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यूपी: दिसंबर के बाद नगर निगम माफ नहीं कर पाएगा गृहकर पर ब्याज, एक महीने में ई-नगर सेवा पर शिफ्ट हो जाएगा काम

Thu, 10 Sep 2026 06:38 PM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला, लखनऊ
अमर उजाला, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Thu, 10 Sep 2026 06:38 PM IST
सार

लखनऊ नगर निगम 15 दिसंबर के बाद बकाया गृहकर पर ब्याज माफ नहीं कर पाएगा। फिलहाल ओटीएस योजना के तहत करीब ढाई लाख भवनस्वामियों का 223 करोड़ रुपये ब्याज माफ किया जा रहा है। नए ई नगर सेवा सिस्टम से गृहकर निर्धारण, भुगतान और नामांतरण होगा। इससे रिकॉर्ड में पारदर्शिता बढ़ेगी और गड़बड़ी पर निगरानी संभव होगी।

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UP: Municipal corporations will not be able to waive interest on house tax after December; operations will shi
हाउस टैक्स। - फोटो : amar ujala

विस्तार

नगर निगम दिसंबर के बाद बकाया गृहकर पर ब्याज नहीं माफ करेगा। अभी ओटीएस में नगर निगम करीब ढ़ाई लाख बकाएदारों का 223 करोड़ रुपये ब्याज माफ कर रहा है। 15 दिसंबर को ओटीएस योजना समाप्त हो जाएगी, उसके बाद नगर निगम में ब्याज माफी पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी। यह तभी माफ हो पाएगा जब शासन आदेश करेगा क्योंकि नगर निगम अधिनियम में ब्याज माफी को लेकर कोई व्यवस्था नहीं दी गई।

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नगर निगम के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी विनय राय का कहना है कि पूरे प्रदेश के किसी नगर निगम में बकाया गृहकर पर ब्याज माफ करने की व्यवस्था नहीं है। अभी उनका ब्याज माफ हो जाता है जिनका गृहकर संशोधित होता है या पहली बार गृहकर निर्धारण होता है। 
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गलत निर्धारण पर संशोधन तो होगा मगर जो बकाया होगा उस पर ब्याज लगेगा। अभी जो माफ करने की व्यवस्था है वह 15 दिसंबर के बाद समाप्त हो जाएगी। ओटीएस में जो करीब ढ़ाई लाख भवनस्वामी आ रहे है पर ब्याज सहित करीब 650 करोड़ रुपये गृहकर बकाया है। जिसमें करीब 223 करोड़ रुपये ब्याज है।

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इस तरह लगता है ब्याज

नगर निगम बकाया गृहकर पर 15 प्रतिशत की दर से ब्याज लेता है। यदि आप एक साल गृहकर जमा नहीं करते हैं तो अगले साल उस 15 प्रतिशत ब्याज लग जाता है। उसके बाद भी जमा नहीं करते हैं तो आने वाले साल में पीछे वाले साल का ब्याज मूल टैक्स में जोड़ दिया जाता और फिर उस पर ब्याज लगाया जाता है। इस तरह यह चक्रवृद्धि ब्याज की तरह चलता है। ऐसे में जो लोग टैक्स जमा नहीं करते हैं उन पर ब्याज बढ़ता जाता है। कई बार निगम कर्मचारी भी कई साल पीछे से गृहकर रिवाइज कर देते हैं। जिस पर ब्याज भी उसी तरह लगा देते हैं।

 

लागू हो रहा नया सिस्टम

अभी नगर निगम के टैक्स इंस्पेक्टर गृहकर को अपने फायदे के लिए कम ज्यादा करते हैं तो उसकी जानकारी नगर निगम तक ही सीमित रहती है। ऐसे में मामला दबा रहता है लेकिन अब ऐसा नहीं हो पाएगा। शासन के आदेश पर अब नगर निगम गृहकर का पूरा डेटा ई नगर सेवा पर भी शिफ्ट कर दिया गया है। ऐसे में कोई बदलाव होगा तो शासन के अधिकारी भी देख सकेंगे। ई नगर सेवा की सुविधा अब महीने में शुरू हो जाएगी। इसमें गृहकर जमा करने से लेकर उसके नामांतरण तक की सुविधा मिलेगी।

 

पूरे प्रदेश में होगा गृहकर का एक एप

नगर निगम के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी विनय राय ने बताया कि अब पूरे प्रदेश में गृहकर का एक साफ्टवेयर ई नगर सेवा होगा। इसी के जरिए गृहकर निर्धारण और नामांतरण का काम होगा। होटल, अस्पताल, रेस्टोरेंट, नर्सिंग होम और शराब की दुकान आदि के लाइसेंस का काम ई नगर सेवा से ही हो रहा है। एक महीने के अंदर गृहकर से जुड़े सभी काम भी इसी से होंगे। अभी नगर निगम का सारा गृहकर का काम एनआईसी के साफ्टवेयर पर है।

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