भाजपाई सूरमा के साथ मोदी के खिलाफ योजना बना रहे मुलायम!
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केंद्र सरकार के भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के खिलाफ आंदोलन को उत्तर प्रदेश भी धार दे सकता है। राष्ट्रवादी स्वाभिमान आंदोलन के संरक्षक केएन गोविंदाचार्य और सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव की बुधवार को यहां हुई मुलाकात के बाद इसी तरह के संकेत मिल रहे हैं।
पता चला है कि इस मुलाकात के दौरान दोनों ने इस मुद्दे को लेकर संघर्ष की रणनीति पर बातचीत की और उसका खाका खींचा। खाका को अंतिम रूप देने का दारोमदार मुलायम ने गोविंदाचार्य पर ही डाल दिया।
जानकारी के मुताबिक, दो धुर विरोधी चेहरे जब आमने-सामने हुए तो एक-दूसरे के गले लगकर अभिवादन किया। इसके बाद मुलायम पुरानी यादों में खो गए।
उन्होंने आपातकाल के आंदोलन से लेकर बोफोर्स घोटाला के बाद हुए आंदोलन तथा पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह, देवीलाल सहित अन्य कई नेताओं की चर्चा की। साथ ही उस समय गोविंदाचार्य की भूमिका की स्मृतियां ताजा कीं। गोविंदाचार्य ने भी मुलायम की सक्रियता और संघर्ष के जज्बे की तारीफ की।
किसानों की सुरक्षा के लिए मांगी मदद
वैसे तो गोविंदाचार्य इसे सिर्फ शिष्टाचार भेंट बता चुके हैं, पर सूत्रों के अनुसार उन्होंने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा लाए गए भूमि अधिग्रहण अध्यादेश का मामला मुलायम के सामने रखा। उन्होंने इस मुद्दे पर देश भर के किसानों में मुखर हो रही नाराजगी का उल्लेख करते हुए मुलायम से भी इस संघर्ष में सहयोग मांगा।
सदन से लेकर सड़क तक साथ: मुलायम ने गोविंदाचार्य को सदन में इस मुद्दे पर विरोध का मंच बनाने में भी सहयोग देने का आश्वासन दिया है। जानकारी के मुताबिक, मुलायम ने उन्हें आश्वस्त किया कि उत्तर प्रदेश सरकार किसानों के साथ अन्याय नहीं होने देगी।
सिंचित भूमि के अधिग्रहण की सीमा 20 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी करने का फैसला जल्द ही हो जाएगा। इसके अलावा अन्य किसान विरोधी प्रावधानों को भी लागू नहीं किया जाएगा। हालांकि गोविंदाचार्य सिर्फ यह कहते हैं कि बहुत सारे मुद्दों पर बातचीत हुई है, जिनके परिणाम आगे देखने को मिलेंगे।