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यूपी: प्रदेश में सक्रिय हुआ फर्जी डॉक्टर बनाने वाला अंतरराज्यीय गिरोह, इन राज्यों की डिग्री से संदेह बढ़ा

Tue, 01 Sep 2026 06:39 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Tue, 01 Sep 2026 06:39 AM IST
सार

Fake doctors in UP: यूपी में फर्जी डॉक्टर बनाने वाला गिरोह सक्रिय होने की बातें सामने आ रही हैं।  हरियाणा की फर्जी डिग्री के आधार पर डॉक्टर बने 41 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने के बाद जांच शुरू हो गई है।

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UP: Interstate gang producing fake doctors active in the state, degrees from these states raise suspicion
यूपी में फर्जी डॉक्टर का मामला। - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

 प्रदेश में फर्जी डिग्री के आधार पर डॉक्टर बनाने वाला अंतरराज्यीय गिरोह सक्रिय है। हरियाणा की फर्जी डिग्री के आधार पर डॉक्टर बने 41 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने के बाद जांच शुरू हो गई है। अब राजस्थान और मध्य प्रदेश से डिग्री लेकर पंजीयन कराने वालों पर भी संदेह जताया गया है। इनकी डिग्रियों की भी जांच की जाएगी। साथ ही मामले में बोर्ड के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में होगी।

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आयुर्वेदिक तथा यूनानी तिब्बी चिकित्सा पद्धति बोर्ड के रजिस्ट्रार डॉ. अखिलेश कुमार वर्मा ने 41 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। रिपोर्ट में आरोपियों के नाम के साथ अन्य अज्ञात लोगों के अंतरराज्यीय गिरोह से जुड़े होने की आशंका जताई गई है। आरोप है कि कूटरचित और फर्जी दस्तावेजों के जरिए अवैध रूप से वित्तीय लाभ कमाया जा रहा था। पहले विश्वविद्यालय या कॉलेज से मिले सत्यापन पत्र और विश्वविद्यालय के गजट अथवा सूची के आधार पर पंजीयन किया जाता था। अब व्यवस्था बदल दी गई है और सत्यापन के बिना पंजीयन नहीं किया जा रहा है। पुलिस ने मामले से संबंधित पत्रावलियां जुटानी शुरू कर दी हैं।
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राजस्थान, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश से भी पंजीयन
बोर्ड में राजस्थान, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की डिग्री के आधार पर भी कई लोगों का पंजीयन हुआ है। पंजीयन के बाद ये प्रदेश के विभिन्न जिलों में मरीजों का उपचार कर रहे हैं। राजस्थान के 10 और मध्य प्रदेश के छह डॉक्टरों की डिग्री फर्जी होने की शिकायत मिली है। बोर्ड ने पिछले 15 वर्षों में हुए पंजीयन की डिग्रियों की जांच का फैसला लिया है। फिलहाल इन 16 लोगों की पत्रावलियां निकलवाई गई हैं और संबंधित कॉलेजों को सत्यापन के लिए पत्र भेजे गए हैं।

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