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UP News : डॉक्टर बनने की ख्वाहिश पूरी करने का साधन बने आयुष कॉलेज, अधिकारियों-प्रबंधकों के गठजोड़ से हुआ खेल

Tue, 15 Nov 2022 10:45 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Tue, 15 Nov 2022 10:45 AM IST
सार

आयुष कॉलेजों में वर्ष 2021 में हुए दाखिले की जांच चल रही है। अब वर्ष 2018, 2019 से 2020 में हुए दाखिले की भी जांच होगी। इसके लिए रैंडम प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसमें हर कॉलेज के पांच छात्रों के दाखिले की जांच की जाएगी।

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UP News : Ayush college became a means to fulfill the desire of becoming a doctor
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : iStock

विस्तार

उत्तर प्रदेश में आयुष विभाग के अधिकारियों और प्रबंधकों के गठजोड़ से दाखिला उद्योग चल रहा है। अब इसे खत्म करने की तैयारी है। ऐसे में बिना पढ़ाई डॉक्टर बनने की ख्वाहिश पूरी नहीं हो पाएगी। इसके लिए रणनीति बनाई जा रही है। 

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प्रदेश में निजी क्षेत्र के 80 आयुष कॉलेज हैं। इसमें आयुर्वेद के 85, होम्योपैथ के चार और यूनानी के 18 कॉलेज हैं। इन कॉलेजों में कुल 5,880 सीटें हैं। विभागीय अफसर दबी जुबान से स्वीकार करते हैैं कि इन सीटों को भरने के लिए आयुर्वेद विभाग के अधिकारियों और कॉलेज संचालकों का सिंडिकेट बन गया है। इसी का नतीजा है कि वर्ष 2021 के दाखिले में निजी क्षेत्र के कॉलेजों में 838 संदिग्ध छात्र मिले हैं। 

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सूत्र बताते हैं कि कॉलेज संचालक शत प्रतिशत सीटें भरने के लिए खुद ही कंडिडेट देने लगे। इसके लिए वे पुराने पैटर्न पर सूची बनाते हैं। कुछ को चालू सत्र में दाखिला दिलाते तो कुछ को अगले सत्र का आश्वासन देते हैं। इस तरह से यह नेटवर्क साल दर साल बढ़ता रहा।

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नीट 2021 में 891 छात्रों के दाखिले में हेराफेरी का मामला सामने आने के बाद इस सिंडिकेट को पूरी तरह से खत्म करने की रणनीति बनाई जा रही है। विभागीय अफसरों की मानें तो इसके लिए कड़े नियम बनाए जा रहे हैं। एक ही कॉलेज को दिखाकर अलग-अलग कोर्स चलाने पर भी रोक लगेगी। कॉलेजों की जीओ टैगिंग कराई जाएगी। अध्यापकों और यहां दाखिला लेने वाले छात्रों की उपस्थिति ऑनलाइन जांची जाएगी। दाखिले की पड़ताल होगी। इसके साथ ही कॉलेजों को मान्यता से लेकर उनकी सीटें बढ़ाने की भी निगरानी की जाएगी।


तीन साल के दाखिले की होगी जांच
आयुष कॉलेजों में वर्ष 2021 में हुए दाखिले की जांच चल रही है। अब वर्ष 2018, 2019 से 2020 में हुए दाखिले की भी जांच होगी। इसके लिए रैंडम प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसमें हर कॉलेज के पांच छात्रों के दाखिले की जांच की जाएगी। इस दौरान किसी छात्र का रिकॉर्ड गड़बड़ मिला तो एसटीएफ को सूचना देने के साथ ही अन्य छात्रों की भी जांच की जाएगी। सूत्रों का कहना है कि एसटीएफ मामले की जांच कर रही है लेकिन विभाग भी अपने स्तर पर जांच कर मुतमइन होना चाहता है।

 

जांच में दाखिला गड़बड़ मिलने पर वर्ष 2021 बैच की तरह ही उनका इनरोलमेंट भी रद्द किया जाएगा। उधर, निजी कॉलेजों में पिछले तीन साल में दाखिला लेने वाले छात्रों की उपस्थिति पंजिका तलब की गई है। इसमें देखा जाएगा कि कौन-कौन से छात्र ज्यादा अनुपस्थिति रहे। इस मामले में कॉलेज प्रबंधन की कार्रवाई का भी रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि वर्ष 2021 में संदिग्ध पाए गए छात्रों को निलंबित करने के बाद उनका इनरोलमेंट नंबर रद्द किया गया है। जांच रिपोर्ट के बाद इन सभी छात्रों का दाखिला रद्द कर जमा की गई धनराशि जब्त की जाएगी। 
 

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