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मध्य प्रदेश: 47 साल बाद भी नर्मदा का पूरा पानी नहीं ले पाया MP, अब 2031 तक हर बूंद के इस्तेमाल की योजना
Wed, 02 Sep 2026 07:14 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Wed, 02 Sep 2026 07:14 PM IST
सार
मध्य प्रदेश को नर्मदा के पानी में अपना हिस्सा मिले 47 साल हो चुके हैं, लेकिन अब तक करीब आधे से थोड़ा ज्यादा पानी ही इस्तेमाल हो पाया है। सरकार ने 2031 तक अपने पूरे हिस्से के 18.25 एमएएफ पानी का उपयोग करने के लिए करीब 40 परियोजनाओं पर काम तेज कर दिया है।
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नर्मदा नदी (फाइल फोटो)
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विस्तार
मध्य प्रदेश की जीवन रेखा नर्मदा नदी के पानी पर राज्य का अधिकार तय हुए करीब 47 साल बीत चुके हैं, लेकिन प्रदेश अब भी अपने हिस्से की हर बूंद को इस्तेमाल करने की कवायद में जुटा है। वर्ष 1979 में नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण के फैसले के बाद मध्य प्रदेश को नर्मदा के 18.25 मिलियन एकड़-फीट (एमएएफ) पानी का आवंटन हुआ था। इसके मुकाबले अब तक करीब 10 एमएएफ पानी का ही उपयोग हो पा रहा है। शेष हिस्से को खेतों तक पहुंचाने के लिए सरकार ने परियोजनाओं की बड़ी श्रृंखला तैयार की है। इस परियोजना का लक्ष्य वर्ष 2031 तक प्रदेश के हिस्से के पूरे पानी का उपयोग करना है। 12 दिसंबर 1979 को नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण का अंतिम फैसला केंद्र सरकार के राजपत्र में प्रकाशित हुआ था। इसमें नर्मदा के कुल 28 एमएएफ उपयोग योग्य पानी का बंटवारा किया गया था। मध्य प्रदेश को सबसे ज्यादा 18.25 एमएएफ हिस्सा मिला, जबकि गुजरात को 9 एमएएफ, राजस्थान को 0.50 एमएएफ और महाराष्ट्र को 0.25 एमएएफ पानी आवंटित किया गया।
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20 हजार करोड़ से ज्यादा की 36 परियोजनाएं
नर्मदा के पानी का अधिकतम उपयोग करने के लिए प्रदेश में करीब 40 परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इनमें 36 परियोजनाएं 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली हैं। आठ और परियोजनाओं के टेंडर अगले एक-दो महीने में जारी किए जाने की तैयारी है। अधिकारियों के मुताबिक करीब 70 प्रतिशत परियोजनाओं में काम तेजी से चल रहा है। पाइपलाइन में शामिल कई परियोजनाओं का 60 से 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। नर्मदा घाटी से संबंधित अलग-अलग विभागों की करीब 150 परियोजनाएं शुरू की गई हैं। इनमें अकेले नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (एनवीडीए) की 72 जल परियोजनाएं शामिल हैं। इनका उद्देश्य सिंचाई क्षमता बढ़ाने के साथ नर्मदा के आवंटित जल का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना है।
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चार जोन में बांटकर बढ़ाया जा रहा काम
नर्मदा जल के उपयोग की परियोजनाओं को चार प्रमुख जोन में बांटा गया है। इनमें अपर नर्मदा जोन, जबलपुर स्थित रानी अवंतीबाई लोधी सागर परियोजना, सनावद की इंदिरा सागर परियोजना और निचली नर्मदा परियोजनाएं शामिल हैं। माइक्रो सिंचाई और ओपन चैनल परियोजनाओं के जरिए पानी को उन इलाकों तक ले जाने पर भी जोर है, जहां अब तक सिंचाई सुविधा सीमित रही है। इंदौर के प्रशासनिक नियंत्रण वाले क्षेत्र में 53 माइक्रो सिंचाई परियोजनाओं में से 24 पूरी हो चुकी हैं। ओपन चैनल की 11 परियोजनाएं भी पूरी हो गई हैं। इसके अलावा पांच माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इन योजनाओं से करीब 31.75 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने का लक्ष्य है।
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इन पांच बड़ी परियोजनाओं पर नजर
अपर नर्मदा बहुउद्देश्यीय परियोजना - लागत करीब 7,500 करोड़ रुपये, प्रस्तावित सिंचाई क्षमता 1.05 लाख हेक्टेयर।
राघवपुर बहुउद्देश्यीय परियोजना - लागत करीब 5,300 करोड़ रुपये, सिंचाई क्षमता 68 हजार हेक्टेयर।
बसानिया बहुउद्देश्यीय परियोजना - लागत करीब 3,900 करोड़ रुपये, सिंचाई क्षमता 47 हजार हेक्टेयर।
मां रेवा माइक्रो लिफ्ट सिंचाई परियोजना - लागत करीब 1,500 करोड़ रुपये, सिंचाई क्षमता 45 हजार हेक्टेयर।
धार माइक्रो लिफ्ट सिंचाई परियोजना - लागत करीब 1,250 करोड़ रुपये, सिंचाई क्षमता 38 हजार हेक्टेयर।
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2024-25 में नौ नई परियोजनाओं पर 11,645 करोड़
