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Lucknow News: बिहार चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने उठाए सही सवाल

Sun, 27 Jul 2025 05:18 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 27 Jul 2025 05:18 PM IST
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vichar manch seminar held

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माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। बिहार में विधानसभा के लिए इस वर्ष के अंत में होने जा रहे चुनाव हेतु निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता-सूची सुधारने का जो काम शुरू किया गया है, उसका विपक्षी दल प्रबल विरोध कर रहे हैं। अतः उस संबंध में निर्वाचन आयोग ने यह सही सवाल किया है कि लाखों की संख्या में जो लोग मृत हो चुके हैं या स्थायी रूप से बिहार से बाहर बस गए हैं अथवा भारतीय नागरिक नहीं हैं, बल्कि विदेशों से अवैध रूप से घुस आए घुसपैठिया हैं, उनके नाम यदि मतदाता-सूची से हटाए जा रहे हैं तो इसमें गलत क्या है?

उक्त विचार बुद्घिजीवियों ने विचार मंच की ओर से ‘बिहार में मतदाता सूची को लेकर निर्वाचन आयोग के सवाल’ विषयक वीरसावरकर नगर में आयोजित संगोष्ठी में व्यक्त किए गए। मुख्य वक्ता अर्थशास्त्री प्रो. अम्बिका प्रसाद तिवारी ने कहाकि विदेशी घुसपैठिए हमारे लोकतंत्र के लिए तो खतरा हैं ही, वे हमारी अर्थव्यवस्था के लिए भी गंभीर खतरा सिद्ध हो रहे हैं। उन पर देश की जो पूंजी व्यय हो रही है, उससे वस्तुतः भारतीयों का हक मारा जा रहा है। विपक्षी दलों ने लाखों की संख्या में अवैध लोगों को मतदाता-सूची में शामिल कराकर उनके बल पर चुनाव जीतने की मंशा पाल रखी है, किन्तु मतदाता-सूची से उनके नाम हट जाने पर विपक्ष को हार का सामना करना पड़ेगा। संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए पत्रकार श्याम कुमार ने कहाकि बिहार में ही नहीं, अन्य सभी राज्यों आदि में भी लाखों की संख्या में अवैध मतदाता बनाकर उनके बल पर विपक्ष चुनाव जीतने का जुगाड़ किया करता है। पश्चिम बंगाल में कम्युनिस्टों ने चुनाव जीतने के लिए एक बड़ा हथकंडा अपनाया था, जिसे ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस पार्टी ने भी अपना लिया है। उस हथकंडे के अनुसार पार्टी के गुंडातत्व आम नागरिकों को धमकाते हैं कि यदि उन्होंने तृणमूल कांग्रेस को वोट नहीं दिया तो उन्हें इलाके में चैन से नहीं रहने दिया जाएगा। राजेश राय, डॉ. हरिराम त्रिपाठी, राजीव अहूजा, राम सिंह तोमर, शेखर पंडित आदि पत्रकारों ने मांग की कि पूरे देश की मतदाता-सूची को सुधारकर पूर्णरूपेण सही किया जाए तथा सुधार की यह प्रक्रिया निरंतर चलती रहनी चाहिए। पत्रकार सिद्धार्थ सौरभ एवं समाजसेवी सुशीला मिश्र ने मांग की कि सभी जगह मतदान केंद्रीय सुरक्षाबलों की निगरानी में कराए जाने चाहिए। समाजसेवी राजीव माथुर एवं पत्रकार शिशुपाल सिंह ने कहाकि निर्वाचन आयोग मतदाता-सूची में सुधार का जो अभियान चला रहा है, सर्वोच्च न्यायालय को उसका समर्थन करना चाहिए। विश्लेषक सर्वेशचंद्र द्विवेदी ने निर्वाचन विशेषज्ञ यशवंत देशमुख द्वारा प्रस्तुत इन आंकड़ों को उद्धृत किया कि बिहार की विधानसभा मतदाता-सूची में शामिल 20 लाख मतदाताओं की मौत हो चुकी है तथा 30 लाख लोग स्थायी रूप से दूसरी जगह जाकर बस गए हैं। बहुत बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जिनके नाम एक से अधिक स्थान पर मतदाता-सूची में दर्ज हैं।
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