओ में पदस्थ प्रमुख सचिव पर उनको काम नहीं देने के आरोप लगाए थे।
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IAS एसोसिएशन की भूमिका पर भी सवाल
नेहा की पोस्ट में IAS अधिकारियों के संगठन को लेकर भी नाराजगी दिखाई दी। उन्होंने उम्मीद जताई कि संगठन केवल शुभकामनाओं और बधाई संदेशों तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसे मामलों में भी अधिकारियों की समस्याओं पर विचार करेगा। हालांकि, उनकी पोस्ट के बाद ग्रुप में उन्हें अपेक्षित सार्वजनिक समर्थन नहीं मिला। बताया जा रहा है कि कुछ रिटायर्ड अधिकारियों ने उन्हें तबादलों के साथ-साथ अपने कामकाज और व्यवहार का भी आत्ममंथन करने की सलाह दी।
‘आज मैं हूं, कल कोई और IAS अधिकारी निशाने पर होगा’
अपनी पोस्ट के आखिर में नेहा मारव्या ने लिखा कि यदि अधीनस्थों के विरोध के बाद किसी अधिकारी का तबादला हो जाता है तो यह केवल उनका मामला नहीं है। उन्होंने आशंका जताई कि आज वह निशाने पर हैं, कल कोई दूसरा IAS अधिकारी भी ऐसी स्थिति का सामना कर सकता है।