नर्मदा कछार में वर्ष 2024-25 के दौरान नौ नई परियोजनाओं पर करीब 11,645 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इनसे 3.51 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है। बहेरीबंद, शहीद ईलाप सिंह, सोनडवा, निवाली, महेश्वर-जानापाव, संधवा, धार, मां रेवा और वड़ादेव संयुक्त उद्वहन माइक्रो सिंचाई परियोजनाएं इनमें शामिल हैं।
2031 तक पूरे पानी उपयोग करेंगे : वर्मा
एनवीडीए के सदस्य इंजीनियर धन्नालाल वर्मा का कहना है कि कि नर्मदा से जुड़ी करीब 40 परियोजनाओं पर काम चल रहा है। आठ परियोजनाओं के टेंडर जल्द जारी होंगे। उनका कहना है कि यदि परियोजनाओं के क्रियान्वयन में कोई बड़ी बाधा नहीं आई तो वर्ष 2031 तक मध्य प्रदेश अपने हिस्से के 18.25 एमएएफ पानी का पूरा उपयोग करने की स्थिति में आ जाएगा। फिलहाल किसी अन्य राज्य की ओर से इस संबंध में आपत्ति दर्ज नहीं कराई गई है।
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20 हजार करोड़ से ज्यादा की 36 परियोजनाएं
नर्मदा के पानी का अधिकतम उपयोग करने के लिए प्रदेश में करीब 40 परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इनमें 36 परियोजनाएं 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली हैं। आठ और परियोजनाओं के टेंडर अगले एक-दो महीने में जारी किए जाने की तैयारी है। अधिकारियों के मुताबिक करीब 70 प्रतिशत परियोजनाओं में काम तेजी से चल रहा है। पाइपलाइन में शामिल कई परियोजनाओं का 60 से 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। नर्मदा घाटी से संबंधित अलग-अलग विभागों की करीब 150 परियोजनाएं शुरू की गई हैं। इनमें अकेले नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (एनवीडीए) की 72 जल परियोजनाएं शामिल हैं। इनका उद्देश्य सिंचाई क्षमता बढ़ाने के साथ नर्मदा के आवंटित जल का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना है।
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चार जोन में बांटकर बढ़ाया जा रहा काम
नर्मदा जल के उपयोग की परियोजनाओं को चार प्रमुख जोन में बांटा गया है। इनमें अपर नर्मदा जोन, जबलपुर स्थित रानी अवंतीबाई लोधी सागर परियोजना, सनावद की इंदिरा सागर परियोजना और निचली नर्मदा परियोजनाएं शामिल हैं। माइक्रो सिंचाई और ओपन चैनल परियोजनाओं के जरिए पानी को उन इलाकों तक ले जाने पर भी जोर है, जहां अब तक सिंचाई सुविधा सीमित रही है। इंदौर के प्रशासनिक नियंत्रण वाले क्षेत्र में 53 माइक्रो सिंचाई परियोजनाओं में से 24 पूरी हो चुकी हैं। ओपन चैनल की 11 परियोजनाएं भी पूरी हो गई हैं। इसके अलावा पांच माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इन योजनाओं से करीब 31.75 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने का लक्ष्य है।
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इन पांच बड़ी परियोजनाओं पर नजर
अपर नर्मदा बहुउद्देश्यीय परियोजना - लागत करीब 7,500 करोड़ रुपये, प्रस्तावित सिंचाई क्षमता 1.05 लाख हेक्टेयर।
राघवपुर बहुउद्देश्यीय परियोजना - लागत करीब 5,300 करोड़ रुपये, सिंचाई क्षमता 68 हजार हेक्टेयर।
बसानिया बहुउद्देश्यीय परियोजना - लागत करीब 3,900 करोड़ रुपये, सिंचाई क्षमता 47 हजार हेक्टेयर।
मां रेवा माइक्रो लिफ्ट सिंचाई परियोजना - लागत करीब 1,500 करोड़ रुपये, सिंचाई क्षमता 45 हजार हेक्टेयर।
धार माइक्रो लिफ्ट सिंचाई परियोजना - लागत करीब 1,250 करोड़ रुपये, सिंचाई क्षमता 38 हजार हेक्टेयर।
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2024-25 में नौ नई परियोजनाओं पर 11,645 करोड़
नर्मदा कछार में वर्ष 2024-25 के दौरान नौ नई परियोजनाओं पर करीब 11,645 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इनसे 3.51 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है। बहेरीबंद, शहीद ईलाप सिंह, सोनडवा, निवाली, महेश्वर-जानापाव, संधवा, धार, मां रेवा और वड़ादेव संयुक्त उद्वहन माइक्रो सिंचाई परियोजनाएं इनमें शामिल हैं।
2031 तक पूरे पानी उपयोग करेंगे : वर्मा
एनवीडीए के सदस्य इंजीनियर धन्नालाल वर्मा का कहना है कि कि नर्मदा से जुड़ी करीब 40 परियोजनाओं पर काम चल रहा है। आठ परियोजनाओं के टेंडर जल्द जारी होंगे। उनका कहना है कि यदि परियोजनाओं के क्रियान्वयन में कोई बड़ी बाधा नहीं आई तो वर्ष 2031 तक मध्य प्रदेश अपने हिस्से के 18.25 एमएएफ पानी का पूरा उपयोग करने की स्थिति में आ जाएगा। फिलहाल किसी अन्य राज्य की ओर से इस संबंध में आपत्ति दर्ज नहीं कराई गई है।
