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UP: 20 मई तक यूपी में सड़क दुर्घटनाओं में करीब 7700 मौतें, दोपहर में बाहर निकलना सबसे जोखिम भरा
Sun, 25 May 2025 03:15 PM IST
ishwar ashish
पीटीआई, लखनऊ
पीटीआई, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Sun, 25 May 2025 03:15 PM IST
सार
उत्तर प्रदेश में 20 मई 2025 तक करीब 13000 से ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं। इस दौरान करीब 7700 मौतें हुई हैं। यहां देखें एक रिपोर्ट:
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : ANI
विस्तार
उत्तर प्रदेश में इस साल 1 जनवरी से 20 मई के बीच 13,000 से ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं और लगभग 7,700 मौतें दर्ज की गईं। एक नए राज्य-स्तरीय विश्लेषण में सामने आया है कि दोपहर और शाम सड़क उपयोगकर्ताओं के लिए सबसे खतरनाक समय बने हुए हैं। ये निष्कर्ष उत्तर प्रदेश सड़क सुरक्षा और जागरूकता प्रकोष्ठ द्वारा संकलित समय-आधारित विश्लेषणात्मक रिपोर्ट का हिस्सा हैं, जिसमें आईआरएडी (एकीकृत सड़क दुर्घटना डेटाबेस), ईडीएआर (ई-विस्तृत दुर्घटना रिकॉर्ड) और राज्य के अपने सड़क सुरक्षा डैशबोर्ड से प्राप्त डेटा का उपयोग किया गया है।
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आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2024 में उत्तर प्रदेश में 46,052 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 24,118 लोगों की मृत्यु हुई और 34,665 लोग घायल हुए। इसकी तुलना में, 2023 में 44,534 दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 23,652 लोगों की मृत्यु हुई और 31,098 लोग घायल हुए। नवीनतम विश्लेषण से पता चलता है कि 60 प्रतिशत से अधिक दुर्घटनाएं दोपहर (दोपहर 12 बजे से शाम 6 बजे तक) और शाम (शाम 6 बजे से रात 9 बजे तक) के समय हुईं।
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अध्ययन के अनुसार दोपहर का समय सबसे घातक रहा, जिसमें 4,352 दुर्घटनाएं और 2,238 मौतें दर्ज की गईं। जो इस प्रवृत्ति को इन घंटों के दौरान सड़कों पर "अत्यधिक गर्मी, चालक की थकान, ओवर-स्पीडिंग और वाहनों के बढ़ते भार" के संयोजन के लिए जिम्मेदार ठहराता है।
शाम के घंटों में 3,254 दुर्घटनाएं और 1,945 मौतें हुईं, जो "काम के बाद यातायात की भीड़ और सूर्यास्त के बाद दृश्यता में कमी" के कारण हुईं। सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे तक सुबह के घंटों में 2,629 दुर्घटनाएँ और 1,447 मौतें हुईं। हालांकि यह अपेक्षाकृत सुरक्षित था, फिर भी इस अवधि में स्कूल और कार्यालय के घंटों का ट्रैफिक प्रभाव था। देर रात के घंटों में रात 9 बजे से सुबह 3 बजे तक, 2,585 दुर्घटनाएं और 1,699 मौतें दर्ज की गईं।
देर के समय, हालांकि दुर्घटनाओं की संख्या कम थी, लेकिन खाली सड़कों पर तेज गति से वाहन चलाने और चालक की थकान के कारण गंभीरता काफी अधिक थी। सुबह 3 बजे से सुबह 6 बजे के बीच सबसे कम दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जो 506 थीं, लेकिन 392 मौतों के साथ, मृत्यु दर लगभग 77 प्रतिशत के साथ चिंताजनक रूप से उच्च थी।
अध्ययन में उल्लेख किया गया है कि "नींद से वंचित ड्राइवर और थके हुए लंबी दूरी के परिवहन ऑपरेटर" इन अत्यधिक घातक दुर्घटनाओं के पीछे प्रमुख कारक थे। रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि दोपहर और शाम की दुर्घटनाएं मात्रा और व्यवहार-संबंधी कारकों के कारण उच्च जोखिम वाली बनी हुई हैं, रात के समय और सुबह की दुर्घटनाएँ, हालांकि कम थीं लेकिन कहीं अधिक घातक थीं।
जवाब में, राज्य के सड़क सुरक्षा प्रकोष्ठ ने सर्वाधिक जोखिम वाले घंटों के दौरान प्रवर्तन अभियान चलाने, पुलिस और गति जांच उपकरणों की तैनाती बढ़ाने और वास्तविक समय में उल्लंघनों को ट्रैक करने के लिए सीसीटीवी निगरानी के बेहतर उपयोग की सिफारिश की है।
रिपोर्ट में जीपीएस-ट्रैकिंग और ट्रैफिक क्लीयरेंस प्रोटोकॉल के माध्यम से एम्बुलेंस सेवाओं को मजबूत करने का आह्वान किया गया है। यह सुबह के समय भीड़भाड़ को कम करने के लिए स्कूलों और कार्यालयों के समय पर पुनर्विचार करने का सुझाव देता है। देर रात ड्राइविंग के लिए, रिपोर्ट में आराम करने के लिए जगह, नेविगेशनल एड्स और चौबीसों घंटे हेल्पलाइन स्थापित करने और वाणिज्यिक चालकों की सहायता और निगरानी के लिए राजमार्ग चेक-पोस्ट सक्रिय करने की सिफारिश की गई है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहले सड़क दुर्घटना में होने वाली मौतों में 50 प्रतिशत की कमी लाने का लक्ष्य रखा था। सख्त प्रवर्तन, वाणिज्यिक ट्रांसपोर्टरों के लिए बेहतर प्रशिक्षण, लापरवाही के मामलों में कानूनी कार्रवाई और सभी सड़क उपयोगकर्ताओं को लक्षित करके जन जागरूकता अभियान, लेखकों द्वारा की गई कुछ अन्य सिफारिशें थीं।