यूपी: बदली हुई रणनीति से चुनाव में उतरेगी बसपा, बूथ की जगह सेक्टर पर ध्यान; इसी माह तय हो जाएंगे टिकट
BSP performance in UP: बीते विधानसभा चुनाव से उलट इस बार बहुजन समाज पार्टी ज्यादा मजबूती से चुनाव में जाती दिख रही है। पार्टी ने इसको लेकर तैयारी भी शुरू कर दी है।
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बहुजन समाज पार्टी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को मजबूत कर रही है। बसपा अब बूथ स्तर के बजाय सेक्टर स्तर पर ध्यान केंद्रित करेगी। बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोमवार को यूपी राज्य की बैठक में यह निर्देश दिए।
पिछले एक वर्ष से बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत किया गया है। अब सेक्टर स्तर पर संगठन की चुनावी तैयारियों की परीक्षा होगी। मायावती ने संभावित प्रत्याशियों को सेक्टर बैठकों में हर वर्ग के प्रतिनिधि जुटाने को कहा। प्रत्याशियों को प्रत्येक वर्ग से कम से कम 10 लोगों को लाना होगा। इससे सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सकेगा। उन जगहों पर सेक्टर बनाने पर अधिक ध्यान दिया जाएगा जहां बूथ स्तर की तैयारियां पूरी नहीं हुई हैं। यह कम समय में चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप देने में मदद करेगा। साथ ही, प्रत्याशी की काबिलियत का भी आकलन हो सकेगा।
मायावती ने बहुजन समाज की अधिक भागीदारी के लिए वरिष्ठ पदाधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने उत्तर प्रदेश संगठन की पिछली दो बैठकों में मतदाता सूची की चुनाव आयोग द्वारा एसआईआर के बाद मतदान केंद्र स्तर तक की कमेटियों के पुनर्गठन की समीक्षा की। कमियों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश भी दिए। बदले राजनीतिक हालात के मद्देनजर चुनावी तैयारियों को तीव्र व प्रभावी बनाने का आह्वान किया ताकि बसपा पांचवीं बार सरकार बना सके।
इसी महीने टिकट तय करने पर जोर
बहुजन समाज पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव के लिए सितंबर माह में अपने अधिकांश टिकट फाइनल करने की तैयारी में है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोमवार को यूपी के सभी पदाधिकारियों और जिलाध्यक्षों के साथ चुनावी तैयारियों पर मंथन किया। इस दौरान उन्होंने अन्य दलों की चुनावी रेवड़ियों से सावधान रहने को कहा। खासकर महिलाओं को भाजपा और सपा द्वारा हर साल हजारों रुपये देने के प्रलोभन से आगाह किया। वहीं दूसरी ओर उन्होंने जेन जी की समस्याओं का समर्थन करते हुए सरकारों से उनका निस्तारण करने को कहा।
बसपा सुप्रीमो ने बैठक में कहा कि यूपी की जनता विरोधी पार्टियों के ऐसे खुल्लमखुल्ला छलावों व विश्वासघात आदि से बचें और चुनाव में अपनी मर्जी के हिसाब से निष्पक्ष होकर वोट करें। देश के विभिन्न राज्यों में चुनाव के बाद सरकार बन जाने पर ऐसी ही लगातार वादाखिलाफी और विश्वासघात जारी है। बसपा के संघर्ष के साथ 'जेन-जी और जेन-अल्फा' तक को ऐसे जनविरोधी रवैयों के कारण संघर्ष करना पड़ा जिसके बाद उन्हें पुलिस के मुकदमे आदि जैसे सरकारी दमन का सामना करना पड़ा है। वर्तमान में प्रदेश के लोगों को महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी व पिछड़ेपन की वजह से मजबूरी में पलायन करना पड़ रहा है। सरकार जो भी घोषणाएं कर रही है वह ऊंट के मुंह में जीरा के समान हैं।