फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   bhopal ngt tree plantation compensatory afforestation five year report

भोपाल: पौधारोपण पर एनजीटी का कड़ा रुख, विभागों से मांगा पांच वर्षों का हिसाब

Tue, 06 Oct 2026 08:34 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: दिनेश शर्मा Updated Tue, 06 Oct 2026 08:34 PM IST
सार

भोपाल में पेड़ों की कटाई के बदले हुए क्षतिपूर्ति पौधारोपण को लेकर एनजीटी ने सख्ती दिखाई है। ट्रिब्यूनल ने वन विभाग और संबंधित एजेंसियों से पिछले पांच वर्षों में मिली राशि और किए गए पौधारोपण का हिसाब मांगा। मृत पौधों की जगह नए पौधे लगाने और उनकी शत-प्रतिशत उत्तरजीविता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

विज्ञापन
bhopal ngt tree plantation compensatory afforestation five year report
एनजीटी - फोटो : संवाद

विस्तार

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने भोपाल और आसपास के क्षेत्रों में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण तथा अन्य विकास परियोजनाओं के तहत हुई पेड़ों की कटाई के बदले किए जाने वाले क्षतिपूर्ति पौधारोपण के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल ने करीब 80 हजार पौधों के रोपण और विकास एजेंसियों से प्राप्त करोड़ों रुपये के बजटीय कोष के उपयोग को लेकर वन विभाग, भोपाल नगर निगम और राज्य सरकार के रवैये पर सख्त असंतोष जताया है। पीठ ने साफ किया कि केवल कागजों पर पौधे लगाना या अभियान चलाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि रोपे गए पौधों का जीवित रहना भी अनिवार्य है।
विज्ञापन


पर्यावरणविद् नितिन सक्सेना द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति श्योकुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने आदेश पारित किया। पीठ ने वन विकास और पर्यावरण वानिकी मंडल से सीधा प्रश्न किया कि वर्ष 2025 में पौधारोपण के लिए जमा कराई गई राशि का उपयोग करके वर्ष 2026 के मानसून सत्र में पौधारोपण की कार्रवाई क्यों नहीं की गई। ट्रिब्यूनल ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि पौधारोपण का कार्य केवल कागजी औपचारिकताओं और अभियानों तक ही सीमित रह जाता है, जबकि धरातल पर उसकी देखरेख नहीं होती।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें- खौफनाक: बेटे की चाह में मां ने एक दिन की नवजात बेटी का गला घोंटा, अस्पताल के बिस्तर पर की ये हैवानियत
विज्ञापन
विज्ञापन


पांच वर्षों का मांगा हिसाब-किताब
ट्रिब्यूनल ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक और वन बल प्रमुख को निर्देश जारी किए हैं कि वे पिछले पांच वर्षों का पूरा लेखा-जोखा प्रस्तुत करें। इसके तहत राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, विभिन्न सरकारी तथा निजी विकास एजेंसियों से पिछले पांच वर्षों में प्राप्त धनराशि की जिला-वार रिपोर्ट मांगी गई है। इसके साथ ही, किस वर्ष कितनी राशि प्राप्त हुई और उसके मुकाबले वास्तव में कितना पौधारोपण किया गया, इसकी अलग-अलग सूचियां पेश करने का आदेश दिया गया है। पीठ ने कहा कि विकास कार्यों के नाम पर काटे गए वृक्षों की भरपाई पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए।


शत-प्रतिशत उत्तरजीविता सुनिश्चित करने के निर्देश
भोपाल नगर निगम और संभागीय वन अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि वे पिछले पांच वर्षों में रोपे गए उन सभी पौधों का नए सिरे से आकलन करें, जो पानी या समुचित रखरखाव के अभाव में सूख गए हैं। ट्रिब्यूनल ने कहा कि उपलब्ध बजट की बची हुई राशि से तुरंत मृत पौधों के स्थान पर नए पौधे लगाए जाएं, ताकि पौधों की शत-प्रतिशत उत्तरजीविता सुनिश्चित की जा सके। इसके अतिरिक्त, जब तक पौधे पूरी तरह से जमीन में स्थापित होकर बड़े नहीं हो जाते, तब तक उन्हें नियमित रूप से पानी देने की मजबूत व्यवस्था बनाने के निर्देश भी दिए गए हैं।

विभिन्न विभागों के लिए समय-सीमा तय
मामले में लापरवाही बरतने वाली संस्थाओं के लिए ट्रिब्यूनल ने कड़ी समय-सीमा निर्धारित की है। पूर्व आदेशों के बावजूद जवाब दाखिल न करने पर भोपाल नगर निगम को अगली सुनवाई से पहले अपना पक्ष रखने का अंतिम अवसर दिया गया है। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को 10 कार्य दिवसों के भीतर अपनी वर्तमान स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। वहीं वन विभाग को पेड़ों की कटाई के एवज में जमा हुई राशि का सत्यापन करने और उप-संभागीय अधिकारी द्वारा उठाए प्रश्नों का समाधान करते हुए चार सप्ताह के भीतर अंतिम विस्तृत रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। ट्रिब्यूनल ने इस महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई के लिए 29 अक्तूबर की तिथि निश्चित की है।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed