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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP: Inspector and three constables caught in extortion found guilty in investigation.

UP: वसूली में फंसे दरोगा और तीन सिपाही जांच में दोषी, हर वाहन से लेते थे एक हजार रुपये, रिकॉडिंग अहम सुबूत

Fri, 23 May 2025 10:42 AM IST
ishwar ashish सूरज शुक्ला, अमर उजाला, लखनऊ
सूरज शुक्ला, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Fri, 23 May 2025 10:42 AM IST
सार

पिछले साल हुए स्टिंग ऑपरेशन में पकड़े जाने के बाद वसूली करने के मामले में दरोगा व तीन सिपाहियों की जांच होगी। इन सभी पर कार्रवाई की गाज गिर सकती है।

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UP: Inspector and three constables caught in extortion found guilty in investigation.
- फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अयोध्या हाईवे पर दूसरे राज्यों के वाहनों से वसूली करने में फंसे दरोगा और तीन सिपाही विभागीय जांच में दोषी पाए गए हैं। जांच रिपोर्ट ट्रैफिक मुख्यालय भेज दी गई है। रिपोर्ट के आधार पर अब इन पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की जाएगी। यह न्यूनतम वेतनमान से लेकर बर्खास्तगी तक हो सकती है।

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पिछले साल जून में तत्कालीन जॉइंट पुलिस आयुक्त कानून-व्यवस्था उपेंद्र अग्रवाल को शिकायत मिली थी कि अयोध्या हाईवे पर ट्रैफिक पुलिसकर्मी वाहनों से वसूली करते हैं। जेसीपी ने शिकायतों का संज्ञान लेकर दूसरे राज्य की एक बस में पुलिसकर्मी को परिचालक बनाकर बैठाकर स्टिंग ऑपरेशन करवाया।
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इस दौरान कमता तिराहे पर पुलिसकर्मियों न रोककर उनसे वसूली की। मामले में दरोगा उमेश सिंह व सिपाही शुभम कुमार, विवेक विशाल दुबे और सचिन कुमार पर विभूतिखंड थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। विभागीय जांच एडीसीपी ट्रैफिक को दी गई थी। जिसमें सभी आरोपी दोषी पाए गए हैं।


पुलिसकर्मियों को पकड़ने का जाल बिछाया गया 
जब इन पुलिसकर्मियों को पकड़ने का जाल बिछाया गया था, तब एक पुलिसकर्मी ने ऑडियो रिकॉर्डिंग की थी। इसमें आरोपी पुलिसकर्मी वसूली करते सुनाई दे रहे थे। जांच में इसको आधार बनाकर बेहद पुख्ता सुबूत के तौर पर शामिल किया गया है।

- जांच में सामने आया कि ये दूसरे राज्यों की खासकर निजी बसें, ट्रक, डंपर आदि को रोकते थे। हर वाहन से एक हजार रुपये की वसूली होती थी। वसूली देने से मना करने पर वाहन सीज करने की धमकी देते थे। मजबूर होकर जब चालक उनको रकम देते थे, तब उनको छोड़ा जाता था।

केस दर्ज हुआ, लेकिन कार्रवाइ रही शून्य
भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत आरोपी पुलिसकर्मियों पर केस दर्ज हुआ था, लेकिन गिरफ्तारी नहीं की गई। सूत्रों के मुताबिक जेसीपी का ट्रांसफर होने के बाद मामला दबा दिया गया था।

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