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UP Election Result: भाजपा ने झटका खाकर भी बनाया रिकॉर्ड, मध्य और पश्चिम में पिछड़े, लेकिन मोहनलालगंज में पहली बार दर्ज की जीत
Fri, 11 Mar 2022 12:03 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 11 Mar 2022 12:03 PM IST
सार
लखनऊ की वीआईपी मानी जा रहीं सीटों में भाजपा के दोनों निवर्तमान मंत्रियों आशुतोष टंडन ने लखनऊ पूर्व तो ब्रजेश पाठक ने कैंट सीट से एकतरफा जीत दर्ज कर अपना झंडा बुलंद रखा। सरोजनीनगर सीट पर सरकारी नौकरी छोड़कर भाजपा से प्रत्याशी बने राजेश्वर सिंह ने अनुमान के अनुसार जीत का परचम लहराया।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
विधानसभा चुनाव में भाजपा ने राजधानी में झटका खाकर भी भगवा फहराया है। 2017 के चुनाव में नौ में से आठ सीटें पाने वाली पार्टी को इस बार सात सीटें मिली हैं। खास बात यह है कि शहर की दो सीटों पर भाजपा को मात मिली है, लेकिन उसने पहली बार मोहनलालगंज में जीत दर्ज करने का भी रिकॉर्ड बनाया है। इसके साथ ही जिले की ग्रामीण क्षेत्र की सभी सीटों पर पहली बार जीत हासिल करने का तमगा भी उसे मिला है।
भाजपा के हाथ से फिसलीं दो सीटों में लखनऊ मध्य सीट पर तो खुद पार्टी के नेता पहले से कड़ा मुकाबला मान रहे थे। इस सीट से पिछली बार जीते कानून मंत्री ब्रजेश पाठक को इस बार कैंट से प्रत्याशी बना दिया गया था। ऐसे में पार्टी ने यहां स्थानीय कार्यकर्ता व पांच बार के सभासद रहे रजनीश गुप्ता को टिकट दे दिया था।
पहली बार चुनाव लड़े रजनीश ने मेहनत भी जमकर की, लेकिन पुराने व जनता से जुड़े नेता माने जाने वाले सपा प्रत्याशी पूर्व मंत्री रविदास मेहरोत्रा ने उन्हें हरा दिया। इसी तरह भाजपा पश्चिम सीट भी नहीं बचा सकी। यह सीट पिछली बार भाजपा ने जीती थी और पूर्व विधायक सुरेश श्रीवास्तव के निधन के बाद इस बार क्षेत्र के पुराने कार्यकर्ता अंजनी श्रीवास्तव को पार्टी ने मैदान में उतारा था।
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अंजनी मतगणना में शुरुआत से कई राउंड तक आगे भी रहे, लेकिन बाद में सपा उम्मीदवार अरमान खान ने बढ़त ली तो रुके नहीं। काफी देर तक गणना चली। कुछ मशीनों में गड़बड़ी के कारण वीवीपैट की गिनती हुई, लेकिन अंजनी को जीतने वाले मत नहीं मिल सके।
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भाजपा के हाथ से फिसलीं दो सीटों में लखनऊ मध्य सीट पर तो खुद पार्टी के नेता पहले से कड़ा मुकाबला मान रहे थे। इस सीट से पिछली बार जीते कानून मंत्री ब्रजेश पाठक को इस बार कैंट से प्रत्याशी बना दिया गया था। ऐसे में पार्टी ने यहां स्थानीय कार्यकर्ता व पांच बार के सभासद रहे रजनीश गुप्ता को टिकट दे दिया था।
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पहली बार चुनाव लड़े रजनीश ने मेहनत भी जमकर की, लेकिन पुराने व जनता से जुड़े नेता माने जाने वाले सपा प्रत्याशी पूर्व मंत्री रविदास मेहरोत्रा ने उन्हें हरा दिया। इसी तरह भाजपा पश्चिम सीट भी नहीं बचा सकी। यह सीट पिछली बार भाजपा ने जीती थी और पूर्व विधायक सुरेश श्रीवास्तव के निधन के बाद इस बार क्षेत्र के पुराने कार्यकर्ता अंजनी श्रीवास्तव को पार्टी ने मैदान में उतारा था।
