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UP News: बिजली निजीकरण की प्रक्रिया असंवैधानिक, मुख्मंत्री योगी से हस्तक्षेप की मांग

Wed, 22 Jan 2025 07:08 AM IST
ishwar ashish अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Wed, 22 Jan 2025 07:08 AM IST
सार

यूपी की एनर्जी टास्क फोर्स ने अपने आदेश में ऊर्जा मंत्रालय की स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्युमेंट्स फॉर प्राइवेटाइजेशन ऑफ डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसी को आधार बनाया है। जबकि दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट तौर पर कहा है कि इस बिडिंग डॉक्यूमेंट की कोई भी विधिक वैधता नहीं होती है। 

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UP:  Electricity privatization process unconstitutional
- फोटो : amar ujala

विस्तार

उत्तर प्रदेश में ऊर्जा मंत्रालय के स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्युमेंट्स फॉर प्राइवेटाइजेशन ऑफ डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसी के आधार पर ट्रांजक्शन एडवाइजर (टीए) नियुक्ति करने की तैयारी है। इसके लिए 23 को प्री बिडिंग कांफ्रेस होने जा रही है। उपभोक्ता परिषद का दावा है कि स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्युमेंट्स की विधिक मान्यता नहीं है। ऐसे में निजीकरण की प्रक्रिया असंवैधानिक है। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूरे मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।
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उपभोक्ता परिषद ने बताया कि नौ जनवरी को प्रदेश की एनर्जी टास्क फोर्स ने अपने आदेश में ऊर्जा मंत्रालय की स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्युमेंट्स फॉर प्राइवेटाइजेशन ऑफ डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसी को आधार बनाया है। जबकि दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट तौर पर कहा है कि इस बिडिंग डॉक्यूमेंट की कोई भी विधिक वैधता नहीं होती है। 
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पावर कार्पोरेशन की ओर से जारी ट्रांजक्शन एडवाइजर का विज्ञापन प्रस्तावित स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट के आधार पर निकाला गया है। क्योंकि ऊर्जा मंत्रालय द्वारा अभी तक 2020 में निजीकरण के लिए प्रस्तावित स्टैंडर्ड बिडिंग गाइडलाइन को अंतिम रूप नहीं दिया है। 
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परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि प्रस्तावित डॉक्यूमेंट की जब विधिक मान्यता नहीं है तो उसे आधिकारिक रूप से कैसे स्वीकृत किया जा सकता है? उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि पूरी कार्यवाही पर तत्काल रोक लगाई जाए और जब तक स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट को विधिक मान्यता नहीं मिलती तब तक उसके आधार पर कोई कार्यवाही न की जाए।
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