UP: 21.47 करोड़ के बैंक घोटाले में ईडी ने शुरू की जांच, मांगे अभिलेख, बिना दस्तावेज बांटे गए ऋण
घोटाले का खुलासा चार्टर्ड अकाउंटेंट की ऑडिट रिपोर्ट से हुआ। दो जनवरी 2026 को प्रस्तुत रिपोर्ट में ऋण वितरण में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं उजागर हुईं। जांच में सामने आया कि ऋण वितरण से पहले आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन नहीं किया गया।
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उत्तर प्रदेश राज्य सहकारी बैंक की बड़गांव शाखा में सामने आए 21.47 करोड़ रुपये के बहुचर्चित घोटाले की जांच अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी शुरू कर दी है। ईडी ने मामले में बैंक प्रबंधन से आवश्यक दस्तावेज तलब किए हैं और वित्तीय लेन-देन तथा संदिग्ध खातों की गहन पड़ताल शुरू कर दी है।
ईडी द्वारा जांच शुरू किए जाने की पुष्टि इलाहाबाद हाईकोर्ट लखनऊ खंडपीठ में सुनवाई के दौरान अधिवक्ता ने की। सोमवार को आरोपी दुष्यंत प्रताप सिंह की याचिका पर सुनवाई होनी है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हैं। वैसे ईडी की एंट्री के बाद यह मामला अब केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रह गया है। मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय अनियमितताओं के पहलुओं की जांच में यदि संदिग्ध लेन-देन की पुष्टि होती है तो आरोपियों पर सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है। जांच एजेंसियों की संयुक्त कार्रवाई से बड़े खुलासे संभव हैं।
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ऑडिट में खुला था घोटाला
बैंक में हुए इस घोटाले का खुलासा चार्टर्ड अकाउंटेंट की ऑडिट रिपोर्ट से हुआ। दो जनवरी 2026 को प्रस्तुत रिपोर्ट में ऋण वितरण में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं उजागर हुईं। जांच में सामने आया कि ऋण वितरण से पहले आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन नहीं किया गया। आरोप है कि बैंक अधिकारियों ने अपने परिजनों और परिचितों के साथ मिलकर गिरोह बनाया और खातों में धनराशि ट्रांसफर कर उसे निकाल लिया। इसके अलावा बैंक के पांच आंतरिक खातों से 46.13 लाख रुपये अनधिकृत रूप से निकालकर अन्य खातों में स्थानांतरित किए गए। वहीं, 205 खाताधारकों के ऋण और बचत खातों से कुल 21.47 करोड़ रुपये की निकासी की गई।
खाताधारकों के साथ भी धोखाधड़ी
मामले में कई खाताधारकों के साथ धोखाधड़ी की बात भी सामने आई है। एक खाताधारक ने नौ लाख रुपये का ऋण लिया था और नियमित किस्त जमा कर रहे थे, लेकिन बाद में उनके नाम पर 31 लाख रुपये का ऋण दर्शाया गया। इस तरह का खेल करीब चार वर्षों तक चलता रहा। 12 जनवरी को कोतवाली नगर में दर्ज कराई गई प्राथमिकी की जांच पुलिस कर रही है। अब तक छह आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, जबकि अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश जारी है।
संपत्ति जब्ती की तैयारी में जुटी पुलिस
पुलिस ने आरोपियों की चल-अचल संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अब तक करीब 4.11 करोड़ रुपये की संपत्ति का विस्तृत ब्योरा जुटाया जा चुका है, जबकि कुल संपत्ति का आकलन करीब छह करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। इसमें लग्जरी वाहन, फ्लैट और जमीन शामिल हैं, जो गोंडा, अयोध्या और लखनऊ में स्थित बताए जा रहे हैं।
बैंक घोटाले के आरोपी
इस घोटाले में तत्कालीन शाखा प्रबंधक पवन पाल, अजय कुमार, सुशील कुमार गौतम, तत्कालीन सहायक कैशियर पवन कुमार, सुमित्रा पाल, खाताधारक संजना सिंह, राज प्रताप सिंह, जय प्रताप सिंह, फूल मोहम्मद, राघवराम, शिवाकांत वर्मा, रितेंद्र पाल सिंह, गीता देवी वर्मा, दुष्यंत प्रताप सिंह, मोहम्मद असलम और प्रतीक कुमार सिंह आरोपी हैं।