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UP News : रोडवेज में आईटी कंपनी के भुगतान में 25 करोड़ का घोटाला, वायरल चार्जशीट से हुआ खुलासा
Mon, 25 Jul 2022 12:30 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Mon, 25 Jul 2022 12:30 AM IST
सार
रोडवेज ने दिसंबर 2015 में आईटी कार्य की परियोजना को गति देने के लिए एक समिति बनाई थी। इसी समिति पर मनमाने तरीके से कंपनी को 25 करोड़ से ज्यादा भुगतान कराने के आरोप लगे। सीएजी ने भी भुगतान पर सवाल उठाए थे।
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यूपी रोडवेज
विस्तार
उप्र. राज्य सड़क परिवहन निगम (रोडवेज) में आईटी कंपनी ट्राइमेक्स को 25.05 करोड़ रुपये का भुगतान कराने में घोटाला सामने आया है। इसका खुलासा मामले के आरोपी और लखनऊ परिक्षेत्र के क्षेत्रीय प्रबंधक पल्लव कुमार बोस को दी गई चार्जशीट के रविवार को सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हुआ।
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पल्लव को पिछले हफ्ते ही मुख्यालय में आईटी इकाई का प्रभारी प्रधान प्रबंधक बनाया गया है। पल्लव के पास पहले से ही लखनऊ सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज कंपनी के प्रबंध निदेशक की भी अतिरिक्त जिम्मेदारी है। यानी उनके पास पहले से ही दो पदों की जिम्मेदारी है। अब आईटी कंपनी को ज्यादा भुगतान कराने के मामले में आरोपी बोस को ही आईटी का प्रभार सौंपने से सवाल भी उठे रहे हैं।
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यह है मामला
रोडवेज ने दिसंबर 2015 में आईटी कार्य की परियोजना को गति देने के लिए एक समिति बनाई थी। समिति का अध्यक्ष लखनऊ परिक्षेत्र के आरएम पल्लव कुमार बोस और उनके प्रस्ताव पर वित्त इकाई से एमवी नातू (जो सेवानिवृत्त के बाद वर्तमान में लखनऊ सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज कंपनी में मैनेजर ऑपरेशन के पद पर कार्यरत हैं) एवं तकनीकी इकाई के एसपी सिंह को सदस्य बनाया गया था। इसी समिति पर मनमाने तरीके कंपनी को 25 करोड़ से ज्यादा भुगतान कराने के आरोप लगे। इसकी जांच पूर्व एमडी राजशेखर ने कराई थी। इसके बाद सीएजी ने भी भुगतान पर सवाल उठाए थे।
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तीन अफसरों को मिली थी चार्जशीट
इस घोटाले की जांच रिपोर्ट आने पर पूर्व एमडी धीरज साहू ने 25 जून 2021 को पल्लव कुमार बोस को चार्जशीट और इससे पूर्व एक जनवरी 2021 को एमवी नातू व एसपी सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण तलब किया था। तीनों अफसरों से एक हफ्ते में जवाब मांगा गया था। इनके जवाब पर क्या कार्रवाई हुई, कुछ पता नहीं है।
आरएम पर ये हैं प्रमुख आरोप
- सेवा प्रदाता को वित्तीय लाभ पहुंचाने के लिए सांठगांठ से सॉफ्टवेयर/पोर्टल तैयार कराया गया।
- सेवा प्रदाता को 25.05 करोड़ रुपये का अधिक भुगतान कराने का कुत्सित कार्य किया गया।
- अप्रमाणित सॉफ्टवेयर से आकलन कराकर निगम को वित्तीय हानि पहुंचाई गई।
‘ऐसी चार्जशीट तो लगती रहती है’
यह प्रकरण 18 माह पहले का है। इस मामले की जांच चल रही है। ऐसी चार्जशीट तो सभी को लगती रहती है। मेरे स्तर से न कोई भुगतान होता है और न ही हुआ है। भुगतान का काम एमडी ऑफिस से होता। मुझे ये पता नहीं क्या भुगतान हुआ और कब हुआ।
- पल्लव कुमार बोस, आरएम लखनऊ व प्रभारी प्रधान प्रबंधक रोडवेज