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UP : स्मार्ट प्रीपेड मीटर मामले में बैकफुट पर आया पावर कार्पोरेशन, जवाब दाखिल कर कहा...

Sat, 01 Nov 2025 09:21 AM IST
आकाश द्विवेदी अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: आकाश द्विवेदी Updated Sat, 01 Nov 2025 09:21 AM IST
सार

कार्पोरेशन ने यह स्वीकार किया है कि आरडीसएस स्कीम में खरीदे गए स्मार्ट प्रीपेड मीटर का प्रयोग उपभोक्ताओं के मीटर बदलने के लिए किया जा रहा है।

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UP: Power Corporation on the back foot in the smart prepaid meter case, filed a reply and said...
बिजली विभाग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रदेश में प्रीपेड स्मार्ट मीटर मामले में पावर कार्पोरेशन बैकफुट पर आ गया है। आयोग को भेजे गए जवाब में कहा कि अभी कीमत वसूलने की अंतरिम व्यवस्था है। आगे से आयोग द्वारा तय किए गए मानकों के हिसाब से ही स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जाएंगे। कार्पोरेशन ने अपने जवाब में यह भी कहा कि वह आयोग में 10 बार प्रस्ताव भेज चुका है।

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प्रदेश में लग रहे प्रीपेड स्मार्ट मीटर की कीमत 6016 रुपये वसूलने, नियामक आयोग से अनुमति नहीं लेने, उपभोक्ताओं को प्रीपेड और पोस्टपेड का विकल्प नहीं चुनने देने के खिलाफ विद्युत उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग में याचिका दाखिल की है। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए नियामक आयोग ने पावर कार्पोरेशन को अवमानना नोटिस जारी किया।
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विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 142 में कार्रवाई की तलवार लटकती देख कार्पोरेशन ने बीच का रास्ता निकाला है। भेजे गए जवाब में कार्पोरेशन ने कहा कि अभी अंतरिम व्यवस्था के तहत शुल्क लिया जा रहा है। आगे आयोग जो भी तय करेगा उसे ही माना जाएगा।
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कार्पोरेशन ने यह स्वीकार किया है कि आरडीसएस स्कीम में खरीदे गए स्मार्ट प्रीपेड मीटर का प्रयोग उपभोक्ताओं के मीटर बदलने के लिए किया जा रहा है। इन उपभोक्ताओं से कोई शुल्क नहीं वसूल किया जाएगा। हालांकि पावर कार्पोरेशन ने भेजे गए जवाब में यह सवाल भी उठाया है कि उसने 10 बार डाटा कास्ट बुक को लेकर प्रस्ताव भेजा है, जिस पर अभी तक कोई फैसला नहीं हुआ है।

परिषद ने कार्पोरेशन के जवाब को गलत ठहराया

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने शुक्रवार को पावर कार्पोरेशन के जवाब को गलत ठहराते हुए नियामक आयोग में एक नया कानूनी प्रस्ताव दाखिल किया, जिसमें मांग की कि नियामक आयोग हर हाल में पावर कार्पोरेशन के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई शुरू करे।

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने नियामक आयोग को सौंपे कानूनी प्रस्ताव (लीगल प्रपोजल) में कहा कि नोटिस के जवाब में पावर कार्पोरेशन अंतरिम आदेश होने की दुहाई दे रहा है। वह अपने जवाब में केवल बिना अनुमोदन के हो रही वसूली को जायज ठहरा रहा है। कास्ट डाटा बुक आयोग से अनुमोदित नहीं होने की बात कही गई है। फिर भी उपभोक्ताओं से मनमाने ढंग से 6016 वसूले जा रहे हैं। 

कार्पोरेशन यह भी दुहाई दे रहा है कि वह 10 बार कॉस्ट डाटा बुक का प्रस्ताव भेजा है, लेकिन अनुमोदित नहीं हुआ। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या उसके गलत प्रस्ताव को बार-बार भेजने पर स्वीकार किया जाना चाहिए? परिषद ने कार्पोरेशन के प्रस्ताव की खामियां गिनाते हुए कहा कि आयोग में आए प्रस्ताव में जीएसटी की दरें दोगुनी भेजी गईं। कुछ सामग्री में कई गुना वृद्धि करके दर्शाया गया। 



परिषद ने इन कमियों को उजागर किया है। कार्पोरेशन ने अपने जवाब में यह भी कहा है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर की कीमत निकाली जाए तो वह 7000 से 9000 के बीच होगी। ऐसे में परिषद ने कहा कि राजस्थान में 2500 रुपये में स्मार्ट प्रीपेड मीटर कैसे लगाया जा रहा है।




 

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