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एमपी: गडकरी बोले- ट्रांसपोर्ट से 40% प्रदूषण, जिम्मेदारी मेरी;बताया 1000 लोगों पर कितनी बसें होनी चाहिए?
Fri, 25 Sep 2026 04:01 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Fri, 25 Sep 2026 04:01 PM IST
सार
मध्यप्रदेश में सार्वजनिक परिवहन के विस्तार को लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि प्रति हजार आबादी पर बसों की संख्या बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने स्वच्छ ईंधन, कम किराये, सुरक्षित बसों और बेहतर कनेक्टिविटी पर जोर दिया। गडकरी ने 25 हजार बसों की संभावित क्षमता, पीएम ई-बस सेवा के तहत एमपी के लिए 972 बसों और बस सुरक्षा मानकों को लेकर भी कई अहम बातें कहीं।
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केंद्रीय मंत्री और सीएम ने बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के शुभारंभ कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि मध्यप्रदेश में सार्वजनिक परिवहन को बड़े स्तर पर विस्तार देने की क्षमता है। गडकरी ने कहा कि देश में प्रति हजार आबादी पर फिलहाल करीब दो बसें हैं, जबकि वैश्विक मानक के अनुसार प्रति हजार लोगों पर आठ बसों की जरूरत बताई जाती है। उन्होंने मध्यप्रदेश सरकार से सार्वजनिक परिवहन के विस्तार पर तेजी से काम करने का आग्रह किया। गडकरी ने कहा कि उनका लक्ष्य ऐसी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें इलेक्ट्रिक और स्वच्छ ईंधन वाली बसें, बेहतर सुविधाएं और सुरक्षित यात्रा उपलब्ध हो। उन्होंने कहा कि भविष्य में डीजल बसों की तुलना में किराया करीब 30 प्रतिशत तक कम करने की दिशा में काम होना चाहिए, ताकि गरीब, मजदूर, किसान और ग्रामीण आबादी भी आरामदायक ऐसी बस सेवा का लाभ ले सके। उन्होंने कहा कि हमारे देश में जो प्रदूषण होता है, वो 40 परसेंट हवा प्रदूषण, एयर पोल्यूशन हमारे ट्रांसपोर्ट मंत्री विभाग के कारण होता है, जिसके लिए मैं ज़िम्मेदार हूँ। मध्य प्रदेश में जो होता है, उसके लिए माननीय मंत्री ज़िम्मेदार हैं। पर हम इस प्रदूषण को हटाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे देश में 22 लाख करोड़ रुपये का पेट्रोल, डीजल, गैस इंपोर्ट होता है। इसे इलेक्ट्रिक और नए मॉडल को अपना कर रोकना हैं। ताकि इस राशि को देश की जनता पर खर्च किया जा सके।
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25 हजार बसें चलेंगी तो रोजगार भी बढ़ेगा
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में 25 हजार इंलेक्ट्रिक बसों के संचालन की संभावना हैं। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परिवहन का विस्तार केवल यात्रियों की सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे परिवहन उद्योग और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिल सकता है। बस संचालन के साथ ड्राइवर, तकनीकी कर्मचारी, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, बस निर्माण और दूसरे संबंधित क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने बताया कि पीएम ई-बस सेवा के तहत देश में 10 हजार बसें पीपीपी मॉडल पर लगाने की योजना है। इसके लिए केंद्र की ओर से करीब 20 हजार करोड़ रुपये के योगदान का प्रावधान बताया गया। गडकरी के अनुसार मध्यप्रदेश के लिए 972 बसें स्वीकृत की गई हैं।
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आरटीओ अधिकारियों पर किया कटाक्ष
