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Lucknow News: घुटने के दर्द में साल भर राहत देगा सिर्फ एक इंजेक्शन, टल सकती है सर्जरी
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लखनऊ। घुटने और दूसरे जोड़ों के दर्द से परेशान मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। अब हर मरीज को लंबे समय तक दर्द निवारक दवाओं पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ेगी। ऑस्टियोआर्थराइटिस के कुछ मरीजों में हयालूरोनिक एसिड का एक इंजेक्शन दर्द कम करने और जोड़ को चलाने-फिराने में राहत देने का विकल्प बन सकता है। इसका असर दवाओं और व्यायाम के साथ कई मामलों में एक साल तक रह सकता है।
केजीएमयू के हड्डी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार ने शनिवार को पत्रकार वार्ता में बताया कि यह इंजेक्शन खासकर उन मरीजों के लिए उपयोगी हो सकता है, जिन्हें दवा और दूसरे गैर सर्जिकल इलाज से पर्याप्त राहत नहीं मिल रही है। ऐसे मरीजों में फिलहाल जोड़ प्रत्यारोपण की जरूरत नहीं होती और कुछ मामलों में सर्जरी को टालने में भी मदद मिल सकती है। मौका केजीएमयू और यूपी ऑर्थोपैडिक एसोसिएशन की ओर से आयोजित 12वें यूपीओए ऑर्थोप्लास्टी कोर्स का था। प्रेसवार्ता के बाद पहले दिन कैडेवर पर रोबोटिक तकनीक पर कार्यशाला भी हुई।
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हर पांच में एक मरीज को बना रहता है दर्द
आयोजन सचिव डॉ. मयंक महेंद्र ने बताया कि हयालूरोनिक एसिड का उपयोग केवल कॉस्मेटिक उपचार तक सीमित नहीं है। जोड़ों के दर्द में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने कहा कि ओपीडी में आने वाले ऑस्टियोआर्थराइटिस के करीब 20 फीसदी मरीजों में सामान्य इलाज के बाद भी दर्द बना रहता है। कुछ मरीजों में उम्र या दूसरी बीमारियों के कारण तुरंत सर्जरी संभव नहीं होती। ऐसे मरीजों की स्थिति का सही आकलन करने के बाद इंजेक्शन पर विचार किया जा सकता है।
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दर्द से मिलेगी राहत, लेकिन स्थायी इलाज नहीं
डॉ. शैलेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि यह इंजेक्शन ऑस्टियोआर्थराइटिस को ठीक नहीं करता। न ही यह घिस चुके कार्टिलेज को दोबारा बना सकता है या बीमारी को बढ़ने से रोकता है। इसका मुख्य उद्देश्य दर्द कम करना और जोड़ की गतिविधि को बेहतर बनाना है।
घुटने के सिर्फ खराब हिस्से का भी हो सकता है प्रत्यारोपण
डॉ. मयंक ने बताया कि घुटने का केवल क्षतिग्रस्त हिस्सा बदलकर आंशिक घुटना प्रत्यारोपण भी किया जा सकता है। इसमें घुटने के स्वस्थ हिस्से सुरक्षित रहते हैं। कार्यशाला में देशभर के 40 डॉक्टरों को आधुनिक तकनीकों का कैडेवर पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम में डॉ. शाह वली उल्लाह, डॉ. धर्मेंद्र, डॉ. शेखर श्रीवास्तव और डॉ. हेमंत शर्मा भी शामिल रहे।