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UP News : नगर निकाय क्षेत्रों में केन्द्र सरकार की संपत्तियों पर सर्विस टैक्स वसूलेंगे निकाय
Mon, 14 Nov 2022 08:29 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Mon, 14 Nov 2022 08:29 PM IST
सार
विभिन्न नगर निकाय क्षेत्रों में स्थित केन्द्रीय संपत्तियों पर करीब 306 करोड़ रुपये बकाया है। इस धनराशि की वसूली के लिए अभियान चलाने का फैसला किया गया है।
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विस्तार
प्रदेश के नगर निकाय की सेवा का लाभ न लेने वाले केन्द्रीय संपत्तियों पर गृह कर के बजाए सिर्फ सेवा प्रभार लिए जाने की व्यवस्था है। इसके बावजूद तमाम केन्द्रीय विभागों ने इसकी अदायगी नहीं की है। विभिन्न नगर निकाय क्षेत्रों में स्थित केन्द्रीय संपत्तियों पर करीब 306 करोड़ रुपये बकाया है। इस धनराशि की वसूली के लिए अभियान चलाने का फैसला किया गया है।
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बता दें कि प्रदेश के नगर निकाय की सीमा में स्थित केन्द्र सरकार की उन संपत्तियों पर गृहकर के स्थान पर सेवा प्रभार लिए जाने का प्रावधान है। इसके अन्तर्गत संबंधित नगर निकाय द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली पूरी सेवा पर संपत्ति कर का 75 प्रतिशत, आंशिक सेवा के उपभोग पर 50 प्रतिशत और किसी तरह की सेवा पर 33 प्रतिशत सेवा प्रभार लिए जाने की व्यवस्था की गई है।
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इस संबंध में काफी पहले ही शासनादेश भी जारी कर दिया गया था। इसके बावजूद नगर निकायों द्वारा केन्द्र सरकार की संपत्तियों पर बकाया सेवा प्रभार की वसूली नहीं की जा रही है। इस समय करीब 360 करोड़ रुपये बकाया है। हाल में उप्र नगर पालिका वित्तीय संसाधन विका बोर्ड ने केन्द्रीय शहरी विकास और वित्त की और से जारी पत्र और नगर विकास विभाग की ओर से जारी शासनादेशों का संकलन कर विभाग को उपलब्ध कराया है।
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जिसमें केन्द्र सरकार की संपत्तियों पर सेवा प्रभार लिए जाने की व्यवस्था दी गई है। इसी आधार पर सेवा प्रभार लेने की संस्तुति भी की गई है। इस बारे में सभी नगर निकायों को भी सभी शासनादेश आदि उपलब्ध करा दिए गए हैं। ताकि वह सभी नगर निकाय अपने-अपने स्तर पर सेवा प्रभार वसूलने की कार्यवाही कर सकें।
इस संबंध में सभी नगर आयुक्त और अधिशासी अधिकारियों को पूर्व में विभाग द्वारा जारी शासनादेशों और केन्द्रीय शहरी विकास व वित्त मंत्रालयों के पत्रों के आधार पर अब तक के बकाया धनराशि की गणना करने के साथ ही उसकी वसूली करने के आदेश दिए गए हैं। विभाग का मानना है कि अगर इस पूरी धनराशि की वसूली कर ली जाए तो नगर निकायों को बड़ी राहत मिलेगी।