गडकरी ने बसों की सुरक्षा को लेकर भी अधिकारियों और बस निर्माताओं को स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि बस बॉडी निर्माण में सुरक्षा मानकों का पालन जरूरी है। उन्होंने बताया कि 1 सितंबर 2025 से नया बस बॉडी कोड लागू किया गया है। इसके तहत बसों का पंजीयन परीक्षण एजेंसी से जरूरी प्रमाणन के बाद ही किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हर बस के लिए सुरक्षा संबंधी चेकलिस्ट तैयार कर उसे वाहन पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। फिजिकल और वीडियो निरीक्षण के बिना बस का पंजीयन नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ये आरटीओ के ऑफिसर ध्यान में रखिए। मुझे मालूम नहीं पर बहुत से आरटीओ के ऑफिसर गांधीवादी हैं। गांधी के नोट दिखते हैं तो कागज पर सील मारत देते हैं। जरा याद रखना गलत बस को स्वीकृति दी तो आपकी नौकरी जाएगी।
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दिव्यांग और बुजुर्गों के लिए लो-फ्लोर बसों पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि शहरी परिवहन की बसें बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और चोटिल यात्रियों के लिए भी आसानी से सुलभ होनी चाहिए। इसके लिए लो-फ्लोर बसों में 400 मिलीमीटर की ऊंचाई के नए मानकों का उल्लेख किया। उन्होंने बसों में व्हीलचेयर लिफ्ट, रैंप, हैंडरेल और सपोर्ट हैंडल जैसी सुविधाओं पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आने वाली सिटी बसों में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे बुजुर्ग और दिव्यांग यात्री बिना परेशानी बस में चढ़ सकें।
इलेक्ट्रिक, हाइड्रोजन और इथेनॉल पर फोकस
गडकरी ने सार्वजनिक परिवहन को स्वच्छ ईंधन से जोड़ने की जरूरत बताई। उन्होंने इलेक्ट्रिक बसों के साथ इथेनॉल, हाइड्रोजन और अन्य वैकल्पिक ईंधन आधारित वाहनों के विस्तार की बात कही। उनका कहना था कि इससे प्रदूषण कम करने के साथ पेट्रोल-डीजल के आयात पर निर्भरता घटाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल केवल बसों को आधुनिक बनाने के लिए नहीं, बल्कि परिवहन को सुरक्षित, किफायती, समयबद्ध और जवाबदेह बनाने के लिए होना चाहिए।
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ड्राइविंग ट्रेनिंग और स्क्रैपिंग सेंटर बढ़ाने की बात
गडकरी ने मध्यप्रदेश में ड्राइवर ट्रेनिंग सेंटर और वाहन स्क्रैपिंग सेंटर बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आदिवासी, ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के युवाओं को ड्राइविंग का प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार से जोड़ा जा सकता है। उन्होंने प्रदेश में ड्राइविंग ट्रेनिंग और टेस्टिंग सेंटर के विस्तार के लिए प्रस्ताव भेजने को कहा।
बसों के साथ फर्स्ट और लास्ट माइल कनेक्टिविटी भी जरूरी
गडकरी ने कहा कि सार्वजनिक परिवहन को सफल बनाने के लिए केवल बड़ी बसें चलाना पर्याप्त नहीं है। गांव और छोटे कस्बों से मुख्य बस रूट तक यात्रियों को पहुंचाने के लिए फर्स्ट और लास्ट माइल कनेक्टिविटी मजबूत करनी होगी। उन्होंने ऐप आधारित टैक्सी और बाइक टैक्सी सेवाओं को भी सार्वजनिक परिवहन से जोड़ने की जरूरत बताई।
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25 हजार बसें चलेंगी तो रोजगार भी बढ़ेगा
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में 25 हजार इंलेक्ट्रिक बसों के संचालन की संभावना हैं। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परिवहन का विस्तार केवल यात्रियों की सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे परिवहन उद्योग और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिल सकता है। बस संचालन के साथ ड्राइवर, तकनीकी कर्मचारी, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, बस निर्माण और दूसरे संबंधित क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने बताया कि पीएम ई-बस सेवा के तहत देश में 10 हजार बसें पीपीपी मॉडल पर लगाने की योजना है। इसके लिए केंद्र की ओर से करीब 20 हजार करोड़ रुपये के योगदान का प्रावधान बताया गया। गडकरी के अनुसार मध्यप्रदेश के लिए 972 बसें स्वीकृत की गई हैं।