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अंजनी मतगणना में शुरुआत से कई राउंड तक आगे भी रहे, लेकिन बाद में सपा उम्मीदवार अरमान खान ने बढ़त ली तो रुके नहीं। काफी देर तक गणना चली। कुछ मशीनों में गड़बड़ी के कारण वीवीपैट की गिनती हुई, लेकिन अंजनी को जीतने वाले मत नहीं मिल सके।
वहीं, जिले की वीआईपी मानी जा रहीं सीटों में भाजपा के दोनों निवर्तमान मंत्रियों आशुतोष टंडन ने लखनऊ पूर्व तो ब्रजेश पाठक ने कैंट सीट से एकतरफा जीत दर्ज कर अपना झंडा बुलंद रखा। सरोजनीनगर सीट पर सरकारी नौकरी छोड़कर भाजपा से प्रत्याशी बने राजेश्वर सिंह ने अनुमान के अनुसार जीत का परचम लहराया।
इसी तरह केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर की प्रतिष्ठा से जोड़कर देखी जा रही मलिहाबाद के साथ मोहनलालगंज सीट पर भी भगवा फहरा। इसमें मोहनलालगंज ऐसी सीट थी, जहां आजादी के बाद से आज तक भाजपा नहीं जीती थी। पिछली बार भगवा लहर में पार्टी का यहां से प्रत्याशी ही नहीं था। पूर्व विधायक आरके चौधरी को पार्टी ने समर्थन दिया था, लेकिन वे जीत नहीं सके।
इस बार कौशल किशोर के पारिवारिक संबंधी बताए जा रहे अमरेश कुमार को पार्टी ने प्रत्याशी बनाया और उन्होंने अप्रत्याशित जीत दर्ज कराई। वहीं, मलिहाबाद में कौशल किशोर की पत्नी जयदेवी दूसरी बार चुनी गईं। वहीं, बख्शी का तालाब में भाजपा के योगेश शुक्ला ने जीत दर्ज कराकर विरोधियों का मुंह बंद कर दिया। लखनऊ उत्तर सीट भी रोचक मुकाबले में भाजपा के खाते में बरकरार रही और नीरज बोरा यहां से फिर विधायक बने।
कैडर के कार्यकर्ताओं को झटका
भाजपा ने पश्चिम, मध्य व बीकेटी से पार्टी कैडर के पुराने कार्यकर्ताओं को पहली बार प्रत्याशी बनाया था। पश्चिम सीट पर तो बाहर से उम्मीदवार न उतारने का स्थानीय नेताओं ने दबाव भी बनाया था। ऐसे में कार्यकर्ताओं पर भी दबाव था कि पार्टी की ओर से उतारे गए उनके बीच के प्रत्याशी को जीत मिले, लेकिन दो में से सिर्फ बीकेटी से योगेश शुक्ला ही पुराने कार्यकर्ता के रूप में जीते। बाकी मध्य व पश्चिम सीट में निराशा हाथ लगी। ये सीटें मुसलिम बाहुल्य भी हैं।
इसी तरह केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर की प्रतिष्ठा से जोड़कर देखी जा रही मलिहाबाद के साथ मोहनलालगंज सीट पर भी भगवा फहरा। इसमें मोहनलालगंज ऐसी सीट थी, जहां आजादी के बाद से आज तक भाजपा नहीं जीती थी। पिछली बार भगवा लहर में पार्टी का यहां से प्रत्याशी ही नहीं था। पूर्व विधायक आरके चौधरी को पार्टी ने समर्थन दिया था, लेकिन वे जीत नहीं सके।
इस बार कौशल किशोर के पारिवारिक संबंधी बताए जा रहे अमरेश कुमार को पार्टी ने प्रत्याशी बनाया और उन्होंने अप्रत्याशित जीत दर्ज कराई। वहीं, मलिहाबाद में कौशल किशोर की पत्नी जयदेवी दूसरी बार चुनी गईं। वहीं, बख्शी का तालाब में भाजपा के योगेश शुक्ला ने जीत दर्ज कराकर विरोधियों का मुंह बंद कर दिया। लखनऊ उत्तर सीट भी रोचक मुकाबले में भाजपा के खाते में बरकरार रही और नीरज बोरा यहां से फिर विधायक बने।
कैडर के कार्यकर्ताओं को झटका
भाजपा ने पश्चिम, मध्य व बीकेटी से पार्टी कैडर के पुराने कार्यकर्ताओं को पहली बार प्रत्याशी बनाया था। पश्चिम सीट पर तो बाहर से उम्मीदवार न उतारने का स्थानीय नेताओं ने दबाव भी बनाया था। ऐसे में कार्यकर्ताओं पर भी दबाव था कि पार्टी की ओर से उतारे गए उनके बीच के प्रत्याशी को जीत मिले, लेकिन दो में से सिर्फ बीकेटी से योगेश शुक्ला ही पुराने कार्यकर्ता के रूप में जीते। बाकी मध्य व पश्चिम सीट में निराशा हाथ लगी। ये सीटें मुसलिम बाहुल्य भी हैं।