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आरटीओ अधिकारियों पर किया कटाक्ष
गडकरी ने बसों की सुरक्षा को लेकर भी अधिकारियों और बस निर्माताओं को स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि बस बॉडी निर्माण में सुरक्षा मानकों का पालन जरूरी है। उन्होंने बताया कि 1 सितंबर 2025 से नया बस बॉडी कोड लागू किया गया है। इसके तहत बसों का पंजीयन परीक्षण एजेंसी से जरूरी प्रमाणन के बाद ही किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हर बस के लिए सुरक्षा संबंधी चेकलिस्ट तैयार कर उसे वाहन पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। फिजिकल और वीडियो निरीक्षण के बिना बस का पंजीयन नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ये आरटीओ के ऑफिसर ध्यान में रखिए। मुझे मालूम नहीं पर बहुत से आरटीओ के ऑफिसर गांधीवादी हैं। गांधी के नोट दिखते हैं तो कागज पर सील मारत देते हैं। जरा याद रखना गलत बस को स्वीकृति दी तो आपकी नौकरी जाएगी।
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दिव्यांग और बुजुर्गों के लिए लो-फ्लोर बसों पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि शहरी परिवहन की बसें बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और चोटिल यात्रियों के लिए भी आसानी से सुलभ होनी चाहिए। इसके लिए लो-फ्लोर बसों में 400 मिलीमीटर की ऊंचाई के नए मानकों का उल्लेख किया। उन्होंने बसों में व्हीलचेयर लिफ्ट, रैंप, हैंडरेल और सपोर्ट हैंडल जैसी सुविधाओं पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आने वाली सिटी बसों में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे बुजुर्ग और दिव्यांग यात्री बिना परेशानी बस में चढ़ सकें।
इलेक्ट्रिक, हाइड्रोजन और इथेनॉल पर फोकस
गडकरी ने सार्वजनिक परिवहन को स्वच्छ ईंधन से जोड़ने की जरूरत बताई। उन्होंने इलेक्ट्रिक बसों के साथ इथेनॉल, हाइड्रोजन और अन्य वैकल्पिक ईंधन आधारित वाहनों के विस्तार की बात कही। उनका कहना था कि इससे प्रदूषण कम करने के साथ पेट्रोल-डीजल के आयात पर निर्भरता घटाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल केवल बसों को आधुनिक बनाने के लिए नहीं, बल्कि परिवहन को सुरक्षित, किफायती, समयबद्ध और जवाबदेह बनाने के लिए होना चाहिए।
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ड्राइविंग ट्रेनिंग और स्क्रैपिंग सेंटर बढ़ाने की बात
गडकरी ने मध्यप्रदेश में ड्राइवर ट्रेनिंग सेंटर और वाहन स्क्रैपिंग सेंटर बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आदिवासी, ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के युवाओं को ड्राइविंग का प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार से जोड़ा जा सकता है। उन्होंने प्रदेश में ड्राइविंग ट्रेनिंग और टेस्टिंग सेंटर के विस्तार के लिए प्रस्ताव भेजने को कहा।
बसों के साथ फर्स्ट और लास्ट माइल कनेक्टिविटी भी जरूरी
गडकरी ने कहा कि सार्वजनिक परिवहन को सफल बनाने के लिए केवल बड़ी बसें चलाना पर्याप्त नहीं है। गांव और छोटे कस्बों से मुख्य बस रूट तक यात्रियों को पहुंचाने के लिए फर्स्ट और लास्ट माइल कनेक्टिविटी मजबूत करनी होगी। उन्होंने ऐप आधारित टैक्सी और बाइक टैक्सी सेवाओं को भी सार्वजनिक परिवहन से जोड़ने की जरूरत बताई